अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- केशव मौर्य स्टैंड नहीं ले सके:उनमें विवेक नहीं; सरकार अहंकार त्याग देती तो ये सब न होता

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अगर कोई कहे कि हमें भेजा जाएगा, तब हम जाएंगे, तो इसका मतलब है कि उसमें स्वयं का विवेक नहीं है। विवेकशील व्यक्ति परिस्थिति को देखकर स्वयं निर्णय लेता है। यहां पर सरकार के प्रतिनिधियों को अपना स्पष्ट स्टैंड लेना चाहिए था, जो वे नहीं ले पाए। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि सनातन का अपमान करने वाली सरकारें दोबारा नहीं लौटतीं, लेकिन प्रयागराज में ब्रह्मचारी, बटुक, साधु, गृहस्थ, संगम स्नान करने वालों का अपमान किया गया। शंकराचार्य स्वयं सनातनी हैं, तो उनका अपमान सीधे-सीधे सनातन का अपमान है। यदि सरकार अहंकार त्यागकर समय रहते अपनी भूल सुधार लेती, तो यह स्थिति ही नहीं होती।

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यह बातें प्रयागराज में प्रवास के बाद काशी वापस आए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मीडिया से कहीं। वो माघ मेले में धरने के दौरान डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की टिप्पणी पर बोल रहे थे। डिप्टी सीएम ने कहा था कि मुख्यमंत्रीजी ने संज्ञान लिया है। मुझे जब बात करने के लिए कहा जाएगा, जरूर करूंगा। मैं प्रार्थना कर सकता हूं। चरणों में शीश झुका सकता हूं।

सपा मुखिया अखिलेश यादव के बयान पर शंकराचार्य ने कहा कि जब स्वयं राजनीतिक नेता इस घटना को अनिष्टकारी बता रहे हैं, तो यह स्पष्ट है कि मामला केवल धार्मिक नहीं, बल्कि शासन और संवेदनशीलता से भी जुड़ा है।

इसके अलावा, अविमुक्तेश्वरानंद ने संगम स्नान न कर पाने को अनिष्टकारी और अकल्पनीय बताया। कहा- 11 दिनों तक लगातार अवसर दिए जाने के बावजूद गलती न सुधारना दुर्भाग्यपूर्ण है। सनातन परंपरा में यज्ञ तब तक पूर्ण नहीं माना जाता, जब तक पूर्णाहुति न हो। यह माना जाता था कि शंकराचार्य के स्नान के साथ ही समस्त सनातन धर्मियों का स्नान पूर्ण होता है। इस बार पूर्णाहुति नहीं हुई। 3 तस्वीरें देखिए…

काशी के मठ में शंकराचार्य ने पूजन के बाद प्रसाद बांटा।
काशी के मठ में शंकराचार्य ने पूजन के बाद प्रसाद बांटा।
दर्शन को आए श्रद्धालुओं से गोहत्या के खिलाफ आंदोलन में साथ देने को कहा।
दर्शन को आए श्रद्धालुओं से गोहत्या के खिलाफ आंदोलन में साथ देने को कहा।
शंकराचार्य ने श्रद्धालुओं से भेंट की, बोले-प्रयागराज में सनातन का अपमान हुआ।
शंकराचार्य ने श्रद्धालुओं से भेंट की, बोले-प्रयागराज में सनातन का अपमान हुआ।

यूजीसी का नया एक्ट समाज को लड़ाने वाला है

काशी आगमन पर उन्होंने मठ में विधिवत दर्शन-पूजन किया। इस दौरान संत समाज के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक भी हुई। इसमें गोरक्षा आंदोलन और हालिया घटनाक्रमों पर गंभीर चर्चा हुई।

यूजीसी (UGC) से जुड़े विवाद पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह किसी एक पार्टी का मुद्दा नहीं, बल्कि समाज को आपस में लड़ाने वाला विषय है। एक जाति को दूसरी जाति के सामने खड़ा कर देना, उन्हें आपस में लड़ाना, यह हिंदू समाज को कमजोर करने का रास्ता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मंचों से एक बात कही जाती है और व्यवहार में ठीक उसका उलटा किया जाता है। मंच से कहा जाता है ‘बंटोगे तो कटोगे’, लेकिन व्यवहार में बांटने और काटने की मशीनें लाई जा रही हैं।

सरकारें गोहत्या बंद करने के लिए गंभीर नहीं

शंकराचार्य ने कहा कि केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर सरकारें गोहत्या बंद करने के लिए गंभीर नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग गौ-हत्या का मुद्दा उठाते हैं, उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया जाता है। शंकराचार्य ने साफ शब्दों में कहा कि सनातन परंपरा किसी सरकार, किसी नेता या किसी राजनीतिक दल से संचालित नहीं होती।

शंकराचार्य ने कहा- हमारी आवाज बंद करने की कोशिश की जाएगी, लेकिन हम रुकेंगे नहीं। गोमाता की रक्षा के लिए जो कदम हमने आगे बढ़ाया है, उसमें अब हर सनातनी को जुड़ना होगा। कौन सरकार है, कौन मुख्यमंत्री है, कौन नेता है, कौन पार्टी है, यह हम नहीं देख रहे।

