अमेरिका-ईरान अगले हफ्ते फिर इस्लामाबाद में बातचीत कर सकते हैं:ट्रम्प बोले- ईरान के जवाब का इंतजार; तेहरान ने न्यूक्लियर प्रोग्राम रोकने की मांग ठुकराई

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने को लेकर अगले हफ्ते पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में फिर बातचीत शुरू हो सकती है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देश मध्यस्थों के जरिए एक समझौता ड्राफ्ट पर काम कर रहे हैं, जिससे एक महीने तक चलने वाली औपचारिक वार्ता का रास्ता खुल सकता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका की तरफ से प्रस्तावित 14 बिंदुओं वाले ड्राफ्ट में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, होर्मुज स्ट्रेट में तनाव कम करने और ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को किसी दूसरे देश भेजने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्हें ईरान की तरफ से जल्द जवाब मिलने की उम्मीद है। अगर बातचीत आगे बढ़ी तो सीजफायर को और लंबा किया जा सकता है।

साथ ही अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम या हाईली एनरिच्ड यूरेनियम पर कोई समझौता नहीं करेगा।

पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में पहले दौर की बातचीत हुई थी। 21 घंटे तक यह वार्ता चलने के बावजूद नाकाम हो गई थी।
पाकिस्तान की मध्यस्थता में ईरान और अमेरिका के बीच 11-12 अप्रैल को इस्लामाबाद में पहले दौर की बातचीत हुई थी। 21 घंटे तक यह वार्ता चलने के बावजूद नाकाम हो गई थी।
दूसरे दौर की बातचीत के लिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची 24 अप्रैल को इस्लामाबाद पहुंचे थे। लेकिन राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर का पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया था।
दूसरे दौर की बातचीत के लिए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची 24 अप्रैल को इस्लामाबाद पहुंचे थे। लेकिन राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर का पाकिस्तान दौरा रद्द कर दिया था।

पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स

1. ईरान बोला- होर्मुज में दखल दिया तो जंग फिर शुरू होगी: ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी कि अगर उसने होर्मुज स्ट्रेट में फिर दखल दिया तो क्षेत्र में दोबारा युद्ध शुरू हो सकता है।

2. अमेरिका का दावा- 70 से ज्यादा जहाजों को रोका: US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि उसने 70 से ज्यादा जहाजों को ईरानी बंदरगाहों तक पहुंचने या वहां से निकलने से रोका। अमेरिका के मुताबिक इन जहाजों में 13 अरब डॉलर से ज्यादा कीमत का तेल ले जाने की क्षमता थी।

3. UAE पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का दावा: UAE ने कहा कि ईरान ने 2 बैलिस्टिक मिसाइल और 3 ड्रोन दागे, जिन्हें एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में नष्ट कर दिया। हमले में 3 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई।

4. ईरान-अमेरिका के बीच 30 दिन के समझौते पर चर्चा: रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देश 30 दिन तक संघर्ष रोकने और होर्मुज स्ट्रेट को व्यापारिक जहाजों के लिए खोलने के प्रस्ताव पर बातचीत कर रहे हैं। परमाणु कार्यक्रम और एनरिच्ड यूरेनियम अभी सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है।

5. होर्मुज संकट से तेल और सोने की कीमतों में उछाल: होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ने के बाद ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीद से सोने की कीमतों में तेजी देखी गई।

 

अमेरिका और इजराइल के ईरान के खिलाफ युद्ध का असर चीन के आर्थिक और रणनीतिक हितों पर भी पड़ा है। यह बात दोहा इंस्टीट्यूट फॉर ग्रेजुएट स्टडीज में अंतरराष्ट्रीय राजनीति के सहायक प्रोफेसर मुहनद सेलूम ने कही।

अल जजीरा से बातचीत में सेलूम ने कहा कि चीन ने युद्ध में सीधे ईरान का सैन्य समर्थन नहीं किया, क्योंकि इसके गंभीर और महंगे परिणाम हो सकते थे।

