पंजाब में 11 दिसंबर को प्राइवेट अस्पतालों में मेडिकल सेवाएं होंगी बंद, देंगे सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं

आयुर्वेद के पीजी डॉक्टरों को जनरल सर्जरी की परमिशन का विरोध, सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआईएम) की तरफ से आयुर्वेदिक के पीजी स्टूडेंट्स और डॉक्टरों को जनरल सर्जरी, ईएनटी और दांतों के इलाज सहित 58 तरह की सर्जरी की मंजूरी देने का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने पंजाब में विरोध शुरू कर दिया है। सीसीआईएम ने आयुर्वेदिक के पीजी डॉक्टरों व स्टूडेंट्स को शल्य और शालाक्य चिकित्सा के अधीन नाक, कान, आंख और गले से जुड़ी बीमारियों का इलाज व सर्जरी करने का नोटिफिकेशन जारी किया है जिसके बाद यह विरोध बढ़ गया है।

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चडीगढ़/बठिंडा। सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआईएम) की तरफ से आयुर्वेदिक के पीजी स्टूडेंट्स और डॉक्टरों को जनरल सर्जरी, ईएनटी और दांतों के इलाज सहित 58 तरह की सर्जरी की मंजूरी देने का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने पंजाब में विरोध शुरू कर दिया है। सीसीआईएम ने आयुर्वेदिक के पीजी डॉक्टरों व स्टूडेंट्स को शल्य और शालाक्य चिकित्सा के अधीन नाक, कान, आंख और गले से जुड़ी बीमारियों का इलाज व सर्जरी करने का नोटिफिकेशन जारी किया है जिसके बाद यह विरोध बढ़ गया है। आईएमए पंजाब के आह्वान पर बठिंडा जिला इकाई के जिला प्रधान डा. विकास छाबड़ा की अगुवाई में हुई

मीटिंग में 11 दिसंबर को पूरे बठिंडा के निजी अस्पतालों में सेहत सेवाएं ठप रखने का एलान किया गया है। ऐसे में 11 दिसंबर को निजी अस्पतालों में सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं ही चलेंगी जिसमें जिले के करीब 120 अस्पतालों के 600 डाक्टर्स व करीब 10 हजार नर्सिंग स्टाफ प्रदर्शन में शामिल होंगे। वहीं नेशनल इंटाग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन के पंजाब प्रेसिडेंट डा. परविंदर बजाज के अनुसार उनके ग्रेजुएट्स व पोस्ट ग्रेजुएट्स आम लोगों के डाक्टर्स हैं, लेकिन हमारे ही लोग हमें अपना दुश्मन समझना शुरू कर देते हैं जबकि हम कम दाम पर बेहतर इलाज मुहैया करवा रहे हैं।

सरकार व सीसीआईएम की हिदायतों से मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़-डा. विकास छाबड़ा
आईएमए बठिंडा के जिला प्रधान डा. विकास छाबड़ा ने कहा कि आयुर्वेदिक डॉक्टर नाक, कान, आंख और त्वचा से जुड़ी माइनर सर्जरियां और दांतों का इलाज कैसे कर सकते हैं, जबकि ये पूर्ण तौर पर एलोपैथी पर ही निर्भर करता है। दांतों के इलाज के लिए मार्केट में कई तरह की नई तकनीक आ गई हैं। ये मरीजों की सेहत के साथ सीधे खिलवाड़ होगा। सीसीआईएम ने आयुर्वेद के पीजी डॉक्टरों और स्टूडेंट्स को 58 तरह की सर्जरी की मंजूरी दी है, लेकिन क्या वह यह सब करने में समक्ष होंगे। डा. विकास छाबड़ा के अनुसार उनका किसी भी डॉक्टर से कोई मतभेद नहीं है, लेकिन आईएमए मिक्सोपैथी और क्रॉसुपैथी के हक में नहीं हैं। एक विद्यार्थी जो एक स्पेशल विषय में पढ़ाकर डाक्टर बना है, उसे उसी से संबंधित इलाज करना चाहिए, यही लोगों के हित में है। इसलिए 11 दिसंबर को निजी अस्पताल हड़ताल पर जा रहे हैं।

