ऑपरेशन-सिंदूर में शहीद जवान की मां मेडल लेते बेहोश हुईं:बीकानेर से जयपुर आए जगुआर फाइटर जेट, सड़कों पर उतरे टैंक, ब्रह्मोस मिसाइल

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जयपुर की सड़कों पर ब्रह्मोस मिसाइल, भीष्म, अर्जुन टैंक, पिनाका लॉन्चर, रोबोटिक डॉग्स का प्रदर्शन किया गया। आसमान में अटैक हेलिकॉप्टर अपाचे ने दुश्मनों के होश उड़ाने वाले करतब दिखाए। नाल (बीकानेर) एयरबेस से उड़ान भरकर आए जगुआर फाइटर जेट की खूबियों से भी आमलोग रू-ब-रू हुए।

Army Day 2026 Parade Jaipur LIVE Video Update; CDS Anil Chauhan | Bhajan  Lal Sharma

आर्मी चीफ जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने बताया- पिछले कुछ सालों में भारतीय सेना की सोच में साफ बदलाव आया है। सेना अब सिर्फ मौजूदा चुनौतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के युद्धों की तैयारी पर भी गंभीरता से काम कर रही है। इसी दिशा में नए स्ट्रक्चर तैयार किए जा रहे हैं। उन्हें भविष्य की जरूरतों के अनुसार ट्रेन किया जा रहा है। इस परिवर्तन प्रक्रिया के तहत भैरव बटालियन, अग्नि प्लाटून्स, शक्ति बाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी जैसी नई इकाइयां खड़ी की गई हैं। इनकी झलक आर्मी डे परेड में देखने को मिली। उन्होंने बताया- ये संरचनाएं भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप एक रिस्पॉन्सिव और मिशन ओरिएंटेड सेना के निर्माण को दिखाती हैं।

जनरल द्विवेदी ने बताया- आज की परेड में दिव्यास्त्र और शक्ति बाण जैसी यूनिट्स की ताकत भी देखने को मिली। आधुनिक ड्रोन 400 मीटर से लेकर 400 किलोमीटर, यहां तक कि 800 किलोमीटर तक जाने की क्षमता रखते हैं। ऐसे ड्रोन पूरे युद्ध क्षेत्र में घूमकर जरूरत के मुताबिक स्ट्राइक करने, इन्फॉर्मेशन देने और कार्रवाई करने में सक्षम होते हैं। इसके लिए सेना को नए ऑर्गेनाइजेशन और सुपर स्पेशियलिटी ट्रेनिंग वाले जवानों की जरूरत है, जो टारगेट की पहचान, ऑपरेशन और अपने व दुश्मन के सैनिकों में फर्क कर सकें।

78वीं आर्मी डे परेड के समापन के बाद सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। आर्मी चीफ जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने कहा- युद्ध 4 दिन चलेगा या 4 साल, यह पहले से कोई नहीं बता सकता, इसका अंदाजा युद्ध क्षेत्र में ही लगता है। ऐसे में अगर देश को लंबी लड़ाई लड़नी है तो सेना का साजो-सामान देश में ही बनना चाहिए। जरूरत पड़ने पर उसकी रिपेयरिंग भी भारत में ही होनी चाहिए।

आर्मी एरिया से बाहर पहली बार आर्मी-डे परेड गुरुवार को जयपुर में हुई। जगतपुरा के महल रोड पर हजारों लोग इस कार्यक्रम के साक्षी बने।

उधर, ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए 1 पैरा स्पेशल फोर्स के जवान लान्स नायक प्रदीप कुमार की मां सेना मेडल लेते हुए मंच पर बेहोश हो गईं। इन्हें सैन्य अधिकारियों ने संभाला। उन्हें तुरंत मंच से उतारकर एंबुलेंस से हॉस्पिटल ले जाया गया।

सेना की आर्मी डे परेड महल रोड, जीवन रेखा हॉस्पिटल चौराहा से बॉम्बे हॉस्पिटल चौराहा तक तीन किलोमीटर में हुई। परेड को देखने डेढ़ लाख से ज्यादा लोग पहुंचे। 18 जगह पार्किंग व्यवस्था की गई थी।

जयपुर में हुई आर्मी-डे परेड के दौरान मेडल लेते शहीद की मां बेहोश हो गईं। आनन-फानन उन्हें एंबुलेंस से हॉस्पिटल पहुंचाया गया।
जयपुर में हुई आर्मी-डे परेड के दौरान मेडल लेते शहीद की मां बेहोश हो गईं। आनन-फानन उन्हें एंबुलेंस से हॉस्पिटल पहुंचाया गया।

परेड को आर्मी ऑफिसर्स लीड कर रहे थे परेड की शुरुआत ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए जवानों को सेना मेडल (वीरता) से सम्मानित करने के साथ हुई थी। इसके बाद गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित आर्मी ऑफिसर्स ने परेड कमांडर को सलामी दी। अशोक चक्र, परमवीर चक्र और महावीर चक्र से सम्मानित आर्मी ऑफिसर्स परेड को लीड कर रहे थे।

