बांग्लादेश में 20 साल बाद BNP की जीत:तारिक रहमान का PM बनना तय; देश को 35 साल बाद मिलेगा पुरुष प्रधानमंत्री
ढाका: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के चेयरमैन तारिक रहमान का देश का अगला प्रधानमंत्री बनना तय है। 12 फरवरी को हुए चुनाव में उनकी पार्टी ने जबरदस्त जीत हासिल की है। बीएनपी अभी तक 175 सीटें जीत चुकी है और उसके 200 से ज्यादा सीटों पर जीतने का अनुमान है। 60 साल के रहमान तीन महीने पहले ही लंदन में 17 साल के देश निकाला से लौटे हैं। शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान ढाका में एक बम धमाके के बाद कोर्ट ने उन्हें आतंकवाद के आरोपों में दोषी ठहराया था और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। लेकिन शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद मोहम्मद यूनुस से प्रशासन के समय उन्हें उम्रकैद की सजा और भ्रष्टाचार के मामलों में बरी कर दिया गया। मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार अब 15 से 18 फरवरी के बीच तारिक रहमान के हाथों में देश की सत्ता सौप सकती है। साल 2005 में जारी हुए एक अमेरिकी डिप्लोमेटिक केबल, जिसे विकिलिक्स ने जारी किया था, उसमें उन्हें बांग्लादेश में ‘समानांतर सरकार’ चलाने का आरोप लगाया गया था। तारिक रहमान को “चोरी-छिपी सरकार का सिंबल” बताया गया और “हिंसक राजनीति” में उनके कथित तौर पर शामिल होने के लिए उन्हें “डार्क प्रिंस” नाम दिया गया। फिर साल 2008 में सेना के क्रैकडाउन के समय रहमान भागकर लंदन चले गये।बांग्लादेश में गुरुवार को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बड़ी जीत दर्ज की है। BNP ने 299 सीटों में से 209 हासिल कर बहुमत के लिए जरूरी 150 के आंकड़े को पार कर लिया। अब तक 286 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं।
क्या बांग्लादेश की विदेश नीति बदलेगी?
भारत के साथ रिश्ते- नई दिल्ली 2001-2006 के BNP के शासन को बॉर्डर पार से बगावत और 2004 के चटगांव हथियारों की बरामदगी के समय के तौर पर याद करती है, जब 10 ट्रकों में हथियार भरकर भारत भेजे गये थे। उसका मकसद उत्तर पूर्व भारत में भयानक हिंसा करना था। रहमान अब रिश्तों को रीसेट करने की बात कर रहे हैं। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ लगातार सहयोग, तीस्ता जल बंटवारे के प्रस्ताव और हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का वादा किया है। लेकिन उनका “बांग्लादेश फर्स्ट” सिद्धांत हसीना युग के लगभग पूरे रणनीतिक तालमेल से बिल्कुल अलग है। एनालिस्ट का मानना है कि शेख हसीना के समय बांग्लादेश, भारत का करीबी पड़ोसी था, लेकिन रहमान के समय बांग्लादेश सिर्फ एक पड़ोसी होगा। चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में एक आक्रामक पड़ोसी होगा।
चीन– बांग्लादेश के पास बेल्ट एंड रोड के 6 अरब डॉलर के बकाया लोन हैं। रहमान से बीजिंग के साथ डिफेंस समझौते और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट जारी रखने की उम्मीद है। किसी प्रोजेक्ट के कैंसल होने की उम्मीद नहीं है।
पाकिस्तान- यूनुस सरकार ने 2025 में पाकिस्तान से मेल-मिलाप शुरू किया था। रहमान ने संकेत दिया है कि वह उस जुड़ाव बनाए रखेंगे। इस्लामाबाद उनकी बढ़त को ढाका में डिप्लोमैटिक वजन वापस पाने के मौके के तौर पर देख रहा है। हालांकि रहमान, टकराव को टालने के लिए भारत की चिंताओं को ध्यान में रख सकते हैं।
जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन को अब तक 70 सीटें मिली हैं। जमात प्रमुख शफीकुर रहमान ने ढाका-15 सीट से जीत दर्ज की है। देश में करीब 20 साल बाद BNP की सरकार बनी है। 2008 से 2024 तक वहां शेख हसीना की आवामी लीग सत्ता में थी।
इस जीत के साथ पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और BNP अध्यक्ष तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। तारिक ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों पर जीत हासिल की है। वे पिछले साल दिसंबर में 17 साल बाद देश लौटे थे।