शंकराचार्य बोले-गौहत्यारों के खिलाफ हम बुलडोजर बनकर खड़े होंगे।
शंकराचार्य बोले-गौहत्यारों के खिलाफ हम बुलडोजर बनकर खड़े होंगे।

कहने से पाकिस्तानी नहीं होंगे, सिद्ध करना होगा

शंकराचार्य ने बताया कि विश्व हिंदू रक्षा परिषद (वीएचआरपी) जैसे संगठनों ने रायबरेली में उनके खिलाफ पोस्टर लगाए, जिनमें उन्हें कलयुगी रावण और पाकिस्तानी एजेंट तक कहा गया। इन आरोपों को सिद्ध करना पड़ेगा। केवल बोल देने से कुछ नहीं होता। हम जो कहते हैं, उसके पीछे प्रमाण और तर्क देते हैं।

शंकराचार्य ने माघ मेले के दौरान बवाल पर कहा कि जो कुछ हुआ, उसका पूरा सच आज भी सामने नहीं आया है। जनता ने घटना का केवल एक अंश देखा है। अगर पूरा वीडियो सामने आता, तो तस्वीर बिल्कुल अलग होती।

उन्होंने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि घटना के बाद न तो ठोस जांच हुई और न ही न्याय होता दिखा। एक पुलिसकर्मी को डांट पड़ी, एक सस्पेंड हुआ—क्या यही न्याय है? क्या कोई स्वतंत्र जांच दल गठित हुआ?”

केंद्र और राज्य सरकार की चुप्पी पर नाराजगी

केंद्र के हस्तक्षेप को लेकर पूछे गए सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि जब गलत होता है, तब ऊपर-नीचे का भेद समाप्त हो जाता है। उस समय जो सही होता है, वह सही बोलता है और जो गलत होता है, वह गलत। लेकिन यहां कोई बोल ही नहीं रहा।

उन्होंने बताया कि घटना के बाद वे 11 दिनों तक शांति और धैर्य के साथ वहीं बैठे रहे, इस उम्मीद में कि कोई सुधारात्मक कदम उठाया जाएगा। हम साक्षी थे। हमें लगा कि शायद यह स्थानीय स्तर पर हुई नासमझी होगी, लेकिन इतने बड़े मामले के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।”

शंकराचार्य ने कहा कि चारों पीठ के शंकराचार्य में कोई मतभेद नहीं है, सब एक साथ हैं।
शंकराचार्य ने कहा कि चारों पीठ के शंकराचार्य में कोई मतभेद नहीं है, सब एक साथ हैं।

चारों शंकराचार्यों को लेकर भ्रम पर दिया जवाब

चारों पीठों के शंकराचार्यों की एकता को लेकर उठ रहे सवालों पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि चारों शंकराचार्य अलग-अलग हैं, जबकि वास्तविकता इसके ठीक विपरीत है।

उन्होंने कहा कि चारों शंकराचार्य सदा से एक हैं। ये कब अलग थे? जो लोग कहते हैं कि चारों शंकराचार्य एक नहीं हैं, वे गलत संदेश फैला रहे हैं। अभी जो घटनाएं हुईं, उनमें चारों शंकराचार्य एक ही थे। कोई अलग नहीं था। उन्होंने यह भी साफ किया कि शंकराचार्य सनातन परंपरा में सर्वोच्च स्थान रखते हैं। उनकी भूमिका को कम करके नहीं आंकी जानी चाहिए।

महाराष्ट्र विमान हादसे की जांच हो, भ्रम न रहे

महाराष्ट्र अजित पवार की विमान हादसे में मौत पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि ऐसी दुखद घटनाओं की निष्पक्ष और गंभीर जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जांच का स्वरूप ऐसा हो जिससे सच्चाई सामने आए और किसी भी तरह की आशंका या भ्रम की स्थिति न बने।

अब तक क्या हुआ, जानिए-

  • 18 जनवरी को माघ मेले में स्नान के लिए जा रहे अविमुक्तेश्वरानंद की पुलिस ने पालकी रोकी। विरोध पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई, शिखा पकड़कर घसीटने का आरोप लगा। इसके बाद शंकराचार्य शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। 11 दिनों तक शिविर में प्रवेश नहीं किया।
  • प्रशासन ने दो दिनों में दो नोटिस जारी कर शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा, जिनका अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब दिया। सीएम योगी ने बिना नाम लिए ‘कालनेमि’ कहा, जिससे विवाद और गहरा गया। जवाब में अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी की तुलना औरंगजेब से कर दी।
  • शंकराचार्य विवाद पर संत समाज दो हिस्सों में बंट गया, जबकि तीनों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में थे। शंकराचार्य की मांग थी कि प्रशासन माफी मांगे, तभी वह स्नान करेंगे। शंकराचार्य के समर्थन में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने 26 जनवरी को इस्तीफा दे दिया। 24 घंटे बाद सीएम के समर्थन में अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार ने रिजाइन कर दिया।
  • 28 जनवरी को अविमुक्तेश्वरानंद ने ​​​​​​प्रयागराज माघ मेला छोड़ दिया। वह काशी के लिए रवाना हो गए। इससे पहले उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए ही विदा ले रहे हैं।
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