बठिंडा नगर निगम चुनावों को लेकर हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई 3 फरवरी को होगी

-हाईकोर्ट ने वार्डबंदी संबंधी नगर निगम का पूरा रिकार्ड जमा करवाया वही दोनों पक्षों की आपत्ति पर विचार के लिए अगली तिथि निर्धित की गई

बठिंडा, 08 जनवरी : नगर निगम बठिंडा के वार्ड निर्धारण के मामले में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में वीरवार को सुनवाई की गई। इस मामले में दायर विभिन्न याचिकाओं पर वीरवार को पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी करने के बाद वार्डबंदी संबंधी रिकार्ड अपने पास जमा करवा लिया है।

वही अब इस मामले में अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है। इस सुनवाई में जहां नगर निगम की तरफ से बनाई वार्डबंदी पर सुनवाई होगी वही विभिन्न पक्षों की तरफ से रखी गई आपत्ति पर भी विचार किया जाएगा। पूर्व विधायक सरुपचंद सिंगला व कांग्रेस के बलजिंदर ठेकेदार की याचिका पर उच्च न्यायालय की दोहरी पीठ के न्यायाधीश कुलदीप तिवारी और रमेश कुमारी ने गुरुवार को सुनवाई की। सूचना के मुताबिक, याचिकाकर्ता स्वरूप चंद सिंगला ने अपनी याचिका के माध्यम से इस वार्ड निर्धारण को रद्द करने और नए सिरे से वार्ड निर्धारण कराने की मांग की है। दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी की ओर से मेयर का चुनाव लड़ चुके बलजिंदर सिंह ठेकेदार ने भी उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।

याचिका दायर करने वाले पक्ष का कहना है कि “यह वार्ड विभाजन एक राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाने के इरादे से किया गया है और बठिंडा की जनता का कोई पक्ष नहीं सुना गया है।” वही 23 दिसंबर को आपत्तियां आमंत्रित करने के लिए वार्ड विभाजन का एक अधूरा नक्शा जारी किया गया था, जिसमें किसी भी वार्ड की सीमा के संबंध में कोई भी गली/मोहल्ला छोड़ा नहीं गया था। इसी तरह, इसमें वार्डों में आने वाली कुल जनसंख्या और अनुसूचित जाति/बहुसंख्यक आबादी का उल्लेख नहीं किया गया था। अपनी याचिका में भाजपा के जिला शहरी प्रधान सरूपचंद सिंगला ने पंजाब सरकार के स्थानीय सरकार विभाग के सचिव, निदेशक, वार्ड परिसीमन बोर्ड, बठिंडा के उपायुक्त, बठिंडा के नगर आयुक्त और राज्य चुनाव आयोग के साथ-साथ बठिंडा शहरी निर्वाचन क्षेत्र के विधायक जगरूप सिंह गिल को भी पक्षकार बनाया है। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता बलजिंदर सिंह ठेकेदार की तरफ से से भी इस वार्डबंदी को चुनौती देते कहा है कि नगर निगम दफ्तर में आपत्तियों के लिए रखे गए वार्ड मैप में वार्डों की सीमा रेखाएं नहीं दिखाई गई हैं और न ही वार्डों की सीमाओं से संबंधित गली/मोहल्ले का विवरण दिया गया है। उन्होंने कहा कि वार्ड विभाजन में जनसंख्या का कोई उल्लेख नहीं है और आपत्तियां उठाने के बावजूद इसे हटाने का कोई प्रयास नहीं किया गया। उन्होंने वार्ड परिसीमन पर आपत्ति जताने और उसमें सुधार करने के लिए 15 दिन का समय देने के लिए कहा है।

 

गौरतलब है कि फरवरी 2021 में बठिंडा नगर निगम के 50 वार्डों में चुनाव हुए थे और अब ये चुनाव मार्च 2026 में दोबारा होने हैं। फिलहाल इन तमाम दावों पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करने पर सहमती जताते अगली सुनवाई निर्धारित की है। नगर निगम बठिंडा की तरफ से एमटीपी सुरिंदर बिंदरा कोर्ट में पेश हुए।

 

उन्होंने कहा कि कोर्ट ने नगर निगम की तरफ से तय वार्डबंदी व सरकार की अधिसूचना संबंधी पूरा रिकार्ड कोर्ट में जमा करवाया है व इसमें अब अगली सुनवाई तीन फरवरी को निर्धारित की गई है। बताते चले कि पहले नगर निगम चुनावों को लेकर माना जा रहा था कि वार्डबंदी फाइनल होने के बाद सरकार फरवरी तक नगर निगम बठिंडा के चुनाव करवा सकती है व जनवरी के दूसरे सप्ताह में इस बाबत नोटिफिकेश भी जारी किया जा सकता है। इसे लेकर सत्ताधारी व विपक्ष दलों की तरफ से चुनाव की तैयारियां भी शुरू कर दी गई थी लेकिन अब मामला कोर्ट में जाने के बाद नगर निगम के चुनाव अंतिम कोर्ट फैसले तक लटक गए है।

 

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