अमेरिका ने बलूच आर्मी पर बैन का प्रस्ताव वीटो किया:UN में PAK-चीन को तगड़ा झटका, अमेरिका ने प्रस्ताव रोका; पिछले महीने US ने ही आतंकी संगठन घोषित किया था
अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और उसकी आत्मघाती यूनिट मजीद ब्रिगेड पर बैन के प्रस्ताव पर रोक लगा दी है।
इस प्रस्ताव को पाकिस्तान और चीन ने मिलकर सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक में रखा था। दोनों देशों ने BLA को प्रतिबंधित संगठन घोषित करने की मांग की थी।
UNSC की बैठक में पाकिस्तान ने दावा किया कि BLA, मजीद ब्रिगेड, अल-कायदा और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान जैसे आतंकी संगठन अफगानिस्तान की जमीन से काम कर रहे हैं और सीमा पार हमले कर रहे हैं।
उसने आरोप लगाया है कि अफगानिस्तान से फैल रहा आतंकवाद पाकिस्तान की सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती है।
अमेरिका के साथ ब्रिटेन और फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया है। इससे पहले अमेरिका ने ही पिछले महीने BLA और मजीद ब्रिगेड को विदेशी आतंकी संगठन (FTO) घोषित किया था।
चीन-पाकिस्तान को बड़ा झटका: BLA पर संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका ने लगाया वीटो : संयुक्त राष्ट्र में चीन और पाकिस्तान को करारा झटका लगा है। पाकिस्तान की लंबे समय से कोशिश थी कि बलूचिस्तान में सक्रिय बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) को संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध सूची में शामिल कराया जाए। लेकिन इस बार अमेरिका ने प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया।
दरअसल, पाकिस्तान ने दावा किया था कि अफगानिस्तान में BLA और उसके जैसे संगठनों के करीब 60 ठिकाने मौजूद हैं और ये पाकिस्तान में आ*तंकी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार हैं। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि BLA को आ*तंकवादी संगठन घोषित करना ज़रूरी है। लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने पाकिस्तान की दलील को ठुकरा दिया और कहा कि BLA का सीधा संबंध अलकायदा या ISIS जैसी नेटवर्क से नहीं है।
इस फैसले के बाद संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान और उसके हमेशा के साथी चीन दोनों को बड़ा झटका लगा है। चीन इसलिए भी परेशान है क्योंकि बलूचिस्तान में उसके चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के कई प्रोजेक्ट लगातार BLA के हमलों का शिकार होते रहे हैं। चीन चाहता था कि BLA पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बने, लेकिन अमेरिका ने साफ संदेश दिया कि वह पाकिस्तान के हर दावे पर आंख मूंदकर भरोसा करने को तैयार नहीं है।

US बोला- BLA के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं
अमेरिका ने कहा है कि BLA को अल-कायदा से जोड़ने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। इस वजह से इसे संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध सूची में नहीं डाला जा सकता। इस सूची में आने पर किसी भी संगठन पर यात्रा प्रतिबंध, संपत्ति फ्रीज और हथियार खरीदने पर रोक लग जाती है।
पिछले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा था कि BLA ने 2024 में कराची एयरपोर्ट के पास और ग्वादर पोर्ट अथॉरिटी कॉम्प्लेक्स में आत्मघाती हमलों की जिम्मेदारी ली थी।
मार्च 2025 में जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाईजैक करने की भी जिम्मेदारी ली थी, जिसमें 31 नागरिक और सुरक्षाकर्मी मारे गए थे। 300 से अधिक यात्रियों को बंधक बनाया गया था।

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी क्या है
बलूचिस्तान में कई लोगों का मानना है कि भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद वे एक आजाद देश के तौर पर रहना चाहते थे। लेकिन बिना उनकी मर्जी से उन्हें पाकिस्तान में शामिल कर दिया गया था। ऐसा नहीं हुआ इस वजह से बलूचिस्तान में सेना और लोगों का संघर्ष आज भी जारी है।
BBC के मुताबिक बलूचिस्तान में आजादी की मांग करने वाले कई संगठन हैं मगर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) सबसे ताकतवर संगठन है। ये संगठन 70 के दशक में अस्तित्व में आया लेकिन 21वीं सदी में इसका प्रभाव बढ़ा है।
BLA बलूचिस्तान को पाकिस्तानी सरकार और चीन से मुक्ति दिलाना चाहता है। उनका मानना है कि बलूचिस्तान के संसाधनों पर उनका हक है। पाकिस्तान सरकार ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को 2007 में आतंकी संगठनों की सूची में शामिल किया था।

सी साल मई में जब बलूच राष्ट्रवादी नेताओं ने बलूचिस्तान की आजादी की घोषणा की तो इसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर नए सिरे से खींचा। बलूचिस्तान की आजादी के लिए संघर्ष कर रहे नेताओं ने बलूचिस्तान गणराज्य की स्थापना का ऐलान किया और इसे पाकिस्तान के खिलाफ अपने दशकों पुराने संघर्ष में एक महत्वपूर्ण मोड़ बताया था। लेकिन अब चार महीने के भीतर ही बलूच आंदोलन को बड़ा झटका लगा है। अमेरिका ने बलूच विद्रोही समूह बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) को आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है।
बलूचिस्तान में आजादी आंदोलन की कहानी
बलूचिस्तान के आजादी आंदोलन में बीएलए की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही है और इसका प्रभाव भी बड़ा है। ऐसे में बीएलए को आतंकवादी संगठन घोषित करने से बलूच स्वतंत्रता आंदोलन को नुकसान पहुंचने की आशंका गलत नहीं है। ऐतिहासिक रूप में बलूच आंदोलन की जड़ें 1947 में जाती हैं, जब भारत के विभाजन के बाद पाकिस्तान का निर्माण हुआ। वर्तमान बलूचिस्तान का अधिकांश भाग उस समय कलात रियासत के अंदर आता था। ब्रिटिश भारत के विभाजन के बाद कलात रियासत ने खुद को आजाद घोषित कर दिया था। हालांकि, 1948 मे इसे पाकिस्तान में मिला लिया, जिसे बलूच नेता और इतिहासकार जबरन और नाजायज मानते हैं।
उसके बाद से बलूचिस्तान में पाकिस्तान की संघीय सरकार के खिलाफ पांच बड़े विद्रोह हुए हैं। विद्रोह का सबसे ताजा चरण 2003 में शुरू हुआ जो अभी जारी है। पाकिस्तानी सेना ने इस आंदोलन को दबाने के लिए क्रूर दमनकारी नीतियों का सहारा लिया, लेकिन यह दबने के बजाय लगातार आगे बढ़ता गया। हालांकि, शुरुआत में इसका नेतृत्व कबीलाई सरदारों के हाथों में रहा, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें छात्रों और युवाओं की बढ़ती भागीदारी ने इसे मध्यमवर्गीय आंदोलन में बदल दिया है।
बलूच नेताओं का घोषणापत्र
14 मई 2025 को बलूच नेताओं ने एक घोषणापत्र जारी कर बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में अंतरराष्ट्रीय मान्यता देने की मांग की और नागरिकों की सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र शांति सेना का आह्वान किया। बलूच स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े नेतृत्व ने जिन्ना हाउस को बलूचिस्तान हाउस करने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए।
बलूचिस्तान में हिंसक संघर्ष
बलूचिस्तान में विद्रोही बलों ने इस साल की शुरुआत के बाद से पाकिस्तानी सैन्य बलों और नागरिकों पर कई बड़े हमले किए हैं, जिनमें 11 मार्च 2025 को क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस पर हमला सबसे प्रमुख है। विद्रोहियों ने यात्रियों से भरी ट्रेन को हाइजैक कर लिया था। इसके अलावा पाकिस्तानी सैनिकों के ऊपर बड़े हमले किए जिसमें सैकड़ों जवान मारे जा चुके हैं।
अमेरिकी बैन से कैसे निपटेगा आंदोलन?
बलूच नेताओं का कहना है कि उनका लक्ष्य शांतिपूर्ण मान्यता, बेहतर क्षेत्रीय सहयोग और दीर्घकालिक स्थिरता है। लेकिन बलूच आंदोलन के सबसे प्रमुख गुट को आतंकवादी गुट घोषित करने से इसे बड़ा झटका लगा है। अब देखना है कि बलूच आंदोलनकारी इस संकट से कैसे निपटते हैं और अंतरराष्ट्रीय समर्थन को बनाए रखने के लिए क्या करते हैं। आतंकवादी संगठन घोषित होने के बाद इसके समर्थकों के लिए विदेशों में समर्थन कार्यक्रम चलाना मुश्किल होने वाला है।