अमित शाह से मिले नोएल टाटा, एन चंद्रशेखरन:केंद्र ने कहा- घरेलू झगड़े जल्द सुलझाएं, ₹16 लाख करोड़ के ग्रुप पर असर न हो

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन समेत टाटा ग्रुप (Tata Grop Fued) के शीर्ष अधिकारियों ने गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। यह मीटिंग बोर्ड अपॉइंटमेंट्स और गवर्नेंस के मुद्दों पर ट्रस्टियों के बीच चल रही खींचतान के बीच हुई। सरकार टाटा ग्रुप के भीतर तनाव का जायजा लेने के लिए तैयार है।

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टाटा संस की बोर्ड सीट को लेकर हुए विवाद के बीच कल यानी, 7 अक्टूबर को सीनियर लीडरशिप ने गृहमंत्री अमित शाह के घर पर 45 मिनट की मीटिंग की। एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने कहा कि घरेलू झगड़े को जल्द निपटा लिया जाए, ताकि कंपनी पर असर न हो।

मीटिंग में गृहमंत्री शाह, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के साथ टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, वाइस-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन और ट्रस्टी डेरियस खंबाटा शामिल हुए। अब टाटा ट्रस्ट्स बोर्ड की 10 अक्टूबर को मीटिंग होगी।

अभी टाटा संस के बोर्ड में 4 सीटें खाली हैं। बोर्ड में नटराजन चंद्रशेखरन, नोएल एन टाटा, वेणु श्रीनिवासन, हरीश मैनवानी और सौरभ अग्रवाल शामिल हैं। टाटा संस की मार्च 2024 तक मार्केट वैल्यू ₹27.85 लाख करोड़ थी। पूरे ग्रुप की वैल्यू करीब ₹15.9 लाख करोड़ है।

टाटा ग्रुप का पूरा विवाद

  • ये पूरा झगड़ा टाटा ट्रस्ट्स की 11 सितंबर को हुई मीटिंग से शुरू हुआ। इसमें टाटा संस के बोर्ड पर पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह को नॉमिनी डायरेक्टर के तौर पर दोबारा अपॉइंट करने पर बात होनी थी। लेकिन मीटिंग में सिंह नहीं आए। टाटा ट्रस्ट्स के सिंह समेत कुल सात ट्रस्टी हैं।
  • टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा के 9 अक्टूबर 2024 को निधन के बाद ट्रस्ट्स ने फैसला लिया था कि टाटा संस बोर्ड पर नॉमिनी डायरेक्टर्स को 75 साल की उम्र के बाद हर साल दोबारा अपॉइंट करना पड़ेगा। 77 साल के सिंह 2012 से ये रोल निभा रहे थे।
  • री-अपॉइंटमेंट का ये रेजोल्यूशन नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन ने रखा था। लेकिन बाकी चार लोग- मेहली मिस्त्री, प्रामित झावेरी, जहांगीर एचसी जहांगीर और डेरियस खंबाटा ने साफ मना कर दिया। चूंकि ये चारों मेजॉरिटी में थे तो रेजोल्यूशन रद्द हो गया।
  • इसके बाद इन ट्रस्टीज ने मेहली मिस्त्री को ही टाटा संस बोर्ड पर नॉमिनी के तौर पर प्रपोज करने की कोशिश की। लेकिन नोएल टाटा और श्रीनिवासन ने रोक दिया। मीटिंग खत्म होते ही सिंह ने टाटा संस बोर्ड से खुद ही इस्तीफा दे दिया।
  • मेहली मिस्त्री के नेतृत्व वाले चार ट्रस्टी शापूरजी पलोनजी फैमिली से जुड़े हैं। इस फैमिली की टाटा संस में 18.37% हिस्सेदारी है। पीटीआई के मुताबिक, मेहली ने महत्वपूर्ण फैसलों से बाहर रखे जाने पर नाराजगी जताई है। झगड़े का केंद्र टाटा संस में डायरेक्टरशिप के पद हैं।
  • टाटा संस में 4-6% हिस्सेदारी बेच सकता है SP ग्रुप

