ईरान बोला-लेबनान में सीजफायर से पहले अमेरिका से बातचीत नहीं:ट्रम्प बोले- डील नहीं हुई तो फिर हमला करेंगे, जहाजों को हथियारों से लैस कर रहे

इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच अहम बैठक होने वाली है। लेकिन बैठक से पहले ही अनिश्चितता बनी हुई है क्योंकि ईरानी डेलिगेशन अब तक पाकिस्तान नहीं पहुंचा है।

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ईरान ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित बातचीत को लेकर सख्त शर्त रख दी है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा है कि जब तक लेबनान में सीजफायर लागू नहीं होता तब तक बातचीत शुरू नहीं होगी।

उन्होंने ईरान के फ्रीज किए गए फंड जारी करने की मांग की।गालिबाफ ने साफ किया कि ये दोनों मुद्दे वार्ता से पहले हल होना जरूरी हैं।

दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अगर डील नहीं होती, तो अमेरिका फिर हमला करेगा। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी युद्धपोतों को सबसे बेहतरीन हथियारों से लैस किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल किया जाएगा।

वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस बातचीत के लिए पाकिस्तान रवाना हो गए हैं। उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह ईमानदारी से बातचीत करेगा तो अमेरिका तैयार है, लेकिन ‘खेल’ करने की कोशिश पर सख्त जवाब दिया जाएगा।

इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच अहम बैठक होने वाली है। लेकिन बैठक से पहले ही अनिश्चितता बनी हुई है क्योंकि ईरानी डेलिगेशन अब तक पाकिस्तान नहीं पहुंचा है।

अमेरिका-ईरान के बीच इन मुद्दों पर बातचीत होनी है

  • ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम- अमेरिका का कहना है कि ईरान में कोई संवर्धन नहीं होगा। ईरान को अपना सारा हाई-लीवल इनरिच्ड यूरेनियम बाहर करना होगा और न्यूक्लियर फैसिलिटीज बंद या सीमित करनी होंगी।
  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज- दुनिया का बहुत सारा तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान अभी भी इसका नियंत्रण रखना चाहता है और टोल (फीस) लेने की बात कर रहा है। वहीं, अमेरिका चाहता है कि रास्ता पूरी तरह खुला और सुरक्षित हो, बिना किसी रुकावट या फीस के।
  • बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम- अमेरिका ईरान की लंबी दूरी की मिसाइलों पर रोक लगाना चाहता है।
  • सैंक्शंस हटाना- ईरान चाहता है कि सभी अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध तुरंत हटा दिए जाएं, फ्रोजन एसेट्स वापस मिलें और मुआवजा भी मिले।

पाकिस्तानी पीएम शरीफ बोले- अमेरिका-ईरान वार्ता की मेजबानी करना गर्व का पल

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेजबानी करना सिर्फ पाकिस्तान के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे मुस्लिम दुनिया के लिए गर्व का पल है। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक अवसर बताया और कहा कि यह पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका को दर्शाता है।

शरीफ ने कहा कि जो पक्ष पहले युद्ध जैसी स्थिति में आमने-सामने थे, वे अब बातचीत के जरिए अपने मतभेद सुलझाने पर सहमत हुए हैं। उनके अनुसार यह शांति और संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो क्षेत्र में स्थिरता और बेहतर संबंधों की उम्मीद बढ़ाता है।

ट्रम्प बोले- ईरान के पास बातचीत करने के अलावा कोई रास्ता नहीं

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान को यह समझ नहीं आ रहा है कि उसके पास अब कोई मजबूत विकल्प नहीं बचा है। ट्रम्प के मुताबिक ईरान फिलहाल सिर्फ होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल करके दुनिया पर थोड़े समय के लिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।

ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि ईरान के पास इस समय बातचीत करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। ईरान होर्मुज स्ट्रेट के जरिए थोड़े समय के लिए दुनिया से वसूली करने की कोशिश कर रहा है। ईरान अभी सिर्फ इसलिए सुरक्षित है क्योंकि वह बातचीत करना चाहता है।

