रूसी तेल खरीदी पर ट्रम्प का दावा खारिज:US प्रेसिडेंट ने कहा था- मोदी ने भरोसा दिया; विदेश मंत्रालय बोला- दोनों में बातचीत नहीं हुई
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता ने रणधीर जायसवाल गुरुवार को कहा कि बुधवार को पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प की कोई बातचीत नहीं हुई थी।
दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया था कि बुधवार को पीएम मोदी ने उनसे कहा है कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। भारत के रूस से तेल खरीदने से मुझे खुशी नहीं थी। अब हमें चीन से भी यही करवाना होगा।
ट्रम्प ने अगस्त 2025 में भारत पर रूस से तेल खरीदने की वजह से 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया है। इस तरह अमेरिका अब तक भारत पर कुल टैरिफ 50% लगा चुका है।
ट्रम्प बोले- मोदी मुझसे प्यार करते हैं
ट्रम्प ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए यह भी कहा कि, हाल में भारत में अमेरिकी राजदूत बनने जा रहे सर्जियो गोर और पीएम मोदी की मुलाकात हुई थी इस मीटिंग के बाद सर्जियो ने मुझे बताया कि, वे (मोदी) ट्रम्प से प्यार करते हैं, हालांकि मैं चाहूंगा कि यहां प्यार शब्द का गलत मतलब न निकालें, मैं किसी का पॉलिटिकल करियर खराब नहीं करना चाहता।
मैंने सालों से भारत को देखा है, वहां हर साल सरकार बदल जाती है। मेरे दोस्त (मोदी) लंबे समय से वहां पर हैं। उन्होंने भरोसा दिया कि भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा। हालांकि वे इसे तुरंत रोक नहीं सकते, लेकिन इसका एक प्रोसेस है जिसे जल्द पूरा किया जाएगा।
MEA का जवाब – जनता के हित में फैसले लेते
ट्रम्प के दावे पर भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘भारत तेल और गैस का बड़ा खरीदार है। जनता के हितों की रक्षा करना हमारी प्राथमिकता रही है। हमारी आयात नीतियां इसी मकसद को पूरी करती हैं। ऊर्जा नीति के दो लक्ष्य हैं, पहला स्थिर कीमतें तय करना और दूसरा सुरक्षित आपूर्ति बनाए रखना।’
जायसवाल ने आगे कहा, ‘इसके लिए हम ऊर्जा स्रोतों को व्यापक बनाते हैं और बाजार स्थितियों के अनुसार विविधता लाते हैं। जहां तक अमेरिका का सवाल है, हम कई सालों से अपनी ऊर्जा खरीद का विस्तार करने का प्रयास कर रहे हैं। पिछले दशक में इसमें लगातार प्रगति हुई है।’
उन्होंने बताया कि अमेरिकी प्रशासन ने भारत के साथ ऊर्जा सहयोग को बढ़ाने में रुचि दिखाई है। इस पर चर्चाएं जारी हैं।
राहुल गांधी बोले – प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति से डर गए
ट्रम्प के इस दावे के बाद भारत में विपक्षी नेता राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर पीएम पर 5 आरोप लगाए हैं। उन्होंने X पर लिखा-
पीएम मोदी डर गए हैं
- ट्रम्प को फैसला और ऐलान करने देते हैं कि भारत रूसी तेल नहीं खरीदेगा
- बार-बार अनदेखी होने के बाद भी ट्रम्प को बधाई संदेश भेजते रहते हैं।
- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अमेरिका यात्रा रद्द कर दी।
- खुद मिस्र के शर्म अल-शेख समिट में शामिल नहीं हुए।
- ऑपरेशन सिंदूर पर ट्रम्प के बयानों का विरोध भी नहीं करते हैं।
रूस बोला- तेल आपूर्ति भारत के लिए फायदेमंद
भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने ट्रम्प के भारत को लेकर किए गए दावे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “भारत को रूसी तेल की आपूर्ति के मामले में निरंतर सहयोग चल रहा है। मुझे लगता है कि हम भारत के साथ इस क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा जारी रखेंगे।”
उन्होंने कहा, “जहां तक भारत और अमेरिका के संबंधों का सवाल है, हम उनमें हस्तक्षेप नहीं करते हैं। यह भारत और अमेरिका के बीच का मामला है। भारत का हमारे साथ द्विपक्षीय संबंध है।”
डेनिस अलीपोव ने यह भी कहा कि रूस की तेल आपूर्ति भारतीय अर्थव्यवस्था और भारतीय लोगों के बहुत फायदेमंद है
#WATCH | Delhi: On being asked if India will continue importing Russian oil, Russian Ambassador to India, Denis Alipov, says, "This is the question for the Indian govt. The Indian Government is having in mind the national interest of this country in the first place, and our… pic.twitter.com/73Kx2uDOIl
— ANI (@ANI) October 16, 2025
भारत पर प्रतिबंध का मकसद रूस पर दबाव बनाना
अमेरिका ने रूस पर दबाव बनाने के लिए भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। ट्रम्प कई बार यह दावा कर चुके हैं कि, भारत के तेल खरीद से मिलने वाले पैसे से रूस, यूक्रेन में जंग को बढ़ावा देता है।
ट्रम्प प्रशासन रूस से तेल लेने पर भारत के खिलाफ की गई आर्थिक कार्रवाई को पैनल्टी या टैरिफ बताता रहा है।
