बांग्लादेश में बाहर निकलने से डर रहे हिंदू ‘हिंदू युवक की इतनी बेरहमी से हत्या नॉर्मल बात नहीं’ उसे जिस तरह मारा गया, ये सामान्य घटना नहीं
एक पेड़ पर डेडबॉडी लटकी है। शरीर पर कोई कपड़ा नहीं है। आसपास शोर मचाती भीड़ है। कुछ लोग डेडबॉडी पर डंडे मार रहे हैं। ज्यादातर नौजवान हैं। कुछ लोग मोबाइल से वीडियो बना रहे हैं। तभी दो शख्स जलती घास उठाते हैं और पेट्रोल से भीगी डेडबॉडी में आग लगा देते हैं। माइक पर बांग्ला में अनाउंसमेंट होता है। भीड़ धार्मिक नारे लगाने लगती है।
ये घटना बांग्लादेश के मैमनसिंह शहर के भालुका एरिया की है। मरने वाला हिंदू युवक दीपु चंद्र दास है। 25 साल के दीपु पर ईशनिंदा का आरोप था। वे कपड़े की फैक्ट्री में काम करते थे। पुलिस के मुताबिक, 18 दिसंबर की रात भीड़ ने फैक्ट्री के बाहर उन्हें पीट-पीटकर मार डाला। इस घटना ने बांग्लादेश के हिंदुओं को डरा दिया है। वे घर से बाहर निकलने से बच रहे हैं।
दीपु चंद्र की हत्या जिस वक्त हुई, उसी दौरान बांग्लादेश में हिंसा भड़की है। इंकिलाब मंच के लीडर 32 साल के शरीफ उस्मान बिन हादी की मौत के बाद से राजधानी ढाका समेत 4 शहरों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं हुई हैं। हादी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और भारत विरोधी माने जाते थे। 12 दिसंबर को उन्हें चुनाव प्रचार के दौरान गोली मार दी गई थी।

‘भीड़ अखबारों के ऑफिस जलाती रही, पुलिस ने रोका नहीं’ शरीफ उस्मान बिन हादी की मौत के बाद शुरू हुए प्रदर्शन के बाद भीड़ ने बांग्लादेश के दो बड़े अखबारों द डेली स्टार और प्रोथोम आलो के ऑफिस में आग लगा दी। हालांकि, इंकिलाब मंच ने लोगों से हिंसा से बचने की अपील की थी।
फेसबुक पर किए पोस्ट में संगठन ने कहा, ‘कुछ गुट बांग्लादेश को नाकाम देश बनाना चाहते हैं। बांग्लादेश में फरवरी में चुनाव हैं। सोचिए कि देश में अशांति फैलाई जाती है, तो इसका फायदा किसे होगा।’
उधर, आरोप है कि हादी के समर्थक इलियास हुसैन ने फेसबुक पोस्ट के जरिए लोगों से राजबाग एरिया में इकट्ठा होने के लिए कहा था। बांग्ला अखबार प्रथोमो आलो और अंग्रेजी अखबार द डेली स्टार के दफ्तर इसी जगह हैं।
सोर्स बताते हैं कि भीड़ में शामिल लोग पेट्रोल लेकर आए थे। शुरुआत में करीब 25 लोग ही थे। पुलिस ने उन्हें नहीं रोका। इसके बाद भीड़ ने अखबार के ऑफिस में घुसकर आग लगा दी।

एग्जीक्यूटिव एडिटर बोले- 27 साल में पहली बार अखबार नहीं छपा प्रथोमो आलो के एग्जीक्यूटिव एडिटर सज्जाद शरीफ दैनिक भास्कर को बताते हैं, ‘हम शाम को अखबार छापने की तैयारी कर रहे थे। तभी उस्मान हादी की मौत की खबर आई। कुछ लोगों ने अखबार के दफ्तर के बाहर भीड़ इकट्ठी की और आगजनी शुरू कर दी।’
अखबार ने पब्लिकेशन रुकने के लिए अपनी वेबसाइट के जरिए पाठकों से माफी मांगी है। हमने सज्जाद शरीफ से पूछा कि प्रथोमो आलो को ही क्यों टारगेट किया गया? वे कहते हैं, ‘हमें भी इसका जवाब चाहिए। हमारा अखबार लोकतांत्रिक और सेक्युलर मूल्यों पर काम करता रहा है और आगे भी करेगा।’
अखबार में काम करने वाले पत्रकार बताते हैं, ‘बांग्लादेश में कट्टरपंथी माहौल बन रहे हैं। हमें बहुत पहले से डर था कि एक दिन ऐसा हो सकता है। युवा नेता इस्लाम के नाम पर लोगों को भड़का रहे थे। लोकतांत्रिक सोच के खिलाफ हिंसक माहौल के लिए बैकग्राउंड तैयार कर रहे थे।’
ऑफिस में नीचे आग, छत पर भागकर बचे पत्रकार अंग्रेजी न्यूज पेपर द डेली स्टार के ऑफिस में तोड़फोड़ के दौरान कुछ पत्रकार छत पर फंस गए थे। एक पत्रकार बताते हैं, ‘मेरे पास फोन आया कि प्रोथोम आलो के ऑफिस पर हमला हुआ है। गुस्साई भीड़ हमारे ऑफिस की ओर बढ़ रही है। इसके बाद स्टाफ बिल्डिंग खाली करने लगा। तब तक भीड़ ग्राउंड फ्लोर तक आ चुकी थी। वहां तोड़फोड़ के बाद बिल्डिंग में आग लगा दी। धुएं के बीच पत्रकारों ने नीचे जाने की कोशिश छोड़ दी और 10वीं मंजिल की छत पर भागकर जान बचाई।’
बाद में फायर सर्विस की टीमें आईं और देर रात 1.40 बजे निचले फ्लोर में लगी आग बुझाई। तब बिल्डिंग में 28 लोग मौजूद थे। चार फायरमैन छत पर चढ़े और फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।

