ईरान में खामेनेई के खिलाफ प्रदर्शन, मुर्दाबाद के नारे लगे:हिंसा में 7 मौतें; ट्रम्प बोले- प्रदर्शनकारियों की हत्या हुई तो फिर हमला करेंगे
ईरान में महंगाई और सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन लगातार छठे दिन भी जारी है। इनमें अब तक 6 आम लोगों और 1 सिक्योरिटी फोर्स की मौत हो चुकी है।
मारे गए प्रदर्शनकारियों के अंतिम संस्कार में लोगों ने ‘डेथ टू खामेनेई’ यानी खामेनई मुर्दाबाद के नारे लगाए।
प्रदर्शन ईरान के पवित्र शहर कोम तक फैल गए हैं। कोम शिया धर्मगुरुओं का एक प्रमुख गढ़ है। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने राजशाही के समर्थन में नारे लगाए।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई। इसमें 1 जनवरी को 5 लोगों की मौत हुई। इससे पहले 31 दिसंबर को भी एक शख्स की प्रदर्शन के दौरान गोलीबारी में मौत हो गई थी।
ईरान में प्रदर्शन की शुरुआत 28 दिसंबर को हुई थी। तब राजधानी तेहरान में व्यापारियों ने इसकी शुरुआत की थी। अब इसमें हजारों GenZ भी शामिल हो चुके हैं।
प्रदर्शन की तस्वीरें…




ट्रम्प बोले- प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए तैयार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को ईरान को चेतावनी दी। ट्रम्प ने कहा कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या की गई तो अमेरिका कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
ट्रुथ सोशल पर ट्रम्प ने लिखा, “अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाता है या उन्हें बेरहमी से मारता है, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा। हम पूरी तरह से तैयार हैं।”
इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी की तरफ से किसी भी हमले की स्थिति में उसके बेस को निशाना बनाने की धमकी दी है। ईरान की संसद के अध्यक्ष ने शुक्रवार को कहा है कि अगर अमेरिका आक्रामक कदम उठाता है तो उसके सैन्य ठिकानों को वैध निशाना माना जाएगा।
इससे पहले अमेरिका, ईरान के सैन्य ठिकानों और परमाणु सुविधाओं पर हमलें कर चुका है। जून 2025 में ईरान-इजराइल के बीच 12 दिनों तक युद्ध हुआ था, जिसमें अमेरिका भी शामिल हो गया था।
ईरान में महंगाई से आम लोगों में नाराजगी बढ़ी
देशभर में GenZ आक्रोश में है। इसका कारण आर्थिक बदहाली रहा है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर करीब 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है।
साल की शुरुआत से रियाल की कीमत लगभग आधी हो चुकी है। यहां महंगाई चरम पर पहुंच गई है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% और दवाओं की कीमतों में 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इसके अलावा सरकार द्वारा 2026 के बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव ने आम लोगों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।
राष्ट्रपति बोले- विदेशी ताकतें देश में फूट डाल रही
तेहरान में यूनिवर्सिटी और व्यावसायिक क्षेत्रों में शुरू हुए ये प्रदर्शन अब कई शहरों में फैल चुके हैं। कई जगहों पर बाजार बंद रहे और व्यापारी सड़कों पर उतर आए हैं।
प्रदर्शनकारी कट्टरपंथी मौलानाओं के शासन के खात्मे और राजशाही वापस लाने की मांग कर रहे हैं। इन नारों में सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई पर निशाना साधा जा रहा था।
कुछ वीडियो में लोग निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाते और उन्हें सत्ता सौंपने की मांग करते नजर आए।
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने हालात संभालने के लिए मोर्चा संभाला है। उन्होंने इन प्रदर्शनों के लिए विदेशी हस्तक्षेप को जिम्मेदार ठहराया और देशवासियों से एकजुट रहने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि विदेशी ताकतें देश में फूट डालकर अपना फायदा निकालना चाहती हैं।
इस्लामिक क्रांति के बाद खुमैनी ने ईरान में मौलाना शासन की नींव रखी
ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी सत्ता में आए। वे 1979 से 1989 तक 10 साल सुप्रीम लीडर रहे।
उनके बाद सुप्रीम लीडर बने अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से अब तक 37 साल से सत्ता में हैं।
ईरान आज आर्थिक संकट, भारी महंगाई, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, बेरोजगारी, मुद्रा गिरावट और लगातार जन आंदोलनों जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है।


क्राउन प्रिंस को सत्ता सौंपने की मांग
47 साल बाद अब मौजूदा आर्थिक बदहाली और सख्त धार्मिक शासन से नाराज लोग अब बदलाव चाहते हैं।
इसी कारण 65 वर्षीय क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी को सत्ता सौंपने की मांग उठ रही है। प्रदर्शनकारी उन्हें एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प मानते हैं।
युवाओं और जेन जी को लगता है कि पहलवी की वापसी से ईरान को आर्थिक स्थिरता, वैश्विक स्वीकार्यता और व्यक्तिगत आजादी मिल सकती है।
तीन साल में सबसे बड़ा प्रदर्शन
ये प्रदर्शन 2022 के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं। उस समय 22 साल की महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद पूरे देश में आंदोलन भड़क गया था। उन्हें हिजाब ठीक से न पहनने के आरोप में मोरैलिटी पुलिस ने पकड़ा था।
इससे पहले सोमवार को तेहरान के कुछ इलाकों में हालात काबू से बाहर होने पर पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों को हटाया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।
ईरान की इकोनॉमी तेल निर्यात पर निर्भर
साल 2024 में ईरान का कुल निर्यात लगभग 22.18 बिलियन डॉलर था, जिसमें तेल और पैट्रोकैमिकल्स का बड़ा हिस्सा था, जबकि आयात 34.65 बिलियन डॉलर रहा, जिससे व्यापार घाटा 12.47 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
2025 में तेल निर्यात में कमी और प्रतिबंध के कारण यह घाटा और बढ़कर 15 बिलियन डॉलर तक बढ़ा है। मुख्य व्यापारिक साझेदारों में चीन (35% निर्यात), तुर्की, यूएई और इराक शामिल हैं। ईरान चीन को 90% तेल निर्यात करता है।
ईरान ने पड़ोसी देशों और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के साथ व्यापार बढ़ाने की कोशिश की है, जैसे कि INSTC कॉरिडोर और चीन के साथ नए ट्रांजिट रूट्स। फिर भी, 2025 में जीडीपी वृद्धि केवल 0.3% रहने का अनुमान है। प्रतिबंध हटने या परमाणु समझौते की बहाली के बिना व्यापार और रियाल का मूल्य स्थिर करना मुश्किल रहेगा।