5 दिन बाद कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई शुरू:सरकार बोली- घबराकर बुकिंग न करें; दिल्ली के होटल–रेस्टोरेंट कचरे से बनी गैस इस्तेमाल करें

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सरकार ने 5 दिन बाद कमर्शियल LPG सिलेंडर पर लगी रोक हटा दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कमर्शियल सिलेंडर का वितरण शुरू कर दिया गया है। सरकार ने 9 मार्च को कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पर रोक लगाई थी।

वहीं, सिलेंडरों की कालाबाजारी और अवैध भंडारण को रोकने के लिए देशभर में छापेमारी तेज कर दी गई है। सरकार ने कहा है कि घरेलू उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है।

पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मिनिस्ट्री की जॉइंट सेक्रेटरी (मार्केटिंग और ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने कहा कि अब दिल्ली-NCR की इंडस्ट्रीज, होटल, रेस्टोरेंट और दूसरी संस्थाओं को एक महीने के लिए नेचुरल गैस की जगह बायोमास से बने पेलेट्स, खासकर रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (RDF) पेलेट्स के अस्थायी इस्तेमाल की मंजूरी दे दी गई है।

रोज 88 लाख लोग गैस बुकिंग कर रहे

  • पहले रोज करीब 55 लाख सिलेंडर की बुकिंग होती थी, जो अब बढ़कर करीब 88 लाख तक पहुंची।
  • कंपनियां रोज करीब 50 लाख सिलेंडर की डिलीवरी कर रही हैं।
  • दो सिलेंडर की डिलीवरी के बीच कम से कम 25 दिन और ग्रामीण इलाकों में 45 दिन का अंतर तय है।
  • भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल, 50% गैस और 60% LPG आयात करता है।
  • घरेलू उत्पादन पहले 10% फिर 25% बढ़ाया गया, अब इसे 31% तक बढ़ा दिया गया है।

सरकार बोली-दिल्ली के होटल–रेस्टोरेंट कचरे से बनी गैस इस्तेमाल करें

पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मिनिस्ट्री की जॉइंट सेक्रेटरी (मार्केटिंग और ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने कहा कि अब दिल्ली-NCR की इंडस्ट्रीज, होटल, रेस्टोरेंट और दूसरी संस्थाओं को एक महीने के लिए नेचुरल गैस की जगह बायोमास से बने पेलेट्स, खासकर रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (RDF) पेलेट्स के अस्थायी इस्तेमाल की मंजूरी दे दी गई है।

कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट यानी CAQM ने यह आदेश जारी किया है। रिफ्यूज-डिराइव्ड फ्यूल (RDF) असल में कचरे से बनाया गया एक तरह का ईंधन है। इसमें नगर निगम और इंडस्ट्रीज से निकलने वाले सूखे कचरे- जैसे प्लास्टिक, कागज, कपड़ा और लकड़ी को प्रोसेस किया जाता है।

सबसे पहले कचरे को छांटकर उसमें से ऐसी चीजें निकाली जाती हैं जो जल नहीं सकतीं (जैसे कांच या धातु) और फिर बाकी बचे हिस्से को मशीन से छोटे-छोटे टुकड़ों या पेलेट्स (गोलियों) में बदल दिया जाता है। इसका इस्तेमाल कोयले या नेचुरल गैस के विकल्प के रूप में फैक्ट्रियों, सीमेंट प्लांट और पावर प्लांट्स में ऊर्जा पैदा करने के लिए होता है, जिससे न सिर्फ कचरे का निपटारा होता है बल्कि प्रदूषण भी कम करने में मदद मिलती है।

LPG लेकर आ रहे दो भारतीय जहाजों ने होर्मुज रूट पार किया

खाड़ी देशों से LPG लेकर आ रहे दो भारतीय जहाज शनिवार सुबह सुरक्षित तरीके से होर्मुज रूट पार कर गए हैं। यह इलाका फिलहाल युद्ध की चपेट में है। शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने मीडिया को बताया कि LPG जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ अब गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाह की ओर बढ़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इन जहाजों में 92,700 टन LPG है और इनके 16 या 17 मार्च तक भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना है। माना जा रहा है कि इससे गैस की किल्लत कम हो सकती है। ये दोनों जहाज उन 24 जहाजों में शामिल थे, जो इस क्षेत्र में युद्ध शुरू होने के बाद से ही होर्मुज रूट के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए थे।

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