भागवत बोले- जैसे-जैसे हम एक होंगे, उनके टुकड़े होंगे:वह अंदर से खोखले हो रहे, सारी दुनिया में हार रहे हैं
भागवत ने यह बात वृंदावन के सुदामा कुटी आश्रम के शताब्दी महोत्सव में शनिवार को कहीं। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि किनके टुकडे होते चले जाएंगे। उन्होंने सुदामा दास जी महाराज के जीवन परिचय और नाभा पीठ का परिचय कराने वाली पुस्तक का विमोचन किया।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- जैसे-जैसे सनातन धर्म के सब लोग एक होते जाएंगे। वैसे-वैसे ये टूटते जाएंगे। आप देख लीजिए पिछले 50 सालों में जैसे-जैसे हिंदू एक होता गया। वैसे-वैसे इनके टुकड़े होते चले गए।
ये अंदर से खोखले हो गए हैं, सारी दुनिया में हार रहे हैं। वह हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते, लेकिन जैसे हमें तैयार होना है, वैसे हम तैयार नहीं हुए हैं। इसलिए वह हमारे सामने नाच रहे हैं। उन्होंने कहा-
हमारे ऊपर 500 साल तक मुगलों ने राज किया। अगर हमारा कुछ बुरा होना होता, तो उसी समय हो जाता। लेकिन उसमें से हम बाहर आए। फिर से हिंदुओं का देश आगे बढ़ रहा है। अत्याचारों में हमने अपने धर्म को बचाकर रखा। यह शक्ति कहां से आई…भक्ति से आई।

भागवत ने यह बात वृंदावन के सुदामा कुटी आश्रम के शताब्दी महोत्सव में शनिवार को कहीं। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि किनके टुकडे होते चले जाएंगे।
उन्होंने सुदामा दास जी महाराज के जीवन परिचय और नाभा पीठ का परिचय कराने वाली पुस्तक का विमोचन किया।
भागवत ने कहा कि समाज में सारी विषमताओं को दूर करने के लिए जो विराट सत्ता चाहिए, वह भक्ति के बल पर ही मिलेगी। इसलिए इस तरह के कार्यक्रम के लिए मैं कभी मना नहीं करता।
ऐसे कार्यक्रम से बैटरी चार्ज होती है। शक्ति जागरण का काम हमें करना है, शक्ति ही शांति का आधार है। शक्ति जागरण उस भक्ति से ही होता है। भारत वर्ष में वह परंपरा आज भी चली आ रही है। आज भी भारत वर्ष में लोगों को जीने की सीख मिलती है। सब प्रकार की विपदाओं के बावजूद हमारा जीवन चल तो रहा ही है, आगे भी चलेगा। उसका कारण यह भक्ति है।भागवत ने कहा- 500 साल तक मुगलों ने राज किया, हमारा कुछ बुरा होना होता, उसी समय हो जाता। लेकिन उसमें से हम बाहर आए। फिर से हिंदुओं का देश आगे बढ़ रहा है। अत्याचारों में हमने अपने धर्म को बचा कर रखा। यह शक्ति कहां से आई, भक्ति से आई।
भागवत ने कहा- हम सब समान कैसे रहें, समान दिखते तो हैं नहीं। ऊपर की बातें बदलती रहती है, हर जन्म में बदलती हैं। परिस्थिति समान नहीं रहती, लेकिन अंदर की एकता सदा एक रहती है।
एकांत में आत्म साधना, स्वयं को पहचानना, स्वयं के अंदर जो चैतन्य है वह विश्व व्यापी है, सर्वत्र है। उसी को देखना, उसको सब में देखते हुए उनकी सेवा परोपकार में अपना जीवन लगाना।मोहन भागवत ने गोदान फिल्म के पोस्टर का विमोचन किया। यह फिल्म 6 फरवरी को रिलीज होगी।
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा- वह हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते। लेकिन जैसे हमें तैयार होना है, वैसे हम तैयार नहीं हुए हैं। इसलिए वह हमारे सामने नाच रहे हैं। अंदर से खोखले हो गए हैं, सारी दुनिया में हार रहे हैं।
इनकी व्यवधा दुनिया के सामने आई है। ये सारी असुरी जो शक्तियां हैं, जैसे-जैसे धार्मिक हिंदू और सनातन समाज के सब लोग एक होते जाएंगे। वैसे-वैसे यह टूटते जाएंगे। आप देख लीजिए पिछले 50 सालों में जैसे-जैसे हिंदू एक होता गया। वैसे-वैसे इनके टुकड़े होते चले गए।
मोहन भागवत ने कहा- अपने लिए रोज करते हो, अपने परिवार के लिए रोज करते हो, तो समाज के लिए भी रोज कुछ करो।