ट्रम्प बोले- ईरान लड़ाई से ज्यादा ‘फेक न्यूज’ फैलाने में माहिर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर तंज कसते हुए कहा है कि वह लड़ाई से ज्यादा ‘फेक न्यूज’ फैलाने और पब्लिक रिलेशन संभालने में माहिर है।

ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि ईरान की असली ताकत युद्ध में नहीं, बल्कि अपनी छवि बनाने और मीडिया को संभालने में है।

ईरान बोला- अमेरिका लेबनान में सीजफायर लागू कराए

ईरान ने कहा है कि अमेरिका लेबनान में सीजफायर लागू कराए और अपने वादों को निभाए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि सीजफायर समझौते में लेबनान को भी शामिल किया जाना चाहिए और वहां जारी इजराइली हमले तुरंत रुकने चाहिए।

उन्होंने लेबनान में ईरान के नामित राजदूत मोहम्मद रजा शिबानी के साथ फोन पर बातचीत के दौरान यह मुद्दा उठाया। अराघची ने कहा कि इजराइल के हमले सीजफायर की भावना के खिलाफ हैं और इन्हें रोकना जरूरी है।

इससे पहले ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ भी साफ कर चुके हैं कि लेबनान में सीजफायर लागू होने तक अमेरिका के साथ बातचीत शुरू नहीं की जाएगी।

अमेरिका के साथ प्रस्तावित बातचीत से पहले ईरान ने सख्त चेतावनी दी है। ईरान की सशस्त्र सेनाओं ने कहा है कि उनकी उंगली ट्रिगर पर है और वे किसी भी स्थिति के लिए तैयार हैं।

सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल के बार-बार भरोसा तोड़े जाने के कारण यह सतर्कता बरती जा रही है। ईरान ने यह भी साफ किया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेगा, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है।

रिपोर्ट- भारत नेईरानी तेल टैंकरों को सिका पोर्ट पर लगने की इजाजत दी

भारत सरकार ने ईरानी तेल लेकर आ रहे चार जहाजों को गुजरात के सिका पोर्ट पर लगने की विशेष अनुमति दी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह फैसला रिलायंस इंडस्ट्रीज के अनुरोध पर लिया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, शिपिंग मंत्रालय ने काविज, लेनोर, फेलिसिटी और हेडी नाम के जहाजों को एक बार की छूट दी है। ये सभी जहाज ईरानी तेल लेकर आ रहे हैं और इनमें से कुछ ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा हैं।

यह फैसला होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से बनी आपात स्थिति के चलते लिया गया है। आमतौर पर 20 साल से ज्यादा पुराने जहाजों के लिए सख्त नियम होते हैं, लेकिन इस बार उनमें ढील दी गई है।

हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि रिलायंस इस तेल को प्रोसेस करेगा या नहीं, क्योंकि कंपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और भारतीय नियमों का पालन सुनिश्चित करना चाहती है।

भारत ने मई 2019 के बाद से ईरान से तेल आयात बंद कर रखा था, लेकिन हाल ही में अमेरिका से मिली अस्थायी छूट के बाद ऐसा हुआ है।

ईरानी दूतावास ने भारत में डोनेशन से जुड़े बैंक खाते बंद किए

भारत में ईरानी दूतावास ने डोनेशन से जुड़े अपने सभी बैंक खाते बंद करने का फैसला लिया है। दूतावास ने लोगों से अपील की है कि अब किसी भी खाते में पैसा ट्रांसफर न करें।

मार्च 2026 में मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच दूतावास ने भारत के लोगों से आर्थिक मदद मांगी थी। 14 मार्च को इसके लिए आधिकारिक बैंक खातों की जानकारी साझा की गई थी, ताकि युद्ध प्रभावित लोगों के लिए दवाइयां और जरूरी सामान खरीदा जा सके।

