ट्रम्प का दावा- ईरानी शहर पर प्रदर्शनकारियों का कब्जा:सिक्योरिटी फोर्स ने मशहद छोड़ा, यह देश का सबसे बड़ा धार्मिक शहर

0 115

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद पर अब प्रदर्शनकारियों का कब्जा हो गया है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर लिखा-

QuoteImage

दस लाख से ज्यादा लोगों ने प्रदर्शन किया। ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर प्रदर्शनकारियों के नियंत्रण में आ गया है। सरकार की सुरक्षा बलों ने शहर छोड़ दिया है।

QuoteImage

मशहद की आबादी करीब 40 लाख है। यह शहर तुर्कमेनिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा के पास स्थित है। यह ईरान का सबसे बड़ा धार्मिक शहर है। मशहद में इमाम रजा का पवित्र दरगाह भी है, जो शिया मुसलमानों का एक बहुत बड़ा तीर्थ स्थल माना जाता है।

हालांकि, शहर पर कब्जे को लेकर ट्रम्प के दावे की पुष्टि नहीं हो पाई है। किसी भी भरोसेमंद रिपोर्ट में यह साबित नहीं हुआ है कि सुरक्षा बल पूरी तरह शहर छोड़ चुके हैं या मशहद पूरी तरह प्रदर्शनकारियों के कब्जे में चला गया है।

ट्रम्प के दावे का स्क्रीनशॉट…

100 शहरों में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन, अब तक 62 की मौत

ईरान में महंगाई के खिलाफ 13 दिनों से चल रहे प्रदर्शन के बीच गुरुवार रात को हालात और खराब हो गए। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में 100 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन फैल चुका है।

अमेरिकी ह्यूमन राइट एजेंसी के मुताबिक, प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा में अब तक 62 लोग मारे गए हैं। एक पुलिस अधिकारी की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। जबकि 2,270 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है।

खामेनेई बोले- ट्रम्प को खुश करने के लिए देश को बर्बाद न करें

ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने देशभर में प्रदर्शनों के बीच शुक्रवार को पहली बार राष्ट्र को संबोधित किया। ईरान की सरकारी टीवी ने उनका भाषण प्रसारित किया।

खामेनेई ने कहा कि ईरान ‘विदेशियों के लिए काम करने वाले भाड़े के लोगों’ को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनों के पीछे विदेशी एजेंट हैं जो देश में हिंसा भड़का रहे हैं।

खामेनेई ने कहा कि देश में कुछ ऐसे उपद्रवी हैं जो सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाकर अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करना चाहते हैं। लेकिन ईरान की एकजुट जनता अपने सभी दुश्मनों को हराएगी। उन्होंने ट्रम्प से कहा कि ईरान के मामलों में दखल देने के बजाए वे अपने देश की समस्याओं पर ध्यान दें।

उन्होंने आगे कहा,“इस्लामिक रिपब्लिक सैकड़ों हजारों महान लोगों के खून के बल पर सत्ता में आई है। जो लोग हमें नष्ट करना चाहते हैं, उनके सामने इस्लामिक रिपब्लिक कभी पीछे नहीं हटेगी।”

खामेनेई का यह बयान उस घटना के कुछ ही समय बाद आया है, जब गुरुवार को ट्रम्प ने दोबारा चेतावनी दी थी कि अगर ईरानी सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों की हत्या करते हैं, तो अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है।

प्रदर्शन की 7 तस्वीरें…

बढ़ती मंहगाई के खिलाफ हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी ईरान की सड़कों पर उतर आए।
बढ़ती मंहगाई के खिलाफ हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी ईरान की सड़कों पर उतर आए।
ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद में प्रदर्शनकारियों ने देश का राष्ट्रीय ध्वज फाड़ दिया।
ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद में प्रदर्शनकारियों ने देश का राष्ट्रीय ध्वज फाड़ दिया।
प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने मार्च निकाला, जिससे सड़कों पर जाम की स्थिति बन गई।
प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने मार्च निकाला, जिससे सड़कों पर जाम की स्थिति बन गई।
विरोध प्रदर्शनों के दौरान तेहरान और ईरान के कई अन्य हिस्सों में डिजिटल ब्लैकआउट हुआ और इंटरनेट कनेक्टिविटी ठप हो गई।
विरोध प्रदर्शनों के दौरान तेहरान और ईरान के कई अन्य हिस्सों में डिजिटल ब्लैकआउट हुआ और इंटरनेट कनेक्टिविटी ठप हो गई।
ईरान में विरोध प्रदर्शनों के बीच एक बुजुर्ग महिला का वीडियो वायरल हो रहा है। वह ईरान की शासन को चुनौती देती नजर आती है। वे कहती हैं मुझे सरकार से डर नहीं लगता, मैं 47 साल से मरी हुई हूं। महिला के मुंह से खून निकलता दिख रहा है।
ईरान में विरोध प्रदर्शनों के बीच एक बुजुर्ग महिला का वीडियो वायरल हो रहा है। वह ईरान की शासन को चुनौती देती नजर आती है। वे कहती हैं मुझे सरकार से डर नहीं लगता, मैं 47 साल से मरी हुई हूं। महिला के मुंह से खून निकलता दिख रहा है।
प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने मार्च निकाला, जिससे सड़कों पर जाम की स्थिति बन गई।
प्रदर्शन के दौरान युवाओं ने मार्च निकाला, जिससे सड़कों पर जाम की स्थिति बन गई।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान पत्थरबाजी की गई।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान पत्थरबाजी की गई।