बांग्लादेश में 35 साल बाद कोई पुरुष प्रधानमंत्री बनेगा। 1988 में काजी जफर अहमद प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद 1991 से 2024 तक देश की राजनीति में पूर्व पीएम शेख हसीना और खालिदा जिया का दबदबा रहा। ये दोनों ही प्रधानमंत्री बनती रहीं।
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के अध्यक्ष तारिक रहमान ने कार्यकर्ताओं से संसदीय चुनाव में जीत जश्न न मनाने और संयम बरतने की अपील की है।
उन्होंने पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे आज जुमे की नमाज के बाद देशभर में खास दुआ करें। तारिक रहमान ने साफ कहा है कि देश में कहीं भी जीत का जुलूस या रैली आयोजित न की जाए।

तारिक रहमान की BNP पार्टी के चुनावी वादे
महिला सशक्तिकरण
- महिलाओं के नाम पर ‘फैमिली कार्ड’ जारी किया जाएगा।
- महिलाओं को पोस्ट ग्रेजुएशन तक मुफ्त पढ़ाई दी जाएगी।
बुलेट ट्रेन
- ढाका को देश के बड़े शहरों से जोड़ने के लिए हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) चलाई जाएगी।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा
- हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की जान, संपत्ति और पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाए जाएंगे।
अर्थव्यवस्था
- छोटे उद्योगों को टैक्स में छूट दी जाएगी।
- विदेशों में काम करने वाले बांग्लादेशी मजदूरों के लिए खास कल्याण फंड बनाया जाएगा।
प्रशासनिक सुधार
- न्यायपालिका को और मजबूत व स्वतंत्र बनाया जाएगा।
- चुनाव आयोग को ज्यादा अधिकार दिए जाएंगे।
- प्रशासन में सुधार कर भ्रष्टाचार कम किया जाएगा।
विदेश नीति
- किसी भी देश का दबाव या प्रॉक्सी न बनकर संतुलित विदेश नीति अपनाई जाएगी।
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पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने बांग्लादेश संसदीय चुनाव में जीत पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और उसके चेयरमैन तारिक रहमान को बधाई दी है।
जारदारी ने कहा कि पाकिस्तान बांग्लादेश की लोकतांत्रिक उम्मीदों का समर्थन करता है। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान नई सरकार के साथ मिलकर व्यापार, रक्षा और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए काम करने को तैयार है।
तारिक रहमान का PM बनना लगभग तय
तारिक रहमान 25 जनवरी को ब्रिटेन से बांग्लादेश लौटे थे। उनकी वापसी के सिर्फ पांच दिन बाद, पूर्व प्रधानमंत्री और उनकी मां खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। इसके बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की कमान पूरी तरह उनके हाथों में आ गई।
तारिक पर 2001 से 2006 के BNP शासनकाल में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। 2007 में अंतरिम सरकार के दौरान उन्हें 18 महीने जेल में रहना पड़ा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए तारिक 2008 में लंदन भाग गए थे। तब उन्हें उस समय इलाज के लिए देश से बाहर जाने की अनुमति मिली थी। इसके बाद वे देश नहीं लौटे।
टाइम मैगजीन के मुताबिक देश से बाहर रहने के बावजूद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) में तारिक को ही पार्टी का नेता माना जाता रहा। पार्टी की रणनीति, आंदोलन और राजनीतिक लाइन लंबे समय तक उन्हीं के इशारों पर तय होती रही।
तारिक रहमान खुद को शांत, सुनने वाला और पॉलिसी पर फोकस नेता की तरह पेश कर रहे हैं। वे हर साल 5 करोड़ पेड़ लगाने, ढाका में नए ग्रीन जोन बनाने और तकनीकी शिक्षा बढ़ाने की बात करते हैं।
हिंदू-अवामी लीग के वोट BNP को मिले, जमात को हराया
बांग्लादेश चुनाव में कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी बुरी तरह हारी है। उसके गठबंधन को सिर्फ 70 सीटें मिलीं हैं। शेख हसीना की सरकार गिराने वाले स्टूडेंट्स की पार्टी नेशनल सिटीजन पार्टी यानी NCP को भी बांग्लादेशियों ने नकार दिया।
एक्सपर्ट्स BNP की एकतरफा जीत की तीन वजह बताते हैं…
