सऊदी में ऑयल रिफाइनरी पर हमला:UAE-कतर के तेल-गैस प्लांट पर भी ड्रोन अटैक; सऊदी बोला- ईरान सब्र का इम्तिहान न ले
अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के बीच सऊदी अरब के यनबू पोर्ट पर स्थित सैमरेफ ऑयल रिफाइनरी पर हवाई हमला हुआ है। इसके अलावा UAE और कतर के तेल-गैस प्लांट पर भी ड्रोन हमले हुए हैं। ईरान ने हाल ही में सऊदी अरब, UAE और कतर के तेल ठिकानों को खाली करने की वॉर्निंग दी थी।
सऊदी ने आज ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। सऊदी के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने कहा कि हमारे देश के पास ईरान को जवाब देने की पूरी ताकत है। ईरान के हमले पहले से प्लान किए गए लगते हैं और हमारे सब्र का इम्तिहान न लें।
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से अब ज्यादातर तेल यनबू पोर्ट से भेजा जा रहा है।

इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी 3 तस्वीरें…



रिपोर्ट- ट्रम्प को ईरानी ऊर्जा ठिकाने पर होने वाले हमले की जानकारी थी
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने बुधवार को कहा था कि ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर इजराइल के हमले के बारे में अमेरिका को ‘कुछ भी जानकारी नहीं थी’। यह दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार माना जाता है।
लेकिन इस दावे के उलट, हमले से जुड़े एक इजराइली सूत्र ने CNN को बताया कि यह हमला अमेरिका को बताकर किया गया था। वहीं, एक और अमेरिकी सूत्र ने भी कहा कि अमेरिका को इस हमले की जानकारी थी।
साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमले को युद्ध में बड़ा उकसावा (एस्केलेशन) माना जा रहा है। इससे पहले इजराइल, ईरान के कुछ एनर्जी डिपो पर हमले कर चुका था, लेकिन बुधवार तक उसने तेल और नैचुरल गैस से जुड़े ठिकानों को निशाना नहीं बनाया था।
पार्स गैस फील्ड पर हमले से नाराज ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के पड़ोसी देशों के बड़े ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया। कतर ने कहा कि उसके मुख्य ऊर्जा केंद्र रास लाफान में भारी नुकसान हुआ है।
इन जवाबी हमलों के कारण ऊर्जा की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि रास लाफान को हुआ नुकसान लंबे समय तक वैश्विक गैस की कमी पैदा कर सकता है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री बोले- शहीद सैनिकों के परिवारों ने कहा, पीछे न हटें
हेगसेथ ने कहा कि युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों के परिवारों ने सरकार से अपील की है कि इस लड़ाई को अधूरा न छोड़ा जाए और मिशन पूरा किया जाए।
उन्होंने बताया कि डोवर एयर फोर्स बेस पर शहीद सैनिकों के पार्थिव शरीर के आगमन के दौरान परिवारों ने उनसे कहा, “उनकी कुर्बानी का सम्मान करें, पीछे न हटें और जब तक काम पूरा न हो जाए, रुकें नहीं।”
हेगसेथ ने यह भी कहा कि युद्ध कब खत्म होगा, इसका फैसला केवल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ही करेंगे।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान की तुलना गाजा में हमास से करते हुए कहा कि ईरान ने सुरंगों, रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन पर भारी पैसा खर्च किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना इन सबको पूरी ताकत से निशाना बना रही है, जैसा दुनिया की कोई दूसरी सेना नहीं कर सकती।
हेगसेथ ने कहा कि अब तक अमेरिका, ईरान में 7,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमला कर चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि गुरुवार को अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जाएगा, जैसा कि एक दिन पहले भी हुआ था।
उन्होंने कहा, “हमारी ताकत लगातार बढ़ रही है, जबकि ईरान की ताकत कमजोर हो रही है। हमने ईरान की एयर डिफेंस सिस्टम को ‘पूरी तरह ध्वस्त’ कर दिया है।”
जर्मनी बोला- जंग खत्म होने के बाद ही मिडिल ईस्ट में शामिल होंगे
