राहुल की दोहरी नागरिकता केस से हाईकोर्ट जज हटे:CBI जांच-FIR का आदेश दिया, फिर पलटा था; याचिकाकर्ता का पोस्ट में पैसा लेने का जिक्र

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता केस से इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज सुभाष विद्यार्थी ने खुद को अलग कर लिया है। सोमवार को जज ने यह फैसला याचिकाकर्ता की पोस्ट से नाराज होकर लिया है।

याचिकाकर्ता ने पोस्ट किया था कि यदि आपने किसी से पैसा लिया है तो उसे वापस कर दें, अन्यथा आपको जेल जाना होगा। हालांकि उसने अपने पोस्ट में जज का जिक्र नहीं किया था।

दरअसल 17 अप्रैल को जज ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने और मामले की जांच CBI से कराने का आदेश दिया था। अगले ही दिन अपना फैसला बदलते हुए उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी को नोटिस जारी किए बिना फैसला करना उचित नहीं है।

याचिका दायर करने वाले विग्नेश शिशिर (सफेद शर्ट में) कर्नाटक भाजपा के कार्यकर्ता हैं। (फाइल फोटो)
याचिका दायर करने वाले विग्नेश शिशिर (सफेद शर्ट में) कर्नाटक भाजपा के कार्यकर्ता हैं। (फाइल फोटो)

आदेश बदलने के बाद याचिकाकर्ता ने 2 पोस्ट किए

कर्नाटक में रहने वाले भाजपा कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर ने राहुल गांधी पर भारत के साथ-साथ ब्रिटिश नागरिकता लेने का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज करने की मांग की है। उनकी याचिका एमपी-एमएलए कोर्ट से खारिज हुई थी। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के पास उन्होंने याचिका लगाई थी।

यहां से FIR का आदेश बदले जाने के बाद विग्नेश ने 18 अप्रैल को एक घंटे के भीतर X पर 2 पोस्ट किए थे। पहली पोस्ट में लिखा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में अंतिम स्थिति यह है– मामला स्वीकार किया जाता है।

विग्नेश ने केस से जुड़े सभी लोगों को चेतावनी देते हुए लिखा, ‘कृपया ध्यान दें कि यदि इस मामले के स्टेटस में कोई परिवर्तन होता है, तो मैं अपना अगला ट्वीट अपलोड करूंगा और उसमें सभी माफिया, अंडरवर्ल्ड, कार्टेल, सिंडिकेट और अवैध गठजोड़ों का पर्दाफाश करूंगा।

(इस x पोस्ट के साथ विग्नेश एस शिशिर कोर्ट में केस की स्थिति से संबंधित दस्तावेज पोस्ट किए)

विग्नेश की दूसरी पोस्ट में कोर्ट का स्टेटस बदलने का जिक्र है। उन्होंने रिश्वत लेने का जिक्र करते हुए लिखा कि कृपया उनसे ली गई धनराशि वापस कर दें। अन्यथा मैं इंटरसेप्ट की गई कॉल को सीधे ट्विटर पर अपलोड कर दूंगा। पूरी तरह तैयार रहें। आपको स्थायी रूप से जेल जाना होगा।

विग्नेश ने अपनी पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया है। किसकी इंटरसेप्ट कॉल है, किसने धनराशि दी है, इसका भी सीधे-सीधे जिक्र नहीं है।

जज ने पूछा- पीठ पीछे कीचड़ उछालना कैसे उचित

सोमवार को लखनऊ बेंच में मामले की सुनवाई जैसे ही शुरू हुई, जज सुभाष विद्यार्थी ने याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर की उन सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र किया, जिसमें धमकी दी गई थी।

जज ने याचिकाकर्ता से पूछा, पीठ पीछे कीचड़ उछालना कैसे उचित है? अदालत के खिलाफ बोलना सही है? जज ने कहा, आवेदक ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए कोर्ट का इस्तेमाल किया।

2019 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी ही याचिका खारिज कर दी थी

सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में राहुल की भारतीय नागरिकता से जुड़ी याचिका खारिज कर दी थी। उस समय के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा था कि अगर कोई कंपनी किसी फॉर्म में राहुल गांधी को ब्रिटिश नागरिक के तौर मेंशन करती है, तो क्या ऐसा कर देने से ही वे ब्रिटिश नागरिक हो गए।

सीजेआई गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने कहा था- ‘हम यह याचिका खारिज करते हैं। इसमें कोई आधार नहीं है। ‘याचिका में कहा गया था, ‘कोर्ट राहुल की नागरिकता के बारे में मिली शिकायत पर जल्द फैसला करने के लिए गृह मंत्रालय को निर्देश दे।’

याचिका में राहुल गांधी को चुनाव लड़ने से अयोग्य करार दिए जाने की भी मांग की गई थी। याचिकाकर्ता जय भगवान गोयल ने ब्रिटेन की कंपनी के 2005-06 के सालाना ब्योरे का जिक्र किया था। इसमें कथित तौर पर राहुल को ब्रिटिश नागरिक बताया गया था।

यह तस्वीर 20 फरवरी 2024 की है, जब राहुल गांधी सुल्तानपुर कोर्ट में राहुल पेश हुए थे।
यह तस्वीर 20 फरवरी 2024 की है, जब राहुल गांधी सुल्तानपुर कोर्ट में राहुल पेश हुए थे।

राहुल के खिलाफ यूपी में 3 केस

  • राहुल के खिलाफ मानहानि का एक केस सुल्तानपुर कोर्ट में चल रहा है। यह मामला 2018 का है। जिसमें बीजेपी नेता विजय मिश्रा ने राहुल पर मानहानि का आरोप लगाया था। 20 फरवरी, 2024 को कोर्ट ने राहुल को 25-25 हजार रुपए के दो मुचलकों पर जमानत दी थी। शुक्रवार, 17 अप्रैल को कोर्ट ने वादी विजय मिश्रा को बार-बार स्थगन आदेश लेने पर कड़ी चेतावनी दी है। अगली सुनवाई 22 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
  • लखनऊ की एक अदालत में राहुल पर वीर सावरकर को लेकर विवादित बयान के कारण भी मामला दर्ज है। इस मामले में राहुल गांधी को 200 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था।
  • हाथरस की एमपी-एमएलए कोर्ट में राहुल के खिलाफ मानहानि केस चल रहा है। बूलगढ़ी गांव के रामकुमार उर्फ रामू ने यह परिवाद दाखिल किया है। आरोप है कि अदालत से दोषमुक्त हुए युवकों को गैंगरेप का आरोपी बताया।

मोदी सरनेम केस में गई थी सांसदी

मोदी सरनेम केस में गुजरात की एक कोर्ट से दोषी करार दिए जाने के बाद 24 मार्च 2023 को राहुल गांधी की सदस्यता रद्द की गई थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने राहुल की दोषसिद्धि पर रोक लगा दी थी। इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने 7 अगस्त 2023 को उनकी सदस्यता बहाल कर दी थी।

 

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