इस अपील पर बड़ी संख्या में भारतीयों ने सहयोग किया और दान भेजा। हालांकि, बाद में विदेश में सीधे फंड ट्रांसफर को लेकर नियमों की बाधाएं सामने आईं, जिससे प्रक्रिया मुश्किल हो गई। इसके साथ ही फर्जी खातों के जरिए धोखाधड़ी की आशंका भी बढ़ने लगी थी।

इन परिस्थितियों को देखते हुए दूतावास ने फैसला लिया कि अब आगे कोई दान नहीं लिया जाएगा। साथ ही पहले मिले पैसे का इस्तेमाल भारत में ही जरूरी सामान खरीदने में किया जाएगा।

दूतावास का कहना है कि यह कदम किसी भी तरह की गड़बड़ी या गलत लेनदेन से बचने के लिए उठाया गया है।

रिपोर्ट: ईरान से नागरिकों की रिहाई की मांग करेगा अमेरिका

ईरान के साथ होने वाली अहम बातचीत में अमेरिका अपने नागरिकों की रिहाई का मुद्दा उठा सकता है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता में यह मुद्दा शामिल होने की संभावना है।

व्हाइट हाउस और ईरान की ओर से इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

खामेनेई की याद में 40वें दिन भारत में श्रद्धांजलि कार्यक्रम

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के 40वें दिन नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस मौके पर दूतावास में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का झंडा फहराया गया। यह कार्यक्रम 40 दिन की शोक अवधि के तहत आयोजित किया गया, जो शिया परंपरा में खास महत्व रखता है।

ईरान खामेनेई की मौत को ‘शहादत’ के रूप में देख रहा है और देश के साथ-साथ विदेशों में भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले भी नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे और कंडोलेंस बुक में संदेश दर्ज किए थे।

रिपोर्ट: PAK पीएम की सोशल मीडिया पोस्ट अमेरिका ने तैयार कराई

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर खुलासा हुआ। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पोस्ट को तैयार करने में व्हाइट हाउस की सीधी भूमिका थी और पोस्ट करने से पहले मंजूरी भी दी गई थी।

इस पोस्ट में शरीफ ने ट्रम्प से ईरान के लिए तय डेडलाइन दो हफ्ते बढ़ाने की अपील की थी, ताकि कूटनीतिक प्रयास आगे बढ़ाए जा सकें।

उन्होंने ईरान से भी होर्मुज स्ट्रेट दो हफ्ते के लिए खोलने और सभी पक्षों से सीजफायर का पालन करने की अपील की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, यह डेडलाइन से पहले की आखिरी कोशिश थी, जब पाकिस्तान दोनों पक्षों के लिए समाधान का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा था।

शुरुआत में यह पोस्ट ड्राफ्ट हेडिंग के साथ शेयर हुआ था, जिससे विवाद खड़ा हो गया था, हालांकि व्हाइट हाउस ने साफ किया कि ट्रम्प ने इसे खुद नहीं लिखा। बाद में अमेरिका और ईरान दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमत हुए और इस्लामाबाद में बातचीत की योजना बनी, ताकि इस अस्थायी समझौते को स्थायी शांति में बदला जा सके।

इजराइली हमले से जुड़ी 3 तस्वीरें…

दक्षिणी लेबनान के बिंत जुबैल इलाके में गुरुवार को इजराइल के हमले के बाद उठता धुआं।
दक्षिणी लेबनान के बिंत जुबैल इलाके में गुरुवार को इजराइल के हमले के बाद उठता धुआं।
लेबनान की राजधानी बेरूत के अल-मजरा इलाके में गुरुवार को इजराइल ने एयरस्ट्राइक की।
लेबनान की राजधानी बेरूत के अल-मजरा इलाके में गुरुवार को इजराइल ने एयरस्ट्राइक की।
लेबनान में बाबदा इलाके में गुरुवार को इजरइली हमले के बाद धुआं उठता हुआ।
लेबनान में बाबदा इलाके में गुरुवार को इजरइली हमले के बाद धुआं उठता हुआ।
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