सुप्रीम कोर्ट बोला- कोई भी शक्ति अनियंत्रित नहीं हो सकती:SIR के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, 7 दस्तावेज तय तो 11 क्यों मांग रहे

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि मतदाता सूची में संशोधन (SIR) के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जिनके नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं होते। कोर्ट ने कहा ‘कोई भी शक्ति अनियंत्रित नहीं हो सकती।’

चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बैंच बिहार समेत विभिन्न राज्यों में SIR की प्रक्रिया के विरोध में लगाई गई याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने दलीलें रखीं।

जस्टिस बागची ने दस्तावेजों की सूची का जिक्र करते हुए कहा कि जहां फॉर्म-6 में 7 दस्तावेज तय हैं, वहीं SIR प्रक्रिया में 11 दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या आयोग मनमाने ढंग से दस्तावेज जोड़-घटा सकता है। मामले की आगे की सुनवाई गुरुवार को होगी।

कोर्टरूम लाइव

  • CJI: अगर वोटर लिस्ट से किसी का नाम कटता है, तो उसके गंभीर नागरिक नतीजे होते हैं। ऐसे मामलों में प्रक्रिया नियमों के मुताबिक क्यों न हो?
  • जस्टिस बागची: कोई भी शक्ति पूरी तरह खुली नहीं हो सकती। चुनाव आयोग भी बिना रोक-टोक के अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकता।
  • EC की तरफ से वकील राकेश द्विवेदी: धारा 21(3) चुनाव आयोग को एक अलग और स्वतंत्र शक्ति देती है। यह सामान्य संशोधन से अलग है।
  • CJI: अगर धारा 21(2) में नियमों का पालन जरूरी है, तो 21(3) में आयोग खुद को अपनी ही प्रक्रिया से कैसे बाहर कर सकता है?
  • जस्टिस बागची:फॉर्म-6 में 7 दस्तावेज मांगे जाते हैं, लेकिन SIR में 11 दस्तावेज क्यों? क्या आयोग मनमाने ढंग से दस्तावेज जोड़-घटा सकता है?
  • द्विवेदी: कानून आयोग को कुछ लचीलापन देता है। लेकिन हम मनमानी नहीं कर सकते। हमें कोर्ट को दिखाना होगा कि प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी है।
  • CJI: मतदान का अधिकार संविधान से जुड़ा है। कोई भी प्रक्रिया संविधान के खिलाफ नहीं हो सकती।
  • जस्टिस बागची:फिर दोहराता हूं, कोई भी शक्ति निरंकुश नहीं हो सकती।
  • द्विवेदी: हम संविधान के अनुच्छेद 326 का पूरी तरह पालन करेंगे। चुनाव आयोग तानाशाही तरीके से काम नहीं कर सकता।
  • कोर्ट: मामले की सुनवाई पूरी नहीं हुई। सुनवाई गुरुवार को फिर जारी रहेगी।
  • 20 जनवरीः चुनाव आयोग बोला- सभी राज्यों की SIR प्रोसेस अलग

    चुनाव आयोग ने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन(SIR) प्रक्रिया में जिनके नाम कटे हैं, अभी तक किसी की तरफ से कोई शिकायत नहीं मिली है। आयोग ने कहा कि पश्चिम बंगाल जैसे किसी एक मामले के तथ्यों को उठाकर उन्हें किसी दूसरे राज्य की SIR प्रक्रिया पर लागू करना गलत होगा, क्योंकि हर जगह प्रक्रिया अलग रही है।

  • 19 जनवरी: सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल के वोटर्स को नाम जुड़वाने का एक और मौका दिया

    सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के 1.25 करोड़ वोटर्स को अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए एक और मौका दिया। कहा कि वे 10 दिन में अपने डॉक्यूमेंट्स चुनाव आयोग को पेश करें। कोर्ट ने कहा चुनाव आयोग गड़बड़ी वाली वोटर लिस्ट ग्राम पंचायत भवन, ब्लॉक कार्यालय और वार्ड कार्यालय में सार्वजनिक तौर पर लगाए, ताकि लोगों को पता चल सके।

  • 15 जनवरी: चुनाव आयोग ने कहा था- हम देश निकाला नहीं दे रहे

    चुनाव आयोग ने SC में कहा था- SIR के तहत आयोग सिर्फ यह तय करता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में रहने के योग्य है या नहीं। इससे सिर्फ नागरिकता वेरिफाई की जाती है। SIR से किसी का डिपोर्टेशन (देश से बाहर निकालना) नहीं होता, क्योंकि देश से बाहर निकालने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है।

    6 जनवरी: चुनाव आयोग ने कहा- लिस्ट को सही रखना हमारा काम

    चुनाव आयोग (EC) ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उसे वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेसिव रिविजन (SIR) कराने का पूरा अधिकार है। आयोग ने यह भी बताया कि उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है कि कोई भी विदेशी नागरिक वोटर लिस्ट में शामिल न हो।

    आयोग की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने कहा कि संविधान के अनुसार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और जज जैसे सभी प्रमुख पदों पर नियुक्ति के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य शर्त है।

  • 26 नवंबर: चुनाव आयोग बोला- राजनीतिक पार्टियां डर का माहौल बना रहीं

    सुप्रीम कोर्ट में 26 नवंबर को SIR के खिलाफ दायर तमिलनाडु, बंगाल और केरल की याचिका पर सुनवाई हुई थी। इस दौरान चुनाव आयोग ने कहा- SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दल जानबूझकर डर का माहौल बना रही हैं।

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