- पूर्व PM शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के वोट खासकर हिंदू वोटर BNP में शिफ्ट हो गए। BNP को अवामी लीग के गढ़ रहे गोपालगंज के अलावा खुलना, सिलहट, चटगांव, ठाकुरगंज में जीत मिली है।
- जमात का अतीत आड़े आ गया, लोगों को याद रहा कि उसने बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम का विरोध किया था। जमात इस दाग को नहीं धो पाई।
- स्टूडेंट्स की नेशनल सिटीजन पार्टी को आपसी फूट और जमात से गठबंधन करना भारी पड़ा। उन्हें लोगों ने पूरी तरह खारिज कर दिया।
भारत में रह रहीं पूर्व बांग्लादेशी पीएम शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर इस चुनाव में बैन लगा दिया गया था। हसीना ने इस चुनाव को पूरी तरह फर्जी और असंवैधानिक बताया है।
उन्होंने कहा कि मोहम्मद यूनुस ने गैरकानूनी और असंवैधानिक तरीके से सत्ता पर कब्जा किया और उसी के तहत यह चुनाव कराया गया।
उधर बांग्लादेश के मुंशीगंज-3 और गोपालगंज सदर इलाके में वोटिंग सेंटर के बाहर देसी बम फेंके गए। मुंशीगंज-3 में धमाके के बाद कुछ देर के लिए वोटिंग रोकी गई थी, जो अब फिर से शुरू हो गई है। वहीं गोपालगंज सदर इलाके में धमाके से दो अंसार जवान (अर्द्धसैनिक बल) और एक 14 साल की लड़की घायल हो गई।
बांग्लादेश में करीब 12.7 करोड़ मतदाता आज अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस चुनाव में युवाओं की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि लगभग आधे मतदाता 18 से 37 साल के हैं। इनमें करीब 45.7 लाख मतदाता पहली बार वोट डालेंगे। अब तक देश के 33 हजार वोटिंग सेंटर्स पर 33% मतदान हुआ है।
बांग्लादेश में आम चुनाव के लिए वोटिंग जारी है। इस बार 51 राजनीतिक पार्टियां सत्ता हासिल करने के लिए मैदान में हैं। बांग्लादेश में करीब 12.7 करोड़ मतदाता आज अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।
बांग्लादेश में चुनाव …





इस चुनाव में युवाओं की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि लगभग आधे मतदाता 18 से 37 साल के हैं। इनमें करीब 45.7 लाख मतदाता पहली बार वोट डालेंगे।
पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान पीएम पद के सबसे बड़े दावेदार हैं। इस चुनाव में उनकी पार्टी BNP सत्ता की सबसे बड़ी दावेदार है।
वहीं जमात-ए-इस्लामी पार्टी के नेता शिफुकर रहमान और नेशनल सिटिजन्स पार्टी (NCP) के नेता नाहिद इस्लाम भी PM पद का अहम चेहरा हैं। नाहिद इस्लाम ने दावा किया है कि जमात-NCP समेत 11 दलों का गठबंधन सरकार बनाएगा।
बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के अमीर शफीकुर रहमान ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है उनकी पार्टी लोगों के वोट से सरकार बनाएगी।
उन्होंने कहा कि अगर चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से होता है तो वे नतीजे स्वीकार करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरों को भी जनता का फैसला मानना चाहिए।
#WATCH बांग्लादेश चुनाव | बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी-BNP के चेयरमैन और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान, 13वें संसदीय चुनाव के लिए अपना वोट डालने के लिए ढाका के गुलशन मॉडल स्कूल और कॉलेज में बने पोलिंग सेंटर पर पहुंचे। pic.twitter.com/Y76eREOczc
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 12, 2026
BNP अध्यक्ष और पीएम पद के सबसे बड़े दावेदार तारिक रहमान ने अपना वोट डाल दिया है। वे ढाका-17 से उम्मीदवार हैं। उनके साथ उनकी पत्नी डॉ. जोबैदा रहमान और उनकी बेटी बैरिस्टर जैमा रहमान भी थीं।
पार्टी के सीनियर नेताओं ने उम्मीद जताई है कि BNP 300 में से दो-तिहाई सीटें जीत सकती है। पार्टी का कहना है कि चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें लोगों का जबरदस्त समर्थन मिला है। इस चुनाव में कुल 1,981 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 249 निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं। चुनाव में हिस्सा लेने वाले प्रमुख दलों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी), जमात-ए-इस्लामी, नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी), जातीय पार्टी (जेपी-कादर), जातीय पार्टी (जेपी-एरशाद), लेफ्ट डेमोक्रेटिक एलायंस और अमर बांग्लादेश पार्टी शामिल हैं।
