चंडीगढ़ । आखिर चंडीगढ़ में भी पटाखों की बिक्री और जलाने पर पूर्ण पाबंदी लग गई है। यूटी प्रशासन की डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की एग्जीक्यूटिव अथॉरिटी ने डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत यह फैसला लिया है। शुक्रवार को प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से मंजूरी मिलने के बाद प्रशासन ने यह फैसला लिया।
रोक के साथ पटाखे बिक्री के लिए जो 96 लाइसेंस जारी किए गए हैं उन्हें रद किया जाएगा। इन्हें रद करने की प्रक्रिया शुरू भी हो गई है। कोरोना महामारी को देखते हुए यूटी प्रशासन ने पटाखों पर रोक का निर्णय लिया है, इसलिए डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट का हवाला देते हुए ही यह आदेश जारी हुए हैं। अब बिक्री और जलाने पर रोक लगाने के लिए अलग-अलग टीमों का गठन होगा। पुलिस पाबंदी के बाद भी पटाखे जलाने या बेचने वालों पर कार्रवाई करेगी। इसके लिए तीनों एसडीएम और डीएसपी की ज्वाइंट कमेटी गठित होगी। इसकी पूरी रूपरेखा डीसी ऑफिस की तरफ से तैयार की जाएगी।
व्यापारी वर्ग नाराज
चंडीगढ़ प्रशासन के इस फैसले से पटाखे विक्रेता खासे नाराज हैं। वह चंडीगढ़ में बैन नहीं लगाने की उम्मीद लगा रहे थे। प्रशासन ने भले ही पटाखे अभी नहीं खरीदने की बात कह रखी थी, लेकिन पुराने विक्रेता पहले से ही पटाखों का स्टॉक खरीद चुके थे। यूटी क्रैकर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट देवेंद्र गुप्ता ने कहा कि इस फैसले से व्यापारियों का लाखाें रुपया डूब जाएगा।
प्रशासन को बैन लगाना था तो एक महीने पहले ही यह निर्णय ले लेना चाहिए था। दीपावली से एक सप्ताह पहले इस निर्णय का क्या मतलब है। व्यापारी पहले से लॉकडाउन की वजह से घाटे में है। दिवाली पर वह दो पैसे कमाने की आस लगाए बैठे थे। लेकिन अब उनका मोटा नुकसान हो जाएगा। पटाखे ऐसी चीज है जिसका भंडारण अगले साल तक नहीं किया जा सकता। इसको रखना खतरे से खाली नहीं होता। ऐसे में जिन्होंने पटाखे खरीद लिए हैं उनका क्या होगा।
कई राज्य पहले ही लगा चुके रोक
राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे कई राज्य पटाखों पर पहले से ही रोक लगा चुके हैं। यही वजह चंडीगढ़ के लिए भी बनी। कोरोना के मामले चंडीगढ़ में भी बढ़ रहे हैं। मामले दोबारा 24 घंटे में 100 तक पहुंच गए हैं। साथ ही प्रदूषण का स्तर भी बढ़ रहा है। हवा लगातार खराब हो रही है। इन दोनों चीजोंं को देखते हुए चर्चा यही हो रही है कि यूटी प्रशासन भी पटाखे जलाने पर रोक लगाई है।