तेहरान एयरपोर्ट, इंटरनेट-फोन सर्विस बंद प्रदर्शनकारियों ने सड़कें ब्लॉक कीं, आग लगाई। लोगों “खामेनेई को मौत” और “इस्लामिक रिपब्लिक का अंत हुआ” जैसे नारे लगाए। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारी क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के समर्थन में रहे। उन्होंने ‘यह आखिरी लड़ाई है, शाह पहलवी लौटेंगे’ के नारे लगाए।

देशभर में इंटरनेट और फोन सेवाएं फिलहाल बंद कर दी गई हैं। तेहरान एयरपोर्ट को भी बंद कर दिया गया है और सेना को अलर्ट पर रखा गया है।

निर्वासित प्रिंस रजा पहलवी ने लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की थी

तेहरान में बाजार बंद रहे, छात्रों ने यूनिवर्सिटी कैंपस पर कब्जा किया। इसके तुरंत बाद सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट और फोन लाइनें काट दीं। इसे इंटरनेट वॉचडॉग नेटब्लॉक्स ने हिंसक दमन की तैयारी बताया। फिर भी कुछ लोग स्टारलिंक से वीडियो पोस्ट कर रहे हैं। स्टारलिंक, इलॉन मस्क की इंटरनेट सर्विस है, जो सैटेलाइट से ऑपरेट होती है।

प्रदर्शन और तेज हो गए जब निर्वासित प्रिंस रजा पहलवी ने गुरुवार को लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की। रजा पहलवी ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे हैं। उनके पिता 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान सत्ता से हटाए गए थे। युवराज पहलवी अभी अमेरिका में रह रहे हैं।

पहलवी ने लिखा, ‘मैं राष्ट्रपति ट्रम्प की तारीफ करता हूं। आजाद दुनिया के नेता के तौर पर, उन्होंने एक बार फिर सरकार को जवाबदेह ठहराने की जरूरत पर जोर दिया है। अब समय आ गया है कि दूसरे लोग उनके नक्शे कदम पर चलें, अपनी चुप्पी तोड़ें, और मजबूती से ईरानी लोगों के समर्थन में कार्रवाई करें।’

चीफ जस्टिस बोले- कड़े कदम उठाएंगे

ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच देश के न्यायपालिका प्रमुख घोलामहोसैन मोहसेनी-एजेई ने कड़े कदम उठाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि प्रदर्शनकारियों को बिना किसी कानूनी रियायत के ज्यादा से ज्यादा से सजा दी जाएगी।

घोलामहोसैन ने कहा कि हालिया प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी। उन्होंने साफ किया कि कानून के तहत सबसे कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान कुछ लोगों ने पत्थरबाजी भी की।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान कुछ लोगों ने पत्थरबाजी भी की।

ईरान में महंगाई से आम लोगों में नाराजगी बढ़ी

देशभर में GenZ आक्रोश में है। इसका कारण आर्थिक बदहाली रहा है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर करीब 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है।

साल की शुरुआत से रियाल की कीमत लगभग आधी हो चुकी है। यहां महंगाई चरम पर पहुंच गई है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% और दवाओं की कीमतों में 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

इसके अलावा सरकार द्वारा 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव ने आम लोगों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।

क्राउन प्रिंस को सत्ता सौंपने की मांग

ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी सत्ता में आए। वे 1979 से 1989 तक 10 साल सुप्रीम लीडर रहे। उनके बाद सुप्रीम लीडर बने अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से अब तक 37 साल से सत्ता में हैं।

ईरान आज आर्थिक संकट, भारी महंगाई, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, बेरोजगारी, मुद्रा गिरावट और लगातार जन आंदोलनों जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। 47 साल बाद अब मौजूदा आर्थिक बदहाली और सख्त धार्मिक शासन से नाराज लोग अब बदलाव चाहते हैं।

इसी कारण 65 वर्षीय क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को सत्ता सौंपने की मांग उठ रही है। प्रदर्शनकारी उन्हें एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प मानते हैं। युवाओं और जेन जी को लगता है कि पहलवी की वापसी से ईरान को आर्थिक स्थिरता, वैश्विक स्वीकार्यता और व्यक्तिगत आजादी मिल सकती है।

तेहरान में 26 बैंक, 2 अस्पताल और 25 मस्जिदें निशाने पर

तेहरान के मेयर अलीरेजा जकानी ने बताया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई अहम संस्थानों को नुकसान पहुंचाया गया है। प्रदर्शनकारियों ने आर्थिक ढांचे को निशाना बनाते हुए 26 बैंकों पर हमला किया। इसके अलावा शहर के दो अस्पतालों और 25 मस्जिदों को भी नुकसान पहुंचाया गया है।

मेयर ने कहा कि हिंसा के दौरान पुलिस से जुड़ी सुविधाओं पर भी हमले किए गए। इसके साथ ही दमकल विभाग की 48 फायर ब्रिगेड गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया गया है, जिससे आपात सेवाओं पर असर पड़ा है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.