    उधर, टाटा और शापूरजी पलोनजी (SP) ग्रुप के बीच सुलह का रास्ता भी साफ होता नजर आ रहा है। हाल की घटनाओं से वाकिफ हाई-लेवल सोर्सेज बता रहे हैं कि टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस SP ग्रुप को टाटा संस में 4-6% स्टेक डाइल्यूशन ऑफर करने को तैयार हैं।

    अगर ये डील पक्की हो गई, तो SP ग्रुप को कर्ज चुकाने के लिए पैसे मिल लजाएंगे। ये ग्रुप अभी करीब 30,000 करोड़ रुपए के कर्ज में है।

नई दिल्ली। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन समेत टाटा ग्रुप (Tata Group Feud) के टॉप अधिकारियों ने मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की। बोर्ड अपॉइंटमेंट्स और गवर्नेंस के मुद्दों पर ट्रस्टियों के बीच चल रही खींचतान के बीच यह मुलाकात हुई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, नोएल टाटा और चंद्रशेखरन, टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन और ट्रस्टी डेरियस खंबाटा के साथ, शाम को शाह के आवास पर बैठक के लिए पहुँचे, जिसमें सीतारमण भी शामिल हुईं।

क्या रहा मीटिंग का एजेंडा

इससे पहले खबर आई थी कि सरकार टाटा ग्रुप के भीतर तनाव का जायजा लेने के लिए तैयार है और मंत्रियों का एक ग्रुप टाटा ग्रुप के लीडर्स से मिलकर अंदरूनी कलह और टाटा संस की लिस्टिंग योजनाओं पर चर्चा करने की योजना बना रहे हैं।

यह बैठक टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टियों के बीच गवर्नेंस और बोर्ड अपॉइंटमेंट्स को लेकर आंतरिक कलह की वजह से हुई है। यह एक ऐसा विवाद है जो 180 अरब डॉलर से ज्यादा के इस ग्रुप के कामकाज को प्रभावित कर सकता है।

 

 

मेहली मिस्त्री के हथ में एक गुट की कमान

टाटा ट्रस्ट्स, जिसकी टाटा संस में लगभग 66% हिस्सेदारी है, नमक से लेकर सेमीकंडक्टर तक के कारोबार वाले ग्रुप में महत्वपूर्ण प्रभाव रखता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रस्ट्स में काफी मतभेद हो गए हैं। एक गुट नोएल टाटा के साथ है, जिन्होंने रतन टाटा के निधन के बाद चेयरमैन का पद संभाला और दूसरा गुट मेहली मिस्त्री के नेतृत्व में है, जिनके शापूरजी पलोनजी परिवार के साथ घनिष्ठ संबंध हैं।

शापूरजी पलोनजी परिवार की टाटा संस में लगभग 18.37% हिस्सेदारी है। मिस्त्री को लगता है कि उन्हें प्रमुख चर्चाओं से बाहर रखा गया है।

ये है विवाद की असल वजह

विवाद की असल वजह टाटा संस के बोर्ड में सीटों का आवंटन है, जो 157 साल पुराने ग्रुप को मैनेज करता है। इस ग्रुप में 30 लिस्टेड एंटिटीज समेत लगभग 400 कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा पूर्व रक्षा सचिव विजय सिंह को टाटा संस के नॉमिनी डायरेक्टर पद से हटाए जाने का तरीका एक विवादास्पद मुद्दा रहा है।

वेणु श्रीनिवासन और नोएल टाटा ने इस बात का किया विरोध

वेणु श्रीनिवासन और नोएल टाटा ने सिंह को हटाने और ट्रस्टी मेहली मिस्त्री की बोर्ड में प्रस्तावित नियुक्ति का विरोध किया। मिस्त्री की नियुक्ति का ट्रस्टी प्रमित झावेरी, डेरियस खंबाटा और जहांगीर जहांगीर ने सपोर्ट किया। यह स्पष्ट नहीं है कि बैठक के बाद से ट्रस्टियों के रुख में कोई बदलाव आया है या नहीं। टाटा ट्रस्ट्स की एक नई बैठक 10 अक्टूबर को निर्धारित है।

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