हालांकि, उन्होंने कहा कि चीन ईरान को पूरी तरह अकेला भी नहीं छोड़ सकता था। अगर ऐसा होता, तो दुनिया में यह मैसेज जाता कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में सिर्फ अमेरिका ही प्रभावी ताकत है।

सेलूम के मुताबिक, चीन पहले ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपना वीटो अधिकार इस्तेमाल कर चुका है। यह उन प्रस्तावों के दौरान हुआ, जिनमें होर्मुज के मुद्दे पर ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही थी।

उन्होंने कहा कि फिलहाल चीन की ओर से ईरान को सीधे सैन्य मदद दिए जाने की संभावना नहीं दिखती। लेकिन संभव है कि अमेरिका के प्रतिबंध झेल रहीं कुछ चीनी कंपनियों ने ईरान को तकनीकी सहायता दी हो।

ईरान जंग अमेरिका को पीछे हटना पड़ सकता है। यह दावा पॉलिसी एक्सपर्ट सिबिल फारेस और अर्थशास्त्री जेफ्री सैक्स ने किया है।

इनके मुताबिक अमेरिका इस युद्ध को लंबे समय तक जारी नहीं रख सकता, क्योंकि इससे पूरे क्षेत्र की तेल, गैस और समुद्री वॉटर प्यूरिफिकेशन को भारी नुकसान पहुंच सकता है। इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजराइल की शुरुआती योजना ईरान की सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व क्षमता को कमजोर करने की थी। माना जा रहा था कि बड़े हवाई हमलों के बाद ईरानी सरकार टूट जाएगी और तेहरान में अमेरिका समर्थक सरकार बनाई जा सकेगी।

ट्रम्प को उम्मीद थी कि ईरान में वही स्थिति बनेगी जैसी वेनेजुएला में देखने को मिली थी। वहां जनवरी 2026 में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने के बाद अमेरिका को सहयोगी सरकार मिली थी।

दक्षिणी लेबनान के नबाटीह शहर में इजराइली ड्रोन हमले में घायल हुई एक बच्ची की भी मौत हो गई है।

लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी के अनुसार, बच्ची का इलाज नबाटीह स्थित नबीह बेरी गवर्नमेंटल यूनिवर्सिटी अस्पताल में चल रहा था, जहां उसने दम तोड़ दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, बच्ची और उसके पिता मोटरसाइकिल पर सवार थे। इसी दौरान अल-सबाह हाई स्कूल के पास उन पर पहला ड्रोन हमला किया गया। इसके बाद दो और ड्रोन हमले हुए।

हमले में पिता की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई थी।

ईरान फुटबॉल महासंघ (FFIRI) ने कहा है कि देश की पुरुष फुटबॉल टीम 2026 फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा लेगी, लेकिन मेजबान देशों अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको को उसकी शर्तें माननी होंगी।

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इजराइल के साथ तनाव के कारण ईरान की भागीदारी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

पिछले महीने कनाडा ने फीफा कांग्रेस में शामिल होने पहुंचे ईरान फुटबॉल महासंघ के प्रमुख को एंट्री देने से इनकार कर दिया था। कनाडा ने उनके ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से संबंधों का हवाला दिया था। कनाडा ने 2024 में IRGC को आतंकी संगठन घोषित किया था।

ईरान फुटबॉल महासंघ ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर कहा, हम 2026 वर्ल्ड कप में जरूर हिस्सा लेंगे, लेकिन मेजबान देशों को हमारी चिंताओं का ध्यान रखना होगा। हम अपने विश्वास, संस्कृति और सिद्धांतों से पीछे नहीं हटेंगे।

महासंघ के अध्यक्ष मेहदी ताज ने सरकारी टीवी से बातचीत में कहा कि ईरान ने टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए 10 शर्तें रखी हैं।

इन शर्तों में खिलाड़ियों और स्टाफ को वीजा देने की गारंटी, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान, इसके साथ एयरपोर्ट, होटल और स्टेडियम तक जाने वाले रास्तों पर कड़ी सुरक्षा शामिल है।

ईरान फुटबॉल टीम की तस्वीर।
ईरान फुटबॉल टीम की तस्वीर।
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