भागीरथपुरा मामले में अफसरों पर गाज: सिसोनिया-श्रीवास्तव निलंबित, CM के निर्देश के बाद हटाए गए निगम आयुक्त यादव
भागीरथपुरा हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त निर्णय लिया है। इंदौर नगर निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और पीएचई के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, आयुक्त नगर निगम दिलीप यादव को हटाने के निर्देश दिए हैं।
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हुए हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक्शन में आ गए हैं। इंदौर नगर निगम के प्रशासनिक ढांचे में बदलाव के बाद उन्होंने अधिकारियों पर सख्त एक्शन लिया है। सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री ने लिखा कि इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण हुई घटना में राज्य सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। इस संबंध में कठोर निर्णय लिए जा रहे हैं। उन्होंने लिखा कि इंदौर नगर निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया, पीएचई के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है। वहीं, इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव को हटाकर मंत्रालय में पदस्थ करने के निर्देश दिए गए। बता दें सिसोनिया को इंदौर से भोपाल ट्रांसफर कर मंत्रालय में उप सचिव बनाया गया था। इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतों के मामले में नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव और एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। एडिशनल कमिश्नर सिसोनिया को इंदौर से हटा दिया गया है। इंचार्ज सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव से जल वितरण कार्य विभाग का प्रभार वापस ले लिया है।
सिसोनिया को किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग में उप सचिव के पद पर भेजा गया है। खरगोन जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकाश सिंह और आलीराजपुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर सिंह को इंदौर नगर निगम का अपर आयुक्त बनाया गया है। इंदौर उप परिवहन आयुक्त आशीष कुमार पाठक को भी निगम में अपर आयुक्त पद पर नियुक्त किया गया है।
इससे पहले, मध्य प्रदेश सरकार ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश कर दी, इसमें दूषित पानी से सिर्फ 4 मौत होने की बात कही है।
सरकार की रिपोर्ट तब आई है, जब मृतकों के परिजन और अस्पतालों के जरिए 15 मौतों की जानकारी सामने आ चुकी है। सभी को उल्टी-दस्त और पेट दर्द की शिकायत के बाद भर्ती कराया गया था। कुछ को बुखार भी था। इनमें 5 महीने के मासूम बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं।
हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 6 जनवरी को हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख 6 जनवरी तय की है। वहीं, इंटर विनर (हस्तक्षेप कर्ता) गोविंद सिंह बैस की ओर से मीडिया में रिपोर्ट पब्लिश करने पर रोक लगाने की मांग की गई। इस पर कोर्ट ने कोई टिप्पणी नहीं की।
बता दें कि इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसके लिए दो सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है।
राहुल बोले- जहर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा- इंदौर में पानी नहीं, जहर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं और ऊपर से BJP नेताओं के अहंकारी बयान। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी, सरकार ने घमंड परोस दिया।
लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की। फिर भी सुनवाई क्यों नहीं हुई? सीवर पीने के पानी में कैसे मिला? समय रहते सप्लाई बंद क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी? ये ‘फोकट’ सवाल नहीं, ये जवाबदेही की मांग है।
राहुल ने लिखा- साफ पानी अहसान नहीं, जीवन का अधिकार है और इस अधिकार की हत्या के लिए BJP का डबल इंजन, उसका लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह जिम्मेदार है। मध्य प्रदेश अब कुप्रशासन का एपिसेंटर बन चुका है।
खरगे बोले- मोदीजी हमेशा की तरह मौतों पर मौन हैं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया पोस्ट कर कहा- जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान का ढिंढोरा पीटने वाले नरेंद्र मोदी जी, हमेशा की तरह इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों को लेकर मौन हैं।