ट्रम्प भारत पर अब तक कुल 50 टैरिफ लगा चुके हैं। इसमें 25% रेसीप्रोकल यानी जैसे को तैसा टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर 25% पैनल्टी है।
रेसीप्रोकल टैरिफ 7 अगस्त से और पेनल्टी 27 अगस्त से लागू हुआ। व्हाइट हाउस प्रेस सचिव केरोलिना लेविट के मुताबिक इसका मकसद रूस पर सेकेंडरी प्रेशर डालना है, ताकि वह युद्ध खत्म करने पर मजबूर हो सके।
सितंबर में भारत ने 34% तेल रूस से खरीदा
ट्रम्प के दावे के बावजूद, रूस भारत का सबसे बड़ा तेल स्रोत बना हुआ है। कमोडिटी और शिपिंग ट्रैकर क्लेप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में ही नई दिल्ली ने आने वाले शिपमेंट का 34 फीसदी हिस्सा लिया। हालांकि, 2025 के पहले आठ महीनों में आयात में 10 फीसदी की गिरावट आई थी।
एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने 2025 के अगस्त महीने में रूस से औसतन 1.72 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) कच्चा तेल आयात किया। वहीं, सितंबर में यह आंकड़ा थोड़ा घटकर 1.61 मिलियन bpd रह गया।)
एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह कटौती अमेरिकी दबाव और सप्लाई में डाइवरसीफिकेशन लाने के लिए की गई है। इसके विपरीत रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी जैसी निजी रिफाइनरी कंपनियों ने इसकी खरीद बढ़ा दी है।
सरकारी रिफाइनरियों ने रूसी आयात में कमी की
सरकारी कंपनियां (जैसे IOC, BPCL, HPCL) ने रूसी तेल आयात 45% से ज्यादा घटाया। जून में 1.1 मिलियन bpd से सितंबर में घटकर 600,000 bpd रह गया।
वहीं, प्राइवेट रिफाइनरीयां (रिलायंस इंडस्ट्रीज: 850,000 bpd, नयारा एनर्जी: ~400,000 bpd) ने इसे संतुलित किया, जिससे कुल आपूर्ति पर असर नहीं पड़ा।
रूस से सस्ता तेल खरीदने की शुरुआत कैसे हुई?
फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूरोप ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद रूस ने अपने तेल को एशिया की ओर मोड़ा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ने 2021 में रूसी तेल का सिर्फ 0.2% आयात किया था।
2025 में यह भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया। औसतन 1.67 मिलियन बैरल प्रति दिन की आपूर्ति कर रहा है। यह भारत के कुल जरूरत का करीब 37% है।
भारत रूस से तेल खरीदना क्यों नहीं बंद करता? भारत को रूस से तेल खरीदने के कई डायरेक्ट फायदे हैं…
- अन्य देशों से सस्ता तेल: रूस अभी भी भारत को दूसरे देशों की तुलना में सस्ता तेल दे रहा है। हालांकि, जो डिस्काउंट पहले 30 डॉलर प्रति बैरल तक था वह अब 3-6 डॉलर प्रति बैरल तक रह गया है।
- लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स: भारत की प्राइवेट कंपनियों के रूस के साथ लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स हैं। उदाहरण के लिए, दिसंबर 2024 में रिलायंस ने रूस के साथ 10 साल के लिए हर रोज 5 लाख बैरल तेल खरीदी का कॉन्ट्रैक्ट किया। इस तरह के समझौतों को रातोंरात तोड़ना संभव नहीं है।
- वैश्विक कीमतों पर प्रभाव: भारत का रूसी तेल आयात वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने में मदद करता है। यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देता है, तो ग्लोबल सप्लाई कम हो सकती है, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं। यूक्रेन के साथ युद्ध के बाद मार्च 2022 में तेल की कीमतें 137 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।
भारत के पास रूस के अलावा किन देशों से तेल खरीदने के विकल्प हैं? भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% से ज्यादा इम्पोर्ट करता है। ज्यादातर तेल रूस के अलावा इराक, सऊदी अरब और अमेरिका जैसे देशों से खरीदता है। अगर रूस से तेल इम्पोर्ट बंद करना है तो उसे इन देशों से अपना इम्पोर्ट बढ़ाना होगा…
- इराक: रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर है, जो हमारे इम्पोर्ट का लगभग 21% प्रोवाइड करता है।
- सऊदी अरब: तीसरा बड़ा सप्लायर, जो हमारी जरूरतों का 15% तेल (करीब 7 लाख बैरल प्रतिदिन) सप्लाई करता है।
- अमेरिका: जनवरी-जून 2025 में भारत ने अमेरिका से रोजाना 2.71 लाख बैरल तेल इम्पोर्ट किया, जो पिछले से दोगुना है। जुलाई 2025 में अमेरिका की हिस्सेदारी भारत के तेल आयात में 7% तक पहुंच गई।
- साउथ अफ्रीकन देश: नाइजीरिया और दूसरे साउथ अफ्रीकन देश भी भारत को तेल सप्लाई करते हैं और सरकारी रिफाइनरीज इन देशों की ओर रुख कर रही हैं।
- अन्य देश: अबू धाबी (UAE) से मुरबान क्रूड भारत के लिए एक बड़ा ऑप्शन है। इसके अलावा, भारत ने गयाना ब्राजील, और अन्य लैटिन अमेरिकी देशों से भी तेल आयात शुरू किया है। हालांकि, इनसे तेल खरीदना आमतौर पर रूसी तेल की तुलना में महंगा है।