S. Jaishankar Warns Pakistan: आतंकवाद पर जयशंकर ने पाकिस्तान को दे डाली चेतावनी!
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आतंकवाद और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को लेकर एक बार फिर भारत की दो-टूक नीति साफ कर दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करेगा और यह तय करने का हक किसी दूसरे देश को नहीं है कि भारत अपने बचाव में क्या करे और क्या नहीं। डॉ. जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब सीमा पार आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा और पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
शुक्रवार को आईआईटी मद्रास में आयोजित ‘शस्त्र 2026 – आईआईटी मद्रास टेक्नो-एंटरटेनमेंट फेस्ट’ के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री ने भारत की विदेश नीति और सुरक्षा दृष्टिकोण पर खुलकर बात की। कार्यक्रम में जब उनसे भारत की विदेश नीति और पड़ोसियों के साथ रिश्तों को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के जवाब दिया।
डॉ. जयशंकर ने कहा, “आपके पड़ोसी अच्छे भी हो सकते हैं और बुरे भी। अगर हम पश्चिम की तरफ देखें तो दुर्भाग्य से हमारे साथ भी ऐसा ही है।” उनका इशारा साफ तौर पर पाकिस्तान की ओर था, हालांकि उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई देश जानबूझकर और लगातार आतंकवाद फैलाता है, तो भारत के पास आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है और भारत इस अधिकार का इस्तेमाल करेगा।
विदेश मंत्री ने दोहराया कि भारत की सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने कहा, “हम अपनी सुरक्षा के लिए वो सबकुछ करेंगे, जो करना जरूरी है। कोई हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं।” यह बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि भारत आतंकवाद के मुद्दे पर किसी भी तरह के बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा।
डॉ. जयशंकर ने पड़ोसी देशों के साथ समझौतों और रिश्तों पर भी अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत ने कई साल पहले जल बंटवारे जैसे समझौतों पर सहमति जताई थी, लेकिन अगर कोई देश दशकों तक आतंकवाद को बढ़ावा देता है, तो उसे अच्छे पड़ोसी की तरह व्यवहार की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “आप यह नहीं कह सकते कि हम आतंकवाद जारी रखेंगे, लेकिन आप हमारे साथ पानी साझा करते रहें। यह संभव नहीं है।” उनके इस बयान को पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते और आतंकवाद के मुद्दे से जोड़कर देखा जा रहा है।
विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अच्छे पड़ोस का मतलब केवल मांग करना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाना भी होता है। अगर कोई देश भारत के खिलाफ शत्रुतापूर्ण रवैया अपनाता है, तो उसे भारत के साथ सहयोग और समझौतों के फायदे भी नहीं मिल सकते।
अपने संबोधन में डॉ. जयशंकर ने बांग्लादेश और अन्य पड़ोसी देशों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत अपने अच्छे पड़ोसियों के साथ हमेशा खड़ा रहा है। कोरोना महामारी के दौरान भारत ने सबसे पहले अपने पड़ोसी देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई। श्रीलंका जब गंभीर आर्थिक संकट में फंसा, तब भारत ने उसे करीब चार अरब डॉलर की आर्थिक मदद दी।
उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि उसका विकास पूरे क्षेत्र के लिए फायदेमंद है। “हमारे अधिकतर पड़ोसी देश यह मानते हैं कि अगर भारत विकास करेगा, तो वे भी उसके साथ आगे बढ़ेंगे।” इसी संदर्भ में उन्होंने बांग्लादेश का नाम लेते हुए कहा कि भारत उसके विकास और स्थिरता को भी क्षेत्रीय प्रगति से जोड़कर देखता है।
कुल मिलाकर, डॉ. जयशंकर के इस बयान से भारत की विदेश नीति की मूल भावना एक बार फिर साफ हो गई है- आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस, आत्मरक्षा के अधिकार पर कोई समझौता नहीं और अच्छे पड़ोसियों के साथ सहयोग, लेकिन शत्रुतापूर्ण रवैये के लिए सख्त संदेश।