राज्यों के अधिकारों के लिए केंद्र पर दबाव बनाने को एकजुट होंगे क्षेत्रीय दल, पंजाब के पूर्व CM बादल करेंगे अगुवाई
शिरोमणि अकाली दल ने देश की क्षेत्रीय पार्टियों को एकजुट करने की पहल की है। ये पार्टियां राज्यों के अधिकारों के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी कर रहे हैं। क्षेत्रीय पार्टियों की दिल्ली में बैठक की अध्यक्षता प्रकाश सिंह बादल करेंगे।
चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने राज्यों और केंद्र के अधिकारों को लेकर देश की क्षेत्रीय पार्टियों को एकजुअ करने की अपनी महिम को तेज कर दिया है। कभी एनडीए का सबसे पुराना साथी रहा शिरोमणि अकाली दल केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा बनाने को सबसे आगे होकर काम कर रहा है। दो साल से सियासी तौर पर लगभग निष्क्रिय रहे पंजाब केपांच बार मुख्यमंत्री रह चुके प्रकाश सिंह बादल इन क्षेत्रीय दलों की अगुवाइ्र करने की तैयारी में हैं। वह नए साल में देश के विभिन्न क्षेत्रीय दलों को एक साथ लाने के लिए सक्रिय होंगे। इस संबंध में देश के क्षेत्रीय दलों की बैठक इसी महीने दिल्ली में होने की संभावना है।
बादल की अगुआई में होने वाली बैठक का एजेंडा केंद्र का हस्तक्षेप रोकना
पूर्व मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रहे हरचरण बैंस ने इसकी पुष्टि की है। भाजपा से अलग होने के बाद से पार्टी लगातार देश के क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने में लगी हुई है। पूर्व सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा, राज्य सभा सदस्य बलविंदर सिंह भूंदड़ और पूर्व मंत्री सिकंदर सिंह मलूका की शिअद की कमेटी ने तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी, शिवसेना के उद्धव ठाकरे, एनसीपी के नेता शरद पवार, बीजू जनता दल के नेता नवीन पटनायक आदि से बैठक की है। शिअद नेताओं ने दावा किया कि इन सभी पार्टी के नेताओं का कहना था कि प्रकाश सिंह बादल क्षेत्रीय दलों की अगुवाई करें।
शिरोमणि अकाली दल के आरोप- राज्यों के सभी अधिकार छीन रहा है केंद्र
हरचरण बैंस ने कहा कि शिअद देश में संघीय ढांचे को मजबूत करने के पक्ष में है। पार्टी चाहती है कि सरकारिया आयोग की सिफारिशों के अनुसार ही केंद्र और राज्य सरकार में संबंध हों। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने धीरे-धीरे करके राज्यों की वित्तीय स्वायतत्ता छीन ली है। आयकर और सर्विस टैक्स तो पहले से ही केंद्र के पास थे अब जीएसटी के जरिए बची खुची स्वायतता भी छीन ली है। इसीलिए बादल अब राज्यों की तुलना नगर पालिकाओं से करते हैं।
उन्होंने कहा कि अब राज्यों को अपने अधिकार की राशि के लिए भी केंद्र से मिन्नतें करनी पड़ रही हैं। राज्यों के अधिकार के विषय में भी केंद्र अब हस्तक्षेप करके कानून बना रहा है। मौजूदा तीन कृषि कानून उसी रूप में आए हैं। उन्होंने कहा कि पहले केंद्र सरकार समवर्ती सूची में विषय को डाल लेती है फिर उस पर अपना कानून बना लेती है जबकि सरकारिया आयोग ने कहा था कि समवर्ती सूची में कानून बनाने का अधिकार बराबर होना चाहिए अगर केंद्र और राज्य में विरोध है तो सुप्रीम कोर्ट फैसला करे कि कौन सा कानून लागू होगा। हरचरण बैंस ने कहा कि हालात तो ऐसे हैं कि हम किसी आइएएस, आइपीएस अफसर को काम करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते और न ही उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं।