ट्रम्प ने रक्षामंत्री के कहने पर ईरान पर हमला किया:उपराष्ट्रपति वेंस इससे खुश नहीं थे; ईरान को एटमी हथियार बनाने से रोकना था
अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का 25वां दिन हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के कहने पर ईरान पर हमले का आदेश दिया था।
अल जजीरा के मुताबिक ट्रम्प ने कहा कि हेगसेथ सबसे पहले ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के समर्थन में आगे आए थे। हेगसेथ का मानना था कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना जरूरी है, इसलिए कार्रवाई करनी चाहिए।
हालांकि ट्रम्प सरकार के अंदर भी इस मुद्दे पर पूरी सहमति नहीं है। ट्रम्प ने माना कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस फैसले से पूरी तरह खुश नहीं थे, लेकिन उन्होंने खुलकर विरोध भी नहीं किया।
वहीं पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका का मकसद ईरान की मिसाइल, ड्रोन और नौसेना ताकत खत्म करना है। लेकिन यह युद्ध कब खत्म होगा, इस बारे में उन्होंने कुछ साफ नहीं कहा।
ट्रम्प ने ईरान पर हमला 15 दिन के लिए टाला
ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हालिया बातचीत के बाद 15 मुद्दों पर सहमति बनी है। इन मुद्दों की पूरी लिस्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने ईरान के पावर प्लांट पर हमले 5 दिन के लिए टाल दिए, जबकि इससे पहले होर्मुज खोलने के लिए 48 घंटे की चेतावनी दी थी।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच कोई बातचीत नहीं हो रही है। वहीं, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये के साथ मिलकर ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने रविवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से बातचीत की।
ईरान जंग से जुड़ी 3 तस्वीरें…



अमेरिका-इजराइल के साथ जंग को ईरान ने एक मौके में बदल दिया है। अमेरिका ने खार्ग आइलैंड के पास सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन ग्लोबल ऑयल संकट के डर से तेल टर्मिनल को सीधे निशाना नहीं बनाया। इसी का फायदा उठाते हुए ईरान ने खार्ग टर्मिनल चालू रखा और ‘घोस्ट फ्लीट’ के जरिए चीन को सप्लाई जारी रखी है।
इंटरनेशनलएनर्जी एजेंसी और S&P ग्लोबल के मुताबिक, ईरान रोजाना 1.7 से 2 मिलियन (17 से 20 लाख) बैरल तेल एक्सपोर्ट कर रहा है। देश के करीब 90% तेल का एक्सपोर्ट अभी भी खार्ग टर्मिनल से हो रहा है।
साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले से एक्सपोर्ट प्रभावित हुआ, लेकिन गैस सप्लाई पूरी तरह बंद नहीं हुई। रिपोर्ट है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले विदेशी जहाजों से ईरान करीब 16.5 करोड़ रुपए प्रति जहाज ‘वॉर टैक्स’ भी वसूल रहा है।

डिमोना शहर पर हमले से इजराइली डिफेंस की पोल खुली
इजराइल के सबसे सुरक्षित इलाकों में उसका मुख्य परमाणु रिसर्च सेंटर माना जाता है। डिमोना न्यूक्लियर फैसिलिटी नेगेव रेगिस्तान में डिमोना शहर के पास स्थित है। यहां सुरक्षा बहुत कड़ी रहती है और इसे बचाने के लिए कई परतों वाली मिसाइल डिफेंस सिस्टम लगी हुई है।
लेकिन शनिवार रात एक चौंकाने वाली घटना हुई। ईरान की दो बैलिस्टिक मिसाइलें इजराइल के एयर डिफेंस को चकमा देकर डिमोना और पास के शहर अराद के रिहायशी इलाकों में गिर गईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए मिसाइलों ने 1500 किमी से ज्यादा दूरी तय की
ये दोनों हमले करीब तीन घंटे के अंतर से हुए। दोनों हमलों को रोकने में आयरन डोम, डेविड्स स्लिंग, एरो-3 और अमेरिकी डिफेंस सिस्टम THAAD फेल हो गए। इजराइल के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इस हमले में 180 लोग घायल हुए हैं, जिनमें कुछ की हालत गंभीर है।

ईरान ने जासूसी के आरोप में 3 लोगों को गिरफ्तार किया
ईरान के शाहरूद शहर में पुलिस ने अमेरिका-इजराइल के लिए जासूसी के आरोप में 3 लोगों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस का कहना है कि ये लोग सेना और सुरक्षा से जुड़ी अहम जगहों की जानकारी इकट्ठा कर रहे थे और उसे दुश्मन देशों को भेजने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने इनके पास से कुछ मोबाइल और दूसरे कम्युनिकेशन इक्विपमेंट भी बरामद किया है।
किम जोंग बोले- एटमी हथियार रखने का फैसला सही था, ईरान जंग ने सच साबित किया
नॉर्थ कोरिया के नेता किम जोंग उन ने देश के पास परमाणु हथियार होने को लेकर खुशी जताई है। सरकारी मीडिया के मुताबिक उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल के ईरान पर किए गए हमले साबित करते हैं, कि उनके देश का परमाणु हथियार रखने का फैसला सही था।
किम ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा युद्ध दिखाता है कि आज की दुनिया में सिर्फ मजबूत सैन्य ताकत ही किसी देश को सुरक्षित रख सकती है। उन्होंने यह बयान सोमवार को संसद में लंबे भाषण के दौरान दिया।
अपने भाषण में किम ने दक्षिण कोरिया के प्रति सख्त रुख दोहराया और कहा कि वह अपने देश की परमाणु ताकत को और मजबूत करेंगे, ताकि अमेरिका को रोका जा सके।