यह वही इंदौर शहर है, जिसने केंद्र सरकार के स्वच्छ सर्वेक्षण में लगातार आठवीं बार सबसे स्वच्छ शहर का खिताब जीता है। ये शर्मनाक बात है कि यहां पर भाजपा के निकम्मेपन के चलते लोग साफ पानी के मोहताज हैं।
11 साल से देश केवल लंबे-चौड़े भाषण, झूठ-प्रपंच, खोखले दावे, डबल-इंजन की डींगें सुन रहा है। जब मंत्री जी से सवाल पूछा जाता है तो वो गाली-गलौज पर उतर आते हैं। सत्ता के अहंकार में उल्टा पत्रकार पर हावी हो जाते हैं।
भाजपा सरकारों के कुशासन पर पूरी मशीनरी पर्दा डालने में जुट जाती है। मोदी सरकार और भाजपा ने न देश को साफ पानी मुहैया कराया है और न ही स्वच्छ हवा। आम जनता भुगत रही है।
पूर्व सीएम उमा बोलीं- घटना ने पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा किया
अपने आधिकारिक X अकाउंट पर पूर्व सीएम उमा भारती ने लिखा- साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारे प्रदेश, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गईं। प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का अवॉर्ड प्राप्त करने वाले नगर में इतनी बदसूरती, गंदगी, जहर मिला पानी कितनी जिंदगियों को निगल गया और निगलता जा रहा है, मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है।
उमा ने आगे लिखा- जिंदगी की कीमत दो लाख रुपए नहीं होती, क्योंकि उनके परिजन जीवन भर दुःख में डूबे रहते हैं। पीड़ितजन से माफी मांगनी होगी। नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी अपराधी हैं, उन्हें अधिकतम दंड देना होगा। यह मोहन यादव जी की परीक्षा की घड़ी है।
दूषित पानी से मौतों के मामले में इंदौर नगर निगम में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की गई है। इंदौर नगर निगम के एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया को हटाकर किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग में उप सचिव के पद पर भेजा गया है। खरगोन जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी आकाश सिंह और आलीराजपुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर सिंह को इंदौर नगर निगम का अपर आयुक्त बनाया गया है। इंदौर उप परिवहन आयुक्त आशीष कुमार पाठक को भी निगम में अपर आयुक्त पद पर नियुक्त किया गया है।
दूषित पानी से जान गंवाने वाली गीता बाई की शव यात्रा शुक्रवार करीब 3 बजे निकाली गई। उनके पति राजू ने कहा- मेरी पत्नी की तबीयत 23 दिसंबर को बिगड़ी थी। रात में उसने करीब 50 बार उल्टी की होगी। 24 दिसंबर को अस्पताल ले गए। वहां इंजेक्शन और बॉटल चढ़ा रहे थे। कोई सही इलाज नहीं हो रहा था। दो दिन पहले ही उसकी मौत हो गई थी, लेकिन उसको वेंटिलेटर पर रख दिया था। पत्नी को अस्थमा था। दवाइयां चल रही थीं। वो मेरे साथ हर दिन काम पर भी जाती थी। ऐसी कोई गंभीर समस्या नहीं थी।
भाजपा सरकार प्रदेश की जनता को ज़हर देने पर उतारू हो गई है। हालात इतने गंभीर हैं कि पानी के टैंकरों पर साफ़ लिखा है “पीने योग्य नहीं”, फिर भी खुलेआम जनता को वही ज़हरीला पानी पिलाया जा रहा है। यह शासन की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।
करोड़ों रुपये के बजट और विकास के बड़े-बड़े… pic.twitter.com/PbgF5vDvq5
— Umang Singhar (@UmangSinghar) January 2, 2026
गीता के बेटे अप्पू ने कहा- मेरी मां की जान दूषित पानी की वजह से हुई है।
इंदौर नगर निगम कमिश्नर दिलीप यादव ने कहा- वे पॉइंट हमने आईडेंटिफाई किए हैं, जहां से दूषित पानी पेयजल की पाइपलाइन में मिल रहा है। भागीरथपुरा में चौकी के पास बने शौचालय के अलावा 2000 से अधिक चैंबर हैं, सभी की जांच पड़ताल की जा रही है। जहां भी सीवेज के चेंबर के नीचे से पानी की पाइपलाइन क्रॉस हो रही है, उसे दुरुस्त किया जा रहा है। इसमें एक-दो दिन और लगेंगे, इसीलिए भागीरथपुरा में टैंकर से पानी सप्लाई किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों को पानी उबालकर ही पीने के लिए हम लगातार अनाउंसमेंट करा रहे हैं। स्थिति नॉर्मल होने में एक-दो दिन लगेंगे।
यादव ने कहा- भागीरथपुरा में पेयजल पाइपलाइन 1997 में बनी थी। इसको चेंज करने के लिए टेंडर की फाइल बनी थी लेकिन उसका काम अमृत योजना के तहत किया जाना था इसलिए उस काम को नहीं किया गया था। जो भी शिकायतें आ रही थीं, हमारी टीम लगातार उन पर काम कर रही थी।