PHOTOS में देखिए आर्मी-डे परेड…

251 आर्मी एविएशन स्क्वॉड्रन की कैप्टन हंसजा शर्मा रूद्र हेलिकॉप्टर की पहली पायलट हैं। हंसजा के नेतृत्व में 'हेलिना' एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल का प्रदर्शन किया गया।
251 आर्मी एविएशन स्क्वॉड्रन की कैप्टन हंसजा शर्मा रूद्र हेलिकॉप्टर की पहली पायलट हैं। हंसजा के नेतृत्व में ‘हेलिना’ एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल का प्रदर्शन किया गया।
यह यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है। मल्टी कैलिबर रॉकेट प्लेटफॉर्म से 300 किमी की दूरी तक दुश्मन के ठिकानों को टारगेट करता है।
यह यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है। मल्टी कैलिबर रॉकेट प्लेटफॉर्म से 300 किमी की दूरी तक दुश्मन के ठिकानों को टारगेट करता है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के एयरक्राफ्ट और ड्रोन को मार गिराने के लिए अपग्रेडेड शिल्का का उपयोग किया गया था। यह स्वचालित एंटी एयरक्राफ्ट गन है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के एयरक्राफ्ट और ड्रोन को मार गिराने के लिए अपग्रेडेड शिल्का का उपयोग किया गया था। यह स्वचालित एंटी एयरक्राफ्ट गन है।
भारतीय सेना के एंटी टैंक सिस्टम की क्षमता को मजबूती प्रदान करता है। 4 किमी की दूरी से टारगेट को हिट करता है।
भारतीय सेना के एंटी टैंक सिस्टम की क्षमता को मजबूती प्रदान करता है। 4 किमी की दूरी से टारगेट को हिट करता है।
दुश्मन के एरियल खतरे और सामने से गोलीबारी से बचाते हुए सैनिकों को वॉर जोन में पहुंचाता है। रेगिस्तान, पहाड़ से लेकर तमाम दुर्गम इलाकों में यह कारगर है।
दुश्मन के एरियल खतरे और सामने से गोलीबारी से बचाते हुए सैनिकों को वॉर जोन में पहुंचाता है। रेगिस्तान, पहाड़ से लेकर तमाम दुर्गम इलाकों में यह कारगर है।
यह भारतीय सेना का सबसे एडवांस टैंक है। 125mm स्मूथ बोर गन से लैस यह टैंक चार प्रकार के गोला-बारूद दाग सकता है। 5 किमी दूरी तक मिसाइल दागने की क्षमता है।
यह भारतीय सेना का सबसे एडवांस टैंक है। 125mm स्मूथ बोर गन से लैस यह टैंक चार प्रकार के गोला-बारूद दाग सकता है। 5 किमी दूरी तक मिसाइल दागने की क्षमता है।
आत्मनिर्भर भारत के तहत अर्जुन टैंक को बनाया गया था। यह 120 मिली मीटर राइफल गन, 12.7 मिली मीटर एंटी एयरक्राफ्ट मशीन गन और 7.62 मिली मीटर एक्सल मशीनगन से लैस है।
आत्मनिर्भर भारत के तहत अर्जुन टैंक को बनाया गया था। यह 120 मिली मीटर राइफल गन, 12.7 मिली मीटर एंटी एयरक्राफ्ट मशीन गन और 7.62 मिली मीटर एक्सल मशीनगन से लैस है।
चाहे ऊंची पहाड़ी हो, उबड़-खाबड़ रास्ता, अचानक चढ़ाई या ढलान हो। हर तरह के दुर्गम रास्तों पर यह रोबोटिक डॉग आसानी से चल सकता है। यह सेंसर और कैमरों से लैस है।
चाहे ऊंची पहाड़ी हो, उबड़-खाबड़ रास्ता, अचानक चढ़ाई या ढलान हो। हर तरह के दुर्गम रास्तों पर यह रोबोटिक डॉग आसानी से चल सकता है। यह सेंसर और कैमरों से लैस है।
बीकानेर के नाल एयरबेस से उड़ान भरकर आए जगुआर फाइटर जेट ने जयपुर में हुए आर्मी-डे परेड में हिस्सा लिया।
बीकानेर के नाल एयरबेस से उड़ान भरकर आए जगुआर फाइटर जेट ने जयपुर में हुए आर्मी-डे परेड में हिस्सा लिया।
आर्मी-डे परेड में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान। वह सुबह करीब दस बजे जयपुर के महल रोड स्थित परेड में पहुंचे थे।
आर्मी-डे परेड में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान। वह सुबह करीब दस बजे जयपुर के महल रोड स्थित परेड में पहुंचे थे।
भारतीय सेना के लड़ाकू हेलिकॉप्टर सुबह करीब दस बजे जयपुर के महल रोड स्थित परेड में पहुंचे थे।
भारतीय सेना के लड़ाकू हेलिकॉप्टर सुबह करीब दस बजे जयपुर के महल रोड स्थित परेड में पहुंचे थे।
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