हिजाब विवाद- दोस्त बोली- कल नौकरी जॉइन करेंगी नुसरत:वो हमेशा पर्दे में रहती है, CM ने जो किया गलत- किसी को हक नहीं जिस्म को छुए
मुस्लिम महिला डॉ. नुसरत परवीन के हिजाब खींचे जाने पर एक ओर जहां बिहार में राजनीति गरमाई हुई है। वहीं डॉ. नुसरत परवीन की CM नीतीश कुमार से कोई नाराजगी नहीं हैं।
राजकीय तिब्बी कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो.(डॉ.) मोहम्मद महफजुर रहमान ने नौकरी न जॉइन करने की अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा, ‘डॉ. नुसरत परवीन की उसकी दोस्त से बात हुई है। उसने कहा है कि वो मुख्यमंत्री से नाराज नहीं है। कल 20 दिसंबर को नौकरी जॉइन करेगी।’
दरअसल, 15 दिसंबर को जॉइनिंग लेटर वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नुसरत का हिजाब हल्का सरका दिया था। तब से ये मामला तूल पकड़ रहा है, कुछ लोग नाराजगी भी जता रहे हैं।
4 दिन से कॉलेज नहीं आईं
नुसरत परवीन को कॉलेज में पढ़ाने वाले उसके एक टीचर ने बताया ‘नुसरत पढ़ने में काफी होशियार है और रेगुलर कॉलेज आ रही थी। आज तक कॉलेज में किसी ने उसका चेहरा नहीं देखा। पिछले करीब सात साल से वह हिजाब में ही कॉलेज आ रही है। उसने यहीं से यूजी किया और अब पीजी कर रही है। अभी उसका एक साल बाकी है।
जब उसे ज्वॉइनिंग से जुड़ा मैसेज मिला, तो वो बेहद खुश थी। अपने भविष्य को लेकर उसके कई सपने थे, लेकिन इस घटना के बाद से वह थोड़ा आहत है। 4 दिन से कॉलेज नहीं आई है। वहां जो कुछ हुआ वह इंटेशनली नहीं लगता है, लेकिन जो हुआ वह भी सही नहीं है।’
नुसरत ने राजकीय तिब्बी कॉलेज अस्पताल से पढ़ाई की है
पटना के कदमकुआं इलाके में ‘राजकीय तिब्बी कॉलेज एवं अस्पताल’ यूनानी चिकित्सा शिक्षा और इलाज का एक प्रमुख सेंटर है। यहां वर्षों से छात्रों को यूनानी पद्धति से पढ़ाई करवाई जा रही है। यहां (BUMS) बैचलर ऑफ यूनानी मेडिसिन एंड सर्जरी की पढ़ाई होती है।
कॉलेज से जुड़े अस्पताल में आम लोगों का इलाज होता है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। नुसरत यहीं से अपना पीजी कंप्लीट कर रही है। उसका अभी एक साल बाकी है। अस्पताल में ओपीडी और भर्ती की सुविधा भी उपलब्ध है। यहां सस्ते रेट पर इलाज किया जाता है, नुसरत अपनी पढ़ाई के साथ यहीं प्रैक्टिस भी कर रही है।
प्रिंसिपल ने कहा- CM का गलत इंटेंशन नहीं था
राजकीय तिब्बी कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो.(डॉ.) मोहम्मद महफजुर रहमान ने कहा कि नुसरत परवीन पढ़ाई में बेहद अच्छी छात्रा है। ऑल इंडिया एंट्रेंस एग्जाम क्वालिफाई कर उसने यहां दाखिला लिया था।
कॉलेज में उसका एकेडमिक परफॉर्मेंस और बिहेवियर हमेशा सराहनीय रहा है। इस घटना को गलत सेंस में लिया गया है। मुख्यमंत्री जी की मंशा गलत नहीं थी, यह प्यार और सम्मान का भाव था, लेकिन मीडिया ने इसे दूसरे तरीके से पेश किया।
प्रिंसिपल ने आगे कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देकर शिक्षा और रोजगार में आगे बढ़ाया गया है। हम मुख्यमंत्री जी में किसी तरह की कमी नहीं देखते, लेकिन कुछ लोगों ने इस मामले को गलत दिशा में मोड़ दिया है।
प्रोफेसर बोले- मैंने कभी नुसरत का चेहरा नहीं देखा
नुसरत परवीन जिस डिपार्टमेंट में पढ़ती थी, वहां के एक शिक्षक ने बताया, ‘वह होनहार लड़की है। वह पीजी फर्स्ट ईयर की छात्रा है। उसने ग्रेजुएशन भी इसी कॉलेज से किया है। वो नियमित रूप से कॉलेज आती थी। उसका व्यवहार हमेशा अनुशासित और शालीन रहा।
पिछले करीब सात साल में वो कभी बिना हिजाब के कॉलेज नहीं आई। हम लोगों ने कभी उसका चेहरा नहीं देखा। यहां कई छात्राएं हिजाब में आती हैं। इसलिए कभी कुछ अलग जैसा नहीं लगा। अभी उसका एक साल बाकी है, वो इसी अस्पताल में पढ़ाई के साथ प्रैक्टिस भी करती है।’