ट्रम्प ने PM मोदी को फोन किया, 40 मिनट बातचीत:ईरान जंग पर चर्चा, दोनों ने कहा- होर्मुज स्ट्रेट का खुला रहना बहुत जरूरी

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PM मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच करीब 40 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने ईरान जंग पर चर्चा की और इस बात पर जोर दिया कि होर्मुज खुला रहना चाहिए। PM मोदी सोशल मीडिया पर लिखा-

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मुझे मेरे दोस्त राष्ट्रपति ट्रम्प का फोन आया। हमने दोनों देशों के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में हुए काम और प्रगति पर बात की। हमने यह भी कहा कि आगे चलकर भारत और अमेरिका के रिश्ते को और मजबूत करेंगे।

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अमेरिका-ईरान सीजफायर के बाद दोनों नेताओं के बीच पहली बातचीत थी। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि फोन कॉल के दौरान पीएम मोदी ने ट्रम्प से कहा, “भारत के लोग आपको पसंद करते हैं।” इस पर ट्रम्प ने कहा कि हम सभी आपसे प्यार करते हैं।

अमेरिकी राजदूत बोले- भारत-US में जल्द बड़ा समझौता

सर्जियो गोर ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच होर्मुज की घेराबंदी के मुद्दे पर चर्चा हुई। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले कुछ दिनों और हफ्तों में भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा से जुड़े बड़े समझौते होने की उम्मीद है।

गोर ने कहा है कि भारत और अमेरिका के रिश्ते मजबूत हैं। दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है और कई अहम मुद्दों पर साथ मिलकर काम किया जा रहा है।

PM मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच 15 फरवरी 2025 को व्हाइट हाउस में मुलाकात हुई थी।
PM मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच 15 फरवरी 2025 को व्हाइट हाउस में मुलाकात हुई थी।

ट्रम्प-मोदी के बीच 20 दिन में दूसरी बातचीत

इससे पहले पीएम मोदी और ट्रम्प के बीच 24 मार्च को फोन पर बात हुई थी। उस बातचीत में दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट के हालात पर बात की थी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत चाहता है कि तनाव कम हो और जल्द से जल्द शांति बहाल हो।

उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित रखने की अहमियत भी बताई थी, क्योंकि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

इस बातचीत को लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स ने अज्ञात अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा था कि एलन मस्क दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में शामिल हुए थे।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया, “मंगलवार को एलन मस्क ने भारत के राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमंत्री मोदी के साथ फोन पर बातचीत में भाग लिया, जो युद्धकालीन संकट के दौरान दो राष्ट्राध्यक्षों के बीच हुई बातचीत में एक निजी नागरिक की असामान्य उपस्थिति थी।”

हालांकि भारत सरकार ने इन सारे दावों का खंडन कर दिया था, और सभी रिपोर्ट को गलत बताया।

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