भारत सहित दुनियाभर में 2026 का आगाज:जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी के बीच जश्न; चीन-जापान और सिंगापुर में आतिशबाजी, ऑस्ट्रेलिया में नदी किनारे लाखों लोग जुटे
भारत सहित दुनियाभर में साल 2026 का आगाज हो चुका है। दिल्ली में देर रात सैकड़ों की संख्या में लोग इंडिया गेट पर इकट्ठा हुए और काउंटडाउन के साथ 12 बजते ही नए साल का जश्न मनाया। जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी के बीच लोगों ने 2026 का स्वागत किया।
न्यूजीलैंड 2026 में सबसे पहले एंट्री करने वाले चुनिंदा देशों में शामिल रहा। यहां ऑकलैंड स्थित 240 मीटर ऊंचे स्काई टावर में 12 बजते ही करीब 3,500 पटाखे छोड़े गए। स्काई टावर न्यूजीलैंड की सबसे ऊंची बिल्डिंग है। दुनिया के सबसे पूर्वी हिस्से में स्थित होने के कारण, न्यूजीलैंड में सबसे पहले नया साल शुरू होता है।
जापान, चीन और सिंगापुर में आतिशबाजी के साथ न्यू ईयर सेलिब्रेट किया गया। साउथ कोरिया में एक बड़ी घंटी बजाकर नए साल के आगाज का ऐलान किया गया। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी हार्बर में पारंपरिक आतिशबाजी देखने के लिए हजारों लोग पहुंचे।
वहीं, मेलबर्न के आसमान में 7 मिनट तक हुई आतिशबाजी ने शहर को रोशनी से भर दिया। दुनियाभर में अलग-अलग टाइम जोन के कारण 29 देश ऐसे हैं जो भारत से पहले नए साल का स्वागत करते हैं। इनमें किरिबाती, समोआ और टोंगा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पापुआ न्यू गिनी, म्यांमार, जापान इंडोनेशिया, बांग्लादेश, नेपाल आदि देश हैं।
दुनियाभर में नए साल के जश्न की तस्वीरें…


ऑस्ट्रेलिया के सिडनी हार्बर में पारंपरिक आतिशबाजी देखने के लिए हजारों लोग पहुंचे। वहीं, मेलबर्न के आसमान में 7 मिनट तक हुई आतिशबाजी ने शहर को रोशनी से भर दिया।

इससे पहले न्यूजीलैंड का ऑकलैंड दुनिया का पहला प्रमुख शहर बना, जहां साल 2025 ने दस्तक दी। दुनिया के सबसे पूर्वी हिस्से में स्थित होने के कारण, न्यूजीलैंड में सबसे पहले नए साल का जश्न मनाया जाता है। यहां देश के सबसे लंबे स्काई टावर पर हजारों लोगों ने जमकर जश्न मनाया और आतिशबाजी की।
दुनियाभर में अलग-अलग टाइम जोन के कारण 29 देश ऐसे हैं जो भारत से पहले नए साल का स्वागत करते हैं। इनमें किरिबाती, समोआ और टोंगा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पापुआ न्यू गिनी, म्यांमार, जापान इंडोनेशिया, बांग्लादेश, नेपाल आदि देश हैं।
नए साल के जश्न की 8 तस्वीरें…








स्टोरी में जानिए टाइम जोन नए साल की एंट्री कैसे तय करते हैं और न्यू ईयर से जुड़े 5 अजीबोगरीब रिवाज…
सबसे पहले जानिए कि यह टाइम जोन क्या है
टाइम जोन धरती को समय के हिसाब से बांटने का एक तरीका है। धरती हर 24 घंटे में 360 डिग्री घूमती है। यानी हर घंटे में 15 डिग्री, जिसे एक टाइम जोन की दूरी माना गया।
इससे पूरी दुनिया में 24 समान दूरी वाले टाइम बने। हर टाइम जोन 15 डिग्री देशांतर का होता है और एक-दूसरे से करीब एक घंटे का फर्क रखता है। इसी वजह से कहीं सुबह होती है तो कहीं रात, और कहीं नया साल पहले आता है तो कहीं बाद में। टाइम जोन ही तय करते हैं कि किस देश में तारीख कब बदलेगी।
टाइम जोन की जरूरत क्यों पड़ी?
घड़ी का आविष्कार 16वीं सदी में हुआ, लेकिन 18वीं सदी तक नया साल सूरज की पोजिशन के मुताबिक सेट किया जाता था। जब सूरज सिर पर होता था, तब समय 12 बजे माना जाता।
शुरुआत में अलग-अलग देशों के अलग-अलग समय से कोई परेशानी नहीं थी, लेकिन बाद में रेल से लोग कुछ ही घंटे में एक देश से दूसरे देश पहुंचने लगे।
देशों के अलग-अलग टाइम से लोगों को ट्रेन के समय का हिसाब रखने में दिक्कतें आईं। इसे उदाहरण से समझिए- मान लीजिए 1840 के दशक में ब्रिटेन में अगर कोई व्यक्ति सुबह 8 बजे लंदन से निकला और पश्चिम में लगभग 190 किमी दूर ब्रिस्टल गया। उसकी यात्रा लगभग 5 घंटे की होती।
लंदन के समय के मुताबिक वह 1 बजे ब्रिस्टल पहुंचता, लेकिन ब्रिस्टल का लोकल टाइम लंदन से 10 मिनट पीछे था, इसलिए ब्रिस्टल की घड़ी में 12:50 ही बजते।
नया साल टाइम जोन के मुताबिक रात 12 बजे आता है। सबसे पहले वो देश नया साल मनाता है जो सबसे पूर्व में है (जैसे किरिबाती और न्यूजीलैंड)। इसके बाद धीरे-धीरे बाकी टाइम जोन में नया साल आता है।
न्यूजीलैंड में भारत से साढ़े 7 घंटे पहले और अमेरिका में भारत से साढ़े 9 घंटे बाद नया साल शुरू होता है। पूरी दुनिया में नया साल आने की प्रक्रिया करीब 26 घंटे तक चलती रहती है।