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि उनका देश तभी क्षेत्र में भूमिका निभाएगा, जब सैन्य कार्रवाई पूरी तरह खत्म हो जाएगी। ब्रसेल्स में यूरोपीय नेताओं की बैठक के दौरान मर्ज ने कहा, “हम तभी शामिल होंगे, जब बंदूकें शांत हो जाएंगी।”
उन्होंने साफ किया कि जर्मनी फिलहाल किसी सैन्य ऑपरेशन या होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के प्रयास में हिस्सा नहीं लेगा। मर्ज ने कहा कि भविष्य में अगर जरूरत पड़ी, तो जर्मनी समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है, लेकिन यह तभी संभव होगा जब संघर्ष खत्म हो जाए और अंतरराष्ट्रीय मंजूरी मिले।
ईरान में जासूसी के आरोप में 97 लोग गिरफ्तार
ईरान ने देश विरोधी गतिविधियों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 97 लोगों को गिरफ्तार किया है। ईरान के इंटेलिजेंस मंत्रालय के मुताबिक, गिरफ्तार लोगों पर अमेरिका और इजराइल के लिए काम करने का आरोप है। इनमें 13 कथित जासूस भी शामिल हैं, जिन्हें दक्षिण-पूर्वी ईरान से पकड़ा गया।
मंत्रालय ने दावा किया कि ये लोग देश में अशांति फैलाने और हिंसक घटनाओं को अंजाम देने की साजिश में शामिल थे। इसके अलावा, दक्षिण-पश्चिमी ईरान में इराक सीमा के पास पांच “हथियारबंद नेटवर्क” को भी खत्म करने का दावा किया गया है।
इससे पहले अलबोर्ज प्रांत में भी 41 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिन पर युद्ध से जुड़े वीडियो विदेशी नेटवर्क को भेजने का आरोप था।
कतर बोला- ईरानी हमलों के बावजूद एयर क्वालिटी सामान्य
ईरान-इजराइल जंग के बीच कतर पर हुए हमलों के बाद वहां की सरकार ने स्थिति पर अपडेट दिया है।
कतर के गृह मंत्रालय ने कहा कि रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी, अल धखीरा और अल खोर इलाकों में एयर क्वालिटी सामान्य स्तर पर बनी हुई है।
मंत्रालय के मुताबिक, इन इलाकों में हवा की गुणवत्ता की जांच सिविल डिफेंस काउंसिल द्वारा की गई और सभी संकेतक सुरक्षित पाए गए।
दरअसल, हाल ही में ईरान ने कतर के सबसे बड़े गैस हब रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल हमले किए थे, जिससे वहां ‘भारी नुकसान’ होने की खबरें सामने आई थीं।
ब्रिटेन में थोक गैस की कीमतें 130% बढ़ीं
ब्रिटेन में थोक गैस की कीमतें बढ़कर 171.34 पेंस प्रति थर्म (करीब 2.29 डॉलर) पहुंच गई हैं। इसकी वजह इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है।
यह स्तर जनवरी 2023 के बाद पहली बार देखा गया है। 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद से ब्रिटेन में गैस की कीमतें करीब 140 प्रतिशत बढ़ चुकी हैं। उस समय कीमत 71.13 पेंस प्रति थर्म (करीब 1.33 डॉलर) थी।
मिसाइल हमलों में कतर के रास लफ्फान एलएनजी कॉम्प्लेक्स के कुछ हिस्सों में आग लग गई, जिससे दुनिया के सबसे बड़े गैस हब में से एक को नुकसान पहुंचा है। ब्रिटेन अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर है, खासकर मध्य पूर्व और कतर से आने वाली गैस पर।
PM मोदी ने 24 घंटे में 4 राष्ट्राध्यक्षों से बातचीत की
पीएम मोदी ने गुरुवार को मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम से बात की। इसकी जानकारी उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर दी है।
दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट की गंभीर स्थिति पर भी चर्चा की और तनाव कम करने के साथ बातचीत और कूटनीति के जरिए जल्द शांति बहाल करने पर सहमति जताई। पीएम मोदी पिछले 24 घंटे में 4 राष्ट्राध्यक्षों से बातचीत कर चुके हैं। वे इससे पहले ओमान, कुवैत और फ्रांस के नेताओं से बातचीत कर चुके हैं।
पीएम मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मिडिल ईस्ट के हालात पर चर्चा की। इसकी जानकारी उन्होंने गुरुवार को एक्स पर पोस्ट कर दी।
उन्होंने कहा कि हालात को शांत करने और बातचीत व कूटनीति के रास्ते पर लौटना बहुत जरूरी है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दोनों देश क्षेत्र और दुनिया में शांति और स्थिरता के लिए आपसी सहयोग जारी रखेंगे।