उस्मान हादी अगस्त 2024 में शेख हसीना के विरोध में हुए छात्र आंदोलन के लीडर थे। वे अपनी तकरीरों में प्रोथोम आलो और द डेली स्टार अखबार की आलोचना करते थे। उन्हें हिंदुओं का पक्षधर बताते थे और इन अखबारों के सेक्युलर होने पर आलोचना करते थे।
उन्होंने अंतरिम सरकार में शामिल छात्रों और अंतरिम प्रधानमंत्री डॉ. यूनुस से अलग रास्ता चुना और इंकलाब मंच नाम से संगठन बनाया। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन करने वाले छात्रों की नेशनल सिटिजन पार्टी से इतर उस्मान हादी का रुख ज्यादा कट्टर था।
सड़कों पर भीड़, भारत के उच्चायोग पर हमले की कोशिश बांग्लादेश में हमारे सहयोगी अमानुर रहमान बताते हैं, ‘हादी की मौत के बाद लोग सड़कों पर आ गए और नारे लगाने लगे। उनके समर्थकों का मानना है कि हादी की हत्या के पीछे भारत है और बांग्लादेश की यूनुस सरकार भारत के खिलाफ एक्शन नहीं ले रही। इसी सोच के साथ हादी के समर्थक ढाका यूनिवर्सिटी वाले इलाके में इकट्ठा हुए। फेसबुक पोस्ट देखने के बाद भीड़ इकट्ठा हो गई और आगजनी शुरू कर दी।’
मीडिया हाउस के ऑफिसों में आग लगाने के अलावा भीड़ ने ढाका के धनमंडी में पूर्व राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रहमान के पहले ही ढहाए जा चुके घर में भी तोड़फोड़ की। भीड़ घर के बचे हिस्से गिराने की कोशिश करती दिखी। प्रदर्शनकारियों ने चट्टोग्राम में सहायक भारतीय उच्चायुक्त के घर पर पत्थर फेंके। हालांकि कोई नुकसान नहीं हुआ। पुलिस ने भीड़ को खदेड़कर 12 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
ढाका में बांग्ला सांस्कृतिक संगठन ‘छायानट’ पर हमला भीड़ ने ढाका के धनमंडी इलाके में ‘छायानट’ के ऑफिस में आग लगा दी। छायानट बांग्लादेश के सबसे पुराने सांस्कृतिक संगठनों में से एक है। छायानट 1961 में रवींद्रनाथ टैगोर की जन्मशती समारोह के बाद बना था। बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम के दौरान छायानट के कलाकारों ने आजादी के लिए लड़ रहे लोगों और शरणार्थियों का हौसला बढ़ाने के लिए कार्यक्रम किए थे। संगठन की महासचिव लैसा अहमद कहती हैं, ‘बहुत नुकसान हुआ है। आप खुद इसे देख सकते हैं।’

‘हिंदू युवक की इतनी बेरहमी से हत्या नॉर्मल बात नहीं’ मैमनसिंह शहर में हिंदू युवक दीपु चंद्र दास की हत्या पर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने कहा है कि नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। मैमनसिंह शहर राजधानी ढाका से करीब 80 किमी दूर है।
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भाकुला पुलिस स्टेशन के ड्यूटी ऑफिसर रिपन मियां के मुताबिक, पैगंबर मोहम्मद का अपमान करने से भड़की भीड़ ने रात करीब 9 बजे दीपु की पिटाई की थी। पुलिस मौके पर पहुंचती, तब तक उसकी मौत हो गई। भीड़ भी जा चुकी थी। 19 सितंबर की रात तक न इस मामले में कोई गिरफ्तारी हुई, न केस दर्ज किया गया। पुलिस के मुताबिक, दीपु का परिवार आएगा, तब केस दर्ज करेंगे।
हालांकि, दीपु की हत्या पर पत्रकार अमानुर रहमान बताते हैं, ‘बांग्लादेश में हिंसा और हिंदू युवक की हत्या का मामला एक ही वक्त हुआ है, लेकिन अभी पता नहीं चला है कि हत्या की असल वजह क्या है। पुलिस ने कहा है कि उसने पैगंबर मोहम्मद का अपमान किया था। इसलिए भीड़ ने उसे मार दिया। उसे जिस तरह मारा गया, ये सामान्य घटना नहीं है।’