नेशनल सिटिजन्स पार्टी के प्रमुख नाहिद इस्लाम ने दावा किया है कि जमात-एनसीपी समेत 11 दलों का गठबंधन 13वें संसदीय चुनाव में सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच चुका है। उन्होंने ढाका में वोट डालने के बाद पत्रकारों से बातचीत में यह बात कही।
नाहिद ने सरकार गठन को लेकर पूछे गए सवाल पर कहा, “हमें भरोसा है कि हम सरकार बनाने के करीब हैं। जब तक नतीजे नहीं आ जाते, हम मतदान केंद्रों की सुरक्षा करेंगे। जनता जो फैसला देगी, हम उसे पूरी तरह स्वीकार करेंगे।”

NCP उम्मीदवार की कार पर हमला, छोटे भाई समेत 5 घायल
बांग्लादेश के कुरीग्राम सदर के पलाशबारी इलाके में NCP उम्मीदवार अतीकुर रहमान की कार पर बुधवार रात करीब साढ़े 10 बजे हमला किया गया। इस हमले में उनके छोटे भाई समेत पांच लोग घायल हो गए। अतीकुर रहमान को रंगपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्हें हल्की चोटें आई हैं।
अतीकुर ने आरोप लगाया कि करीब 35 लोगों ने रॉड और हॉकी स्टिक से हमला किया। हमलावरों को शक था कि वह कार में मौजूद हैं, इसलिए गाड़ी को निशाना बनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि सूचना देने के बावजूद पुलिस तुरंत नहीं पहुंची।

BNP नेता बोले- चुनाव से बांग्लादेश में नए दौर की शुरुआत
BNP के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह चुनाव बांग्लादेश में एक नए दौर की शुरुआत करेगा।
अपने गृह जिले ठाकुरगांव के गवर्नमेंट गर्ल्स हाई स्कूल में वोट डालने के बाद उन्होंने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि यह चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और तटस्थ होगा। सभी की भागीदारी के साथ शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव हो और देश में एक नए अध्याय की शुरुआत हो।
फखरुल ने कहा कि कई सालों के त्याग और संघर्ष के बाद यह दिन आया है। आज बांग्लादेश में लोकतंत्र की एक नई यात्रा शुरू हो रही है। हमें उम्मीद है कि यह रास्ता देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन को बेहतर भविष्य की ओर ले जाएगा।

9 घंटे वोटिंग, 13 फरवरी की सुबह तक रिजल्ट चुनाव के लिए वोटिंग 12 फरवरी को सुबह 7:30 बजे शुरू होगी और शाम 4:30 बजे तक चलेगी। इसके बाद काउंटिंग शुरू हो जाएगी। बांग्लादेश में बैलेट पेपर से ही चुनाव होता है। इसलिए वोटों की गिनती में ज्यादा वक्त लगता है।
बांग्लादेश इलेक्शन कमीशन के मुताबिक, 300 सीटों पर वोटिंग के लिए 64 जिलों में 42,761 पोलिंग बूथ बनाए गए हैं। बांग्लादेश में करीब 12.7 करोड़ वोटर हैं। पहली बार डाक से वोट देने की सुविधा दी गई है। इसका फायदा करीब 1.5 करोड़ वोटर्स को होगा, जो काम के लिए घर से दूर चले गए हैं।
350 सीटों वाली संसद में 300 सांसदों के लिए चुनाव होता है। बाकी 50 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हैं। रिजर्व सीटें चुनाव के नतीजों के हिसाब से मिलती हैं, जैसे अगर BNP को 120 सीटें मिलती हैं, तो उसे महिलाओं के लिए रिजर्व 20 सीटें मिलेंगी।
बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने ढाका के एक वोटिंग सेंटर पर अपना वोट डाला। वे ढाका-15 संसदीय सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।
वोट देने के बाद उन्होंने कहा कि इस मतदान के जरिए बांग्लादेश में एक नए अध्याय की शुरुआत हो। उन्होंने बताया कि 2014, 2018 और 2024 के चुनाव के समय वह जेल में थे। तीन चुनावों में वोट नहीं दे पाने के बाद इस बार वोट डालने का मौका मिलने पर उन्होंने अल्लाह का शुक्र अदा किया।
शफीकुर रहमान ने कहा कि देश के कई युवाओं को जीवन में एक बार भी वोट देने का मौका नहीं मिला। आज के इस मतदान का वे लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।