प्राइवेट के मुकाबले सस्ता इलाज करवाते हैं मुहैया, आईएमए का विरोध गैरजरुरी-डा. परविंदर बजाज

नेशनल इंटाग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (निम्मा) के पंजाब प्रेसिडेंट डा. परविंदर बजाज ने आईएमए के 11 दिसंबर के विरोध पर कहा कि हमारे ग्रेजुएट्स व पोस्ट ग्रेजुएट्स आम लोगों के चिकित्सक हैं,। इनके क्लिनिक करोड़ों खर्च से शुरू होते हैं जबकि हम कुछ लाख में ही इसे चलाते हैं। इसी बात से हमारा इलाज भी सस्ता रहता है। हमारे ग्रेजुएट्स नहीं, बल्कि पीजी डाक्टर्स यह सर्जरी करेंगे। बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में पिछले करीब 25 साल से जनरल सर्जरी व ईएनटी सर्जरी की कक्षाएं इकट्ठी लग रही हैं। हमारे काम करने से फायदा होगा। पंजाब आयुर्वेदिक एंड यूनानी 1963 एक्ट के 19 डी क्लाज में जरूरत पड़ने पर हम मॉडर्न मेडिसन का भी उपयोग कर सकते हैं। एक्ट के अनुसार हम एलोपैथिक दवा अपने मरीजों को देने को रख सकते हैं। हमारे कालेजों में एमडी व पीएचडी लेवल के टीचिंग स्टाफ है तो किसी को दिक्कत नहीं होनी चाहिए। यह विरोध गैर-जरूरी है।

बठिंडा ही नहीं पूरे पंजाब में दोनों संगठनों ने तर्क के आधार पर बताया एक दूसरे को गलत

वही जालंधर में भी इस बाबत विरोध शुरु हो गया है। सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआईएम) की तरफ से आयुर्वेदिक के पीजी स्टूडेंट्स और डॉक्टरों को जनरल सर्जरी, ईएनटी और दांतों के इलाज की मंजूरी देने का इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और इंडियन डेंटल एसोसिएशन (आईडीए) जालंधर ने विरोध किया है। इस संबंध में आईएमए और आईडीए की जालंधर इकाई की तरफ से आईएमए हाउस में संयुक्त मीटिंग की गई। दरअसल सीसीआईएम ने आयुर्वेदिक के पीजी डॉक्टरों व स्टूडेंट्स को शल्य और शालाक्य चिकित्सा के अधीन नाक, कान, आंख और गले से जुड़ी बीमारियों का इलाज व सर्जरी करने का नोटिफिकेशन जारी किया है।

डॉक्टर दहिया बोले- 11 दिसंबर को निजी अस्पतालों में ओ कोविड और इमरजेंसी के मरीजों का ही किया जाएगा इलाज

मीटिंग के दौरान दोनों एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इस नोटिफिकेशन का विरोध करते कहा कि आयुर्वेदिक डॉक्टर नाक, कान, आंख और त्वचा से जुड़ी माइनर सर्जरियां और दांतों का इलाज कैसे कर सकते हैं, जबकि ये पूर्ण तौर पर एलोपैथी पर ही डिपेंड करता है। वहीं दांतों के इलाज के लिए मार्केट में कई तरह की नई तकनीकें आ गई हैं। इन हालातों में आयुर्वेद के डॉक्टर अगर मरीजों का इलाज करते हैं तो ये मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ होगा। इसी के साथ उन्होंने 11 दिसंबर को निजी अस्पतालों में नॉन कोविड सेवाएं बंद करने का भी एलान किया है।