पीएम मोदी ने ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से बातचीत की। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए है कि तनाव कम करने और शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देना जरूरी है।
मोदी ने हजारों लोगों, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, की सुरक्षित वापसी में ओमान के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि भारत और ओमान, होर्मुज स्ट्रेट के जरिए सुरक्षित और बिना रुकावट आवाजाही के पक्ष में हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि पीएम मोदी ने कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह से बुधवार रात बात की।
दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर बात की और हाल की घटनाओं पर चिंता जताई। प्रधानमंत्री ने कुवैत पर हुए हमलों की कड़ी निंदा भी की।
पीएम मोदी ने क्राउन प्रिंस से कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित और बिना रुकावट के जहाजों का निकलना भारत के लिए बहुत जरूरी है। दोनों नेताओं ने माना कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए लगातार बातचीत जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने कुवैत में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा के लिए क्राउन प्रिंस का धन्यवाद भी किया, क्योंकि वहां बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय रहता है।
भारतीय अधिकारी बोले- जंग की वजह से कई चुनौतियां आईं
भारत में विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के प्रमुख लव अग्रवाल ने फारस की खाड़ी के बंदरगाहों और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े हालात पर कहा कि इस इलाके की भौगोलिक स्थिति के कारण कई बड़ी चुनौतियां सामने आई हैं।
उन्होंने बताया जेबेल अली, हमद, बंदर अब्बास और फुजैराह जैसे बड़े पोर्ट एक साथ प्रभावित हुए। इसका असर यूरोप और अमेरिका जाने वाले माल पर भी पड़ा, क्योंकि जहाजों को लंबा रास्ता बदलकर जाना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि होर्मुज से गुजरने वाला ट्रांजिट भी कुछ समय के लिए रोक दिया गया, जिससे समस्या और बढ़ गई। मिडिल ईस्ट से उड़ानें भी या तो बंद कर दी गईं या बहुत कम कर दी गईं। इस वजह से व्यापार को माल डायवर्जन (रूट बदलने) जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यह दोहरी मार जैसी स्थिति थी, क्योंकि हवाई और समुद्री दोनों तरह के माल परिवहन पर असर पड़ा है।
ओमान बोला- ईरान से जंग ट्रम्प सरकार की सबसे बड़ी गलती
ओमान के विदेश मंत्री ने ईरान के साथ चल रही जंग को ट्रम्प सरकार की सबसे बड़ी गलती बताया है। विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने कहा है कि इस युद्ध का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा पर साफ दिखाई दे रहा है।
ब्रिटिश मैगजीन द इकनॉमिस्ट में लिखे अपने लेख में अलबुसैदी ने इस संघर्ष को ‘गैरकानूनी युद्ध’ बताया और अमेरिका के सहयोगी देशों से इसे खत्म कराने में मदद करने की अपील की। अलबुसैदी युद्ध शुरू हो ने से पहले अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने में अहम भूमिका निभा रहे थे।
उन्होंने कहा कि 28 फरवरी को जब बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी थी और शांति की उम्मीद नजर आ रही थी, तभी कुछ घंटों बाद ही इजराइल और अमेरिका ने फिर से सैन्य हमला कर दिया। यह चौंकाने वाली बात थी।
अलबुसैदी ने कहा कि खाड़ी देशों ने कई दशकों तक अमेरिका से हथियार खरीदे और उसके सैन्य ठिकानों को अपने यहां जगह दी। लेकिन अब तक जिस शांति और आर्थिक स्थिरता का ये देश फायदा उठा रहे थे, वह खतरे में पड़ गई है।
उन्होंने यहां तक कहा कि अमेरिका अपनी ही विदेश नीति पर कंट्रोल खो चुका है। अलबुसैदी ने जोर देकर कहा कि इस युद्ध को जल्द से जल्द खत्म किया जाना चाहिए, क्योंकि इसमें शामिल दोनों पक्षों (अमेरिका और ईरान) को इससे कोई फायदा नहीं होने वाला।