ऑपरेशन-सिंदूर में शहीद जवान की मां मेडल लेते बेहोश हुईं:बीकानेर से जयपुर आए जगुआर फाइटर जेट, सड़कों पर उतरे टैंक, ब्रह्मोस मिसाइल
जयपुर की सड़कों पर ब्रह्मोस मिसाइल, भीष्म, अर्जुन टैंक, पिनाका लॉन्चर, रोबोटिक डॉग्स का प्रदर्शन किया गया। आसमान में अटैक हेलिकॉप्टर अपाचे ने दुश्मनों के होश उड़ाने वाले करतब दिखाए। नाल (बीकानेर) एयरबेस से उड़ान भरकर आए जगुआर फाइटर जेट की खूबियों से भी आमलोग रू-ब-रू हुए।

आर्मी चीफ जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने बताया- पिछले कुछ सालों में भारतीय सेना की सोच में साफ बदलाव आया है। सेना अब सिर्फ मौजूदा चुनौतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के युद्धों की तैयारी पर भी गंभीरता से काम कर रही है। इसी दिशा में नए स्ट्रक्चर तैयार किए जा रहे हैं। उन्हें भविष्य की जरूरतों के अनुसार ट्रेन किया जा रहा है। इस परिवर्तन प्रक्रिया के तहत भैरव बटालियन, अग्नि प्लाटून्स, शक्ति बाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी जैसी नई इकाइयां खड़ी की गई हैं। इनकी झलक आर्मी डे परेड में देखने को मिली। उन्होंने बताया- ये संरचनाएं भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप एक रिस्पॉन्सिव और मिशन ओरिएंटेड सेना के निर्माण को दिखाती हैं।
जनरल द्विवेदी ने बताया- आज की परेड में दिव्यास्त्र और शक्ति बाण जैसी यूनिट्स की ताकत भी देखने को मिली। आधुनिक ड्रोन 400 मीटर से लेकर 400 किलोमीटर, यहां तक कि 800 किलोमीटर तक जाने की क्षमता रखते हैं। ऐसे ड्रोन पूरे युद्ध क्षेत्र में घूमकर जरूरत के मुताबिक स्ट्राइक करने, इन्फॉर्मेशन देने और कार्रवाई करने में सक्षम होते हैं। इसके लिए सेना को नए ऑर्गेनाइजेशन और सुपर स्पेशियलिटी ट्रेनिंग वाले जवानों की जरूरत है, जो टारगेट की पहचान, ऑपरेशन और अपने व दुश्मन के सैनिकों में फर्क कर सकें।
78वीं आर्मी डे परेड के समापन के बाद सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। आर्मी चीफ जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने कहा- युद्ध 4 दिन चलेगा या 4 साल, यह पहले से कोई नहीं बता सकता, इसका अंदाजा युद्ध क्षेत्र में ही लगता है। ऐसे में अगर देश को लंबी लड़ाई लड़नी है तो सेना का साजो-सामान देश में ही बनना चाहिए। जरूरत पड़ने पर उसकी रिपेयरिंग भी भारत में ही होनी चाहिए।
आर्मी एरिया से बाहर पहली बार आर्मी-डे परेड गुरुवार को जयपुर में हुई। जगतपुरा के महल रोड पर हजारों लोग इस कार्यक्रम के साक्षी बने।
उधर, ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए 1 पैरा स्पेशल फोर्स के जवान लान्स नायक प्रदीप कुमार की मां सेना मेडल लेते हुए मंच पर बेहोश हो गईं। इन्हें सैन्य अधिकारियों ने संभाला। उन्हें तुरंत मंच से उतारकर एंबुलेंस से हॉस्पिटल ले जाया गया।
सेना की आर्मी डे परेड महल रोड, जीवन रेखा हॉस्पिटल चौराहा से बॉम्बे हॉस्पिटल चौराहा तक तीन किलोमीटर में हुई। परेड को देखने डेढ़ लाख से ज्यादा लोग पहुंचे। 18 जगह पार्किंग व्यवस्था की गई थी।


परेड को आर्मी ऑफिसर्स लीड कर रहे थे परेड की शुरुआत ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए जवानों को सेना मेडल (वीरता) से सम्मानित करने के साथ हुई थी। इसके बाद गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित आर्मी ऑफिसर्स ने परेड कमांडर को सलामी दी। अशोक चक्र, परमवीर चक्र और महावीर चक्र से सम्मानित आर्मी ऑफिसर्स परेड को लीड कर रहे थे।
PHOTOS में देखिए आर्मी-डे परेड…