पर्यावरण को ठीक क्यों रखना है। क्योंकि पर्यावरण और हम अलग नहीं हैं। हम सृष्टि के स्वामी हैं। हमको हमारे पूर्वजों ने जो बताया है, वो सत्य है कि हम स्वामी नहीं है। हम तीन अंग हैं। हम और सृष्टि एक ही हैं।
ज्ञान और कर्मों का ठीक परिणाम चाहिए तो आपने जीवन में शांति-आनंद, दूसरों के जीवन में आनंद देना चाहिए। ये तय करना पड़ेगा कि हमें करना है तो करना ही है।
हमें वो भक्ति चाहिए। शक्ति में भक्ति नहीं है, तो शक्ति दोनों लोगों को प्रताड़ित करती है। जिनको सताया जाता है उनको और परेशान करती है।
मोहन भागवत ने कहा- हिंदू समाज कभी किसी दूसरे की मेहनत, सफलता और बल के कारण नहीं हारा। जब पराजय हुई तो फूट के कारण हुई।
दुनिया जितने प्रकार के लोगों को हिंदू मानती है, उतने प्रकार के लोगों से हमारी दोस्ती होनी चाहिए। हमारे रिश्तेदार होने चाहिए।
तभी हमारे सुख-दुख में रिश्तेदार और कुटुम्ब वाले शामिल होते हैं। उठना-बैठना उन्ही के साथ होना चाहिए।मोहन भागवत ने कहा- आरएसएस का निर्माण ही इसलिए हुआ ताकि समय-समय पर दुनिया को हम धर्म का ज्ञान दे सकें। ये बता सकें कि जीवन कैसे जीया जाता है। चरित्र की शिक्षा हमको देखकर दुनिया ग्रहण करें। ऐसा भाव भक्ति से संभव है।सुदामा दास जी महाराज के जीवन परिचय और नाभा पीठ का परिचय पर लिखी गई पुस्तक का मोहन भागवत ने विमोचन किया।अयोध्या से आए संत कमल नयन दास महाराज ने कहा- गुरु गोविंद सिंह ने धर्म की रक्षा के लिए सनातन की रक्षा के लिए अपने परिवार का बलिदान दे दिया।
10 दिन चलने वाले आयोजनों में 4 राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे। साथ ही, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह को भी न्योता भेजा गया है। 2025 में सुदामा कुटी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी आ चुकी हैं। वह स्पेशल ट्रेन से दिल्ली से वृंदावन पहुंची थीं।
वृंदावन में यमुना किनारे पूजास्थल तैयार किए गए हैं, यहां हर रोज 10 हजार लोग फ्री भोजन करेंगे। इस कुटी के बारे में कहा जाता है कि कोई भी इस कुटी से भूखा नहीं लौटता है, यहां लोगों और संतों की सेवा 24 घंटे चलती रहती है।
सुदामा कुटी की लोकेशन बांके बिहारी मंदिर से सिर्फ 2Km दूर है। गोवर्धन पर्वत से कुटी 25 Km दूर है। VVIP मूवमेंट को देखते हुए परिक्रमा मार्ग पर सिक्योरिटी के खास इंतजाम किए गए हैं।
10 जनवरी की दोपहर 3.30 बजे RSS प्रमुख मोहन भागवत पहुंचेंगे। सुदामा कुटी के महंत नाभापीठाधीश्वर सुतीक्ष्णदास महाराज कहते हैं- आश्रम का शताब्दी महामहोत्सव मनाया जा रहा है। अब 10 दिन तक आध्यात्मिक आयोजन होंगे। यहां हजारों लोग पहुंचेंगे।
हर दिन सुबह 8 से 10 बजे तक श्रीराम महायज्ञ होगा। पूरे आयोजन में 11 टन हवन सामग्री और 200 पीपा देसी घी का इस्तेमाल होगा। शाम के समय यहां भजन कीर्तन होंगे, इसमें हर दिन अलग-अलग संत शामिल होंगे।


सुदामा कुटी आश्रम के 100 साल पूरे होने पर शनिवार सुबह आश्रम से शोभायात्रा निकाली गई। महंत सुतीक्ष्ण दास महाराज रथ पर सवार होकर भ्रमण करने निकले। शोभायात्रा अलग-अलग चौराहों से होते हुए दोपहर 3 बजे वापस सुदामा कुटी आश्रम पहुंची थी।
आपको बता दें कि सुदामा कुटी की स्थापना सुदामादास महाराज ने 1926 में की थी। सुदामा कुटी आश्रम बंसीवट और गोपेश्वर महादेव मंदिर के बीच स्थित है, जहां हजारों संतों की निशुल्क सेवा की जाती है।
आश्रम के महंत अमरदास महाराज ने बताया– सुदामादास महाराज का जन्म बिहार के गोपालगंज स्थित छिपाया गांव में 1899 में हुआ था। वह पहले अयोध्या में कुछ दिन रहे। इसके बाद 1926 में वृंदावन आ गए। तब से ही वे संत सेवा में लग गए। सुदामा कुटी में कई मंदिर हैं जहां सुबह से शाम तक भर्जन कीर्तन चलता रहता है। संतों की सेवा में लगे संत गोशाला में गोसेवा भी करते हैं।