बीजेपी नेता और पार्टी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने हत्या की निंदा करते हुए एक्स पर लिखा, “यह भयावह घटना इस्लामी चरमपंथ को बेरोकटोक बढ़ने देने और अल्पसंख्यकों को सुरक्षा से वंचित किए जाने पर होने वाली क्रूर हक़ीक़त को उजागर करती है.”
सामरिक मामलों के जानकार और लेखक ब्रह्मा चेलानी ने भी लिंचिग और बांग्लादेश के ताज़ा हालात पर में एक्स पर एक पोस्ट लिखा है.
चेलानी लिखते हैं, “बांग्लादेश खुलेआम अराजकता की ओर बढ़ रहा है. सरकार समर्थित मिलिटेंट्स ने अखबारों के दफ्तरों में आग लगा दी है, भारतीय राजनयिकों के दफ़्तरों और घरों पर धावा बोल दिया है, और एक हिंदू अल्पसंख्यक युवक को पेड़ से बांधकर जिंदा जलाकर उसकी हत्या कर दी है.”
“जैसे-जैसे भीड़ सड़कों पर हावी होती जा रही है, नोबेल शांति पुरस्कार विजेता के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अपनी दमनकारी शक्ति का इस्तेमाल अपने ही लोगों पर करना शुरू कर दिया है.”
“संदेश स्पष्ट है: असहमति और अल्पसंख्यक अब सुरक्षित नहीं हैं. इन हमलों के मद्देनज़र, देश के दो प्रमुख अखबारों को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा है.”
पश्चिम बंगाल बीजेपी ने भी लिंचिंग की घटना की आलोचना की है और एक्स अकाउंट पर लिखा, “बांग्लादेश में कल रात एक हिंदू, दीपू चंद्र दास को पीट-पीटकर मार डाला गया. यह मामला सिर्फ बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास का नहीं है. यह हरगोबिंदो दास और चंदन दास का भी है, जिन्हें ममता बनर्जी के शासनकाल में पश्चिम बंगाल में इसी तरह की नियति का सामना करना पड़ा.”
हिंदू नेता बोले- घर से निकलने में डर लग रहा बांग्लादेश की कुल आबादी 16.5 करोड़ में करीब 1.31 करोड़ यानी 8% हिंदू हैं। अगस्त, 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की कई घटनाएं सामने आई हैं। सत्ता से हटने के बाद शेख हसीना बांग्लादेश से भारत आ गई थीं। अब हालत ऐसी है कि हिंदू समुदाय के लोग घरों के बाहर निकलने से डर रहे हैं।
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल के महासचिव महिंद्र कुमार नाथ कहते हैं, ‘हिंदू युवक की हत्या बांग्लादेश में बन रहे माहौल को दिखाती है। दीपु के पास पुराना बटन वाला फोन था। वो कैसे ईश्वर के खिलाफ पोस्ट कर सकता है। पहले भी ईशनिंदा का बहाना बनाकर हत्याएं की गईं हैं।’
‘बांग्लादेश में कट्टरपंथी हावी हो रहे हैं। वे दूसरे समुदाय के लोगों को अपने आसपास नहीं देखना चाहते। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों को निशाना बनाना और उनकी हत्याएं आम बात हो गई है।’
महिंद्र कहते हैं, ‘बांग्लादेश का माहौल अब अल्पसंख्यकों के लिए मुश्किल हो गया है। आपके साथ, कब क्या बुरा हो जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता। हिंदू नेताओं के घरों पर हमले किए जा रहे हैं। उदारवादी मुस्लिमों पर भी हमले हो रहे हैं। मौजूदा वक्त हसीना सरकार के वक्त से भी ज्यादा खराब है।’
बांग्लादेशी आर्मी का बड़ा धड़ा यूनुस सरकार के खिलाफ बांग्लादेश में डॉ. यूनुस के नेतृत्व में चल रही सरकार आर्मी का भरोसा नहीं जीत सकी है। अलाउद्दीन आरोप लगाते हैं कि आर्मी सबसे बड़ी फोर्स है, जो यूनुस सरकार को हटाने की कोशिश कर रही है। एजेंसियां और आर्मी मिलकर हिंसा करवा रही हैं ताकि चुनाव न हो सकें।’
अलाउद्दीन कहते हैं कि ‘अंतरिम सरकार को चलाने के लिए पुलिस, ब्यूरोक्रेसी और आर्मी का समर्थन चाहिए होता है। बांग्लादेश में फिलहाल २७ आर्मी जनरल कैद में हैं। वे हसीना सरकार की राज्य प्रायोजित हिंसा का हिस्सा थे। आर्मी नहीं चाहती कि नई राजनीतिक सरकार चुनकर आए। आर्मी का एक धड़ा सरकार के साथ नहीं है।’