अवामी लीग के न होने से BNP को फायदा बांग्लादेश में करीब 10% हिंदू आबादी हैं। हिंदू वोटर अवामी लीग के वोटर रहे हैं। अवामी लीग ने 2024 के चुनाव में 272 सीटें जीती थीं। उसे 30 से 40% वोट मिलते रहे हैं। इस बार ये वोट बैंक किसके हिस्से में जाएगा, यही सवाल है। अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध का फायदा BNP को होता दिख रहा है। हिंदू वोटर जमात से दूरी बनाते दिख रहे हैं क्योंकि जमात का नाम अल्पसंख्यकों पर हमले में आता रहा है। ऐसे में उनका झुकाव BNP की ओर दिख रहा है।
ढाका के ढाकेश्वरी मंदिर में मिले डॉ. सुनीरमल रॉय कहते हैं, ‘हमें पता है कि जमात-ए-इस्लामी इस्लामिक पार्टी है। BNP लोकतांत्रिक पार्टी है।’
ढाका यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और पॉलिटिकल एक्सपर्ट सैफुल इस्लाम चौधरी कहते हैं, ‘चुनाव के नतीजे क्या होंगे, मुझे इससे ज्यादा फिक्र इस बात की है कि चुनाव निष्पक्ष होंगे या नहीं। लोग खुलकर वोट डाल पाएंगे या नहीं। एक रात पहले ही ढाका के बाहर कई घटनाएं हुई हैं।’
‘कुछ न कुछ गड़बड़ करने की कोशिशें चल रही हैं। कैंडिडेट धमकी दे रहे हैं कि अगर वे नहीं जीते तो विरोधियों के घरों में तोड़फोड़ करेंगे। इसीलिए सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता है। अगर लोगों को सुरक्षा का भरोसा नहीं होगा, तो वे डर की वजह से पोलिंग बूथ तक नहीं जाएंगे।’
चौधरी आगे कहते हैं, ‘अगर चुनाव में कोई गड़बड़ी नहीं हुई, तो कहना मुश्किल है कि कौन कितनी सीटें जीतेगा। मैं इस देश के लोगों के वोटिंग बिहेवियर को जानता हूं। यहां लोग कैंडिडेट की बजाय पार्टी को वोट देते हैं। अवामी लीग इस बार नहीं है। मुझे लगता है कि बहुत से लोग BNP को वोट देंगे। चुनाव में धांधली नहीं हुई, तो हो सकता है कि BNP सत्ता में आ जाए।’
हिंदू और अवामी लीग के वोट किसे वोट देंगे? चौधरी जवाब देते हैं, ‘अगर अवामी लीग के 10% वोटर भी मतदान करें और उनमें से 8 से 9% BNP को वोट दे दें, तो भी BNP आसानी से जीत सकती है। अगर वे जमात को वोट देंगें, तो जमात जीत सकती है। हालांकि, सैफुल इस्लाम चौधरी मानते हैं कि किसी भी पार्टी को बहुमत लायक 151 सीटें मिलती नहीं दिख रही हैं।
वे कहते हैं, ‘इस स्थिति में शायद जमात और BNP के बीच पर्दे के पीछे समझौता हो सकता है। ये थोड़ा अजीब होगा, लेकिन दोनों मिलकर सरकार बना सकते हैं।’
अगर किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला तो क्या होगा? मोन्जुरुल कहते हैं, ‘त्रिशंकु संसद की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। मान लीजिए BNP को 125–130 सीटें मिलती हैं और जमात को 120–125। तब गठबंधन की राजनीति के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। अगर BNP दूसरी पार्टियों से समझौता नहीं कर पाती, तो उसे जमात पर निर्भर होना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में मिली-जुली सरकार भी बन सकती है। फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता।’
सीटें, जिन पर नजर रहेगी
- ढाका-8 : यहां स्टूडेंट्स की पार्टी NCP के संयोजक नासिरुद्दीन पटवारी BNP के मिर्जा अब्बास के सामने हैं।
- ढाका-9: इसी सीट पर BNP के हबीबुर राशिद का मुकाबला निर्दलीय डॉ. तस्मीन जारा से है।
- ढाका-11: यहां शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन करने वाले नाहिद इस्लाम का मुकाबला BNP के अनुभवी नेता एमए कय्यूम से है। ये ढाका की सबसे हॉट सीट हो गई है।
- ढाका-15: यहां BNP के शफीकुल इस्लाम का मुकाबला जमात के डॉ. शफीकुर रहमान से है। यहां हिंसा होने की आशंका है।
- ढाका-17: यहां से BNP प्रेसिडेंट तारिक रहमान चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला जमात के एसएम खालिदुज्जमां से है।
- खुलना-1: यहां से जमात के इकलौते हिंदू कैंडिडेट कृष्णा नंदी चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला BNP के आमिर एजाज खान से है।
- गोपालगंज-3: पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पारंपरिक सीट से BNP के एसएम जिलानी चुनाव लड़ रहे हैं। जमात ने यहां से एमएम रेजाउल करीम को उतारा है।