हम मिक्सोपैथी और क्रॉसुपैथी : आईएमए
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पंजाब प्रधान डॉ. नवजोत सिंह दहिया का कहना है कि हमारा किसी भी डॉक्टर के साथ मतभेद नहीं है। हम मिक्सोपैथी और क्रॉसुपैथी के हक में नहीं हैं। डॉक्टर ने जिस स्पेशलिटी में पढाई की है, वह उसी से संबंधित इलाज करे। वहीं काउंसिल की नोटिफिकेशन के विरोध में 11 दिसंबर को निजी अस्पतालों में सामान्य मरीजों का इलाज नहीं होगा। केवल इमरजेंसी सेवाएं ही दी जाएंगी। इसके अलावा कोरोना के मरीजों का इलाज होगा।

11 दिसंबर को आयुर्वेदिक डॉक्टर 1 घंटा ज्यादा काम करेंगे : नीमा

नेशनल इंटेग्रेटिड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) के पंजाब प्रधान डॉ. परमिंदर बजाज का कहना है कि हमारे जितने भी स्टूडेंट्स वर्तमान समय में पीजी की पढ़ाई कर रहे हैं उन्हें एलोपैथी और मेडिसन के पीएचडी स्तर के डॉक्टर पढ़ा रहे हैं। वहीं नीमा के डॉक्टर 11 दिसंबर को एक घंटा अतिरिक्त काम करेंगे और संबंधित जिलों के एसडीएम और उच्चाधिकारियों को सरकार द्वारा दी गई आयुर्वेद के डॉक्टरों को मंजूरी के लिए धन्यवाद कहेंगे।

क्या है शल्य और शालाक्य चिकित्सा

बता दें कि सीसीआईएम ने आयुर्वेद के पीजी डॉक्टरों और स्टूडेंट्स को 58 तरह के इलाज करने की मंजूरी दी गई है। आयुर्वेद में ग्रेजुएशन के बाद पीजी में दो प्रकार की पढ़ाई होती है। नोटिफिकेशन के मुताबिक भी इलाज को दो श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें शल्य और शालाक्य चिकित्सा शामिल है।

आयुर्वेदिक डॉक्टरों (Ayurveda Doctor) को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. आयुर्वेद की डिग्री प्राप्त डॉक्टर अब जनरल और ऑर्थोपेडिक सर्जरी के साथ ही आंख, कान और गले की सर्जरी (Surgery) भी कर सकेंगे. भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (Central Council of Indian Medicine) के मुताबिक सरकार से हरी झंडी मिलने के बाद पीजी के स्टूडेंट्स को सर्जरी के बारे में गहन जानकारी दी जाएगी.

बता दें कि आयुर्वेद के स्टूडेंट्स को अभी सर्जरी के बारे में पढ़ाया तो जाता था, लेकिन वो सर्जरी कर सकते हैं या नहीं इसको लेकर कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं थी. सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के बाद अब आयुर्वेद के डॉक्टर भी सर्जरी कर सकेंगे. सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक आयुर्वेद के पीजी के छात्रों को आंख, नाक, कान, गले के साथ ही जनरल सर्जरी के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा.सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक इन छात्रों को ग्लुकोमा, मोतियाबिंद हटाने, स्तन की गांठों, अल्सर और पेट से बाहरी तत्वों की निकासी जैसा कई सर्जरी करने का अधिकार होगा.

देश में सर्जन की कमी को किया जा सकेगा दूर
केंद्र सरकार के आयुर्वेद के पूर्व सलाहकार डॉ. एस.के. शर्मा ने सरकार के इस फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए मील का पत्थर बताया है. उन्होंने कहा कि देश इस समय सर्जन की कमी झेल रहा है. सरकार के इस फैसले से देश में सर्जन की कमी को दूर किया जा सकेगा. इसके साथ ही दूरदराज इलाकों के मरीजों को शहर भागने की जरूरत नहीं होगी और उन्हें अपने क्षेत्र में ही उच्च स्तर का इलाज मिल सकेगा.
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