Iran Unrest: ईरान संकट खत्म करने की कवायद तेज? नेतन्याहू से चर्चा कर पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति को मिलाया फोन

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच रूस ने कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। ईरान संकट को खत्म करने के लिए पुतिन ने कवायद तेज कर दी है। इसके लिए उन्होंने पहले इस्राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और फिर ईरान के राष्ट्रपति से फोन पर बातचीत की। रूस ने मध्यस्थता की पेशकश करते हुए कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया। आइए जानते हैं, पुतिन ने दोनों शीर्ष नेताओं ने क्या बात की।

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मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच रूस ने कूटनीतिक पहल तेज कर दी है। रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने पहले इस्राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की और इसके तुरंत बाद ईरान के राष्ट्रपति  से संपर्क साधा। क्रेमलिन के मुताबिक, पुतिन क्षेत्र में तनाव घटाने और स्थिरता बहाल करने के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयासों के पक्ष में हैं।

रूस का कहना है कि पुतिन मध्य पूर्व और ईरान से जुड़े हालात में तनाव कम करने के लिए सक्रिय रहेंगे। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि पुतिन क्षेत्रीय हालात को शांत करने की दिशा में प्रयास जारी रखेंगे। इससे पहले पुतिन ने नेतन्याहू से बातचीत में रूस की मध्यस्थता की पेशकश भी रखी और कहा कि सुरक्षा व स्थिरता के लिए राजनीतिक रास्ता ही बेहतर विकल्प है।

नेतन्याहू से बातचीत में क्या कहा गया?
नेतन्याहू से फोन पर बातचीत में पुतिन ने मध्य पूर्व और ईरान की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। क्रेमलिन के अनुसार, पुतिन ने स्पष्ट किया कि रूस क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को तेज करने के पक्ष में है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह के सैन्य टकराव से बचना सभी पक्षों के हित में होगा।

 

इस पहल के बड़े मायने क्या हैं?

 

  • रूस ने मध्यस्थ की भूमिका निभाने की पेशकश की।
  • राजनीतिक और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया गया।
  • क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को प्राथमिकता बताया गया।
  • सैन्य तनाव से बचने का स्पष्ट संदेश दिया गया।
  • दोनों पक्षों से सीधे संवाद कायम किया गया।

ईरान के राष्ट्रपति से संपर्क क्यों अहम है?
पुतिन का ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर संवाद इस बात का संकेत है कि रूस दोनों पक्षों ईरान और इस्राइल से सीधे बात कर रहा है। इसका उद्देश्य संवाद के जरिए गलतफहमियां कम करना और टकराव की आशंका को घटाना है। रूस का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सभी पक्षों को बातचीत की मेज पर लाना जरूरी है।

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