‘जी-राम-जी’ बिल का विरोध, संसद में TMC का रातभर धरना:खड़गे ने कहा- मैं मां की कसम खाकर कहता हूं, ये कानून गरीबों के लिए नहीं

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संसद में गुरुवार रात 12.30 बजे राज्यसभा से VB-G RAM G बिल पास हो गया। हालांकि विपक्षी सांसदों ने बहस के दौरान जमकर हंगामा किया। बिल के पास होने से पहले सांसद राज्यसभा से वॉकआउट कर गए।

विपक्ष की मांग थी कि बिल को सिलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए। हालांकि सदन में विपक्ष की गैरमौजूदगी के बीच बिल ध्वनिमत से पास कर दिया गया।

बिल के विरोध में तृणमूल (TMC) सांसद, संसद के मकर द्वार पर रातभर से धरने पर बैठे हैं। इनका कहना है कि ये बिल महात्मा गांधी का अपमान है और किसानों-गरीबों के खिलाफ है।

वहीं, कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यसभा में कहा कि मैं विपक्ष से उम्मीद कर रहा था कि वे अच्छी बहस करेंगे, लेकिन उन्होंने केवल बेवजह के आरोप लगाए।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा था कि मैं अपनी मां की और भारत मां की कसम खाकर कहता हूं कि ये बिल गरीबों की भलाई के लिए नहीं है।

इससे पहले, बुधवार को लोकसभा में यह बिल 14 घंटे तक चली बहस के बाद ध्वनिमत से पास हुआ था।

शीतकालीन सत्र का शुक्रवार को आखिरी दिन है। सत्र 1 दिसंबर से शुरू हुआ था, इस दौरान वंदे मातरम्, चुनाव सुधारों जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

संसद में VB-G RAM G बिल का विरोध- 2 तस्वीरें…

TMC सांसद रातभर से धरने पर बैठे…

TMC सांसदों ने VB-G RAM G बिल 2025 के खिलाफ रात भर विरोध प्रदर्शन किया। तस्वीरें शुक्रवार सुबह की हैं। हालांकि प. बंगाल की CM ममता बनर्जी ने कहा है कि उनकी सरकार अपनी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखेगी।

लोकसभा में बिल की कॉपी फाड़ी गई…

कृषि मंत्री शिवराज सिंह के बोलने के दौरान विपक्ष ने बिल के विरोध में जमकर नारेबाजी की। विपक्षी सांसद वेल में पहुंच गए और बिल की कॉपी फाड़कर फेंकी।

शिवराज ने कहा, मनरेगा का नाम पहले महात्मा गांधी के नाम पर नहीं था, यह पहले नरेगा था। जब 2009 के चुनाव आए, तब वोटों के लिए उसमें महात्मा गांधी जोड़ा गया।

BJP सांसद का 8 सांसदों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने 8 विपक्षी सांसदों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया, अगले सत्र की कार्यवाही में शामिल होने से रोकने की मांग की।

लोकसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

लोकसभा की कार्रवाई 11 बजे शुरू हुई। लेकिन वंदेमातरम के तुरंत बाद अध्यक्ष ने इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। बिरला ने कहा कि सत्र के दौरान सदन की उत्पादकता 111 प्रतिशत रही।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने VB-G RAM G बिल 2025 पर कहा- संसद का सत्र इतने दिनों से चल रहा है लेकिन आप आखिरी दिनों में कुछ बिल लेकर आते हैं और उसके लिए कम समय रखते हैं। उसे हड़बड़ी में पास करते हैं। ये अपने आप में संदिग्ध बात है। उन्होंने कहा- प्रदूषण पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती? चर्चा होनी चाहिए, सबकी बात सुननी चाहिए।

राहुल गांधी बोले- मोदी सरकार ने एक दिन में 20 साल खत्म किए

राहुल गांधी ने कहा- मोदी सरकार ने एक दिन में MGNREGA के 20 साल खत्म कर दिए। बिल बिना ठीक से जांच-पड़ताल के संसद में पास कर दिया गया। मोदी के लक्ष्य साफ है। ग्रामीण भारत, खासकर पिछड़े वर्गों की ताकत को कमजोर करना, सत्ता को केंद्रीकृत करना और फिर सुधार के नाम पर नारे बेचना।

शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन पेश होंगे कई बिल

सत्र के आखिरी दिन कई बिल पेश किए जाने हैं। डी. रविकुमार दो संवैधानिक संशोधन बिल, 2024 पेश करने की अनुमति मांगेंगे, जिनमें से एक में नया अनुच्छेद 21B जोड़ने का प्रस्ताव है, और दूसरा अनुच्छेद 129 की जगह एक नया अनुच्छेद लाने का प्रस्ताव है।

HRI शफी परम्बिल डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (अमेंडमेंट) बिल 2024 पेश करेंगे, जिसमें सेक्शन 19 और 20 में बदलाव किए जाएंगे, साथ ही नेशनल कमीशन फॉर फेयर लेबर प्रैक्टिसेज बिल, 2024 भी पेश किया जाएगा।

राजेश वर्मा एयर (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ पॉल्यूशन) अमेंडमेंट बिल, 2024 पेश करेंगे, जो सेक्शन 2A और दूसरे संबंधित प्रावधानों में बदलाव करता है।

हैदराबाद में बीजेपी नेता प्रकाश रेड्डी ने कहा- यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि VB-G RAM G के MGNREGA की जगह लेने के बाद कांग्रेस पार्टी संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रही है। यह योजना शुरू में ग्रामीण विकास के लिए शुरू की गई थी, लेकिन ज़्यादा कुछ नहीं किया गया। प्रधानमंत्री ने संसद में साफ किया कि इस कार्यक्रम को हटाया नहीं जा रहा है। बल्कि, ग्रामीण इलाकों में संपत्ति बनाने के लिए इसमें सुधार किया जा रहा है।
TMC के 12 घंटे के धरने पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि सिर्फ वही लोग VB-G RAM G बिल 2025 का विरोध करेंगे जिनका मजदूरों से कोई लेना-देना नहीं है। जिन्हें राजनीति करनी है। क्या 100 दिन की गारंटी के बजाय 125 दिन की गारंटी देना गलत है? यह मजदूरों के हित में है। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं, वे मजदूरों के दुश्मन हैं।

TMC सांसद डोला सेन ने कहा, “MGNREGA के जरिए गरीब, पिछड़े लोगों को रोजगार दिया गया था। सत्ता पक्ष में बैठे लोगों, BJP वालों को स्वतंत्रता सेनानियों, महात्मा गांधी के लिए कोई इज्जत नहीं है। वे नाथूराम गोडसे की पूजा करते हैं जिसने 30 अक्टूबर, 1948 को महात्मा गांधी की हत्या की थी और 18 दिसंबर, 2025 को सदन के अंदर महात्मा गांधी को एक बार फिर मारा गया क्योंकि MGNREGA से उनका नाम हटा दिया गया। नए बिल से 40 प्रतिशत आर्थिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर पड़ेगी।

 

जीरामजी बिल पर किसने क्या कहा…

  • कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला: यह दिन हमारे स्वतंत्र राष्ट्र के इतिहास में मजदूरों के लिए सबसे दुखद दिन है। सरकार ने MNREGA को खत्म करके लगभग 12 करोड़ लोगों की आजीविका पर गंभीर चोट पहुंचाई है।
  • कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी: केंद्र सरकार ने जल्दबाजी में बिल पास करके गरीबों और मजदूरों के अधिकार छीन लिए हैं। यह लोकतंत्र पर धब्बा है। यह लोकतंत्र को बुलडोज़ करने जैसा है। विपक्ष की बार-बार मांग के बावजूद इसे सिलेक्ट कमेटी को भेजने से इनकार कर दिया गया है।
  • AAP सांसद संजय सिंह : यह मजदूरों और किसानों के खिलाफ है। भविष्य में सरकार को इसे वापस लेना पड़ेगा, ठीक वैसे ही जैसे विरोध प्रदर्शनों के बाद तीन कृषि कानूनों को रद्द किया था।
  • कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी : यह बिल सरकार के अहंकार का प्रतीक है। विपक्ष की एकमात्र मांग थी कि इसे एक सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाए। बिना उचित जांच या बहस के योजना में कई सीमाएं जोड़ दी गई हैं।
  • CPI सांसद पी. संतोष कुमार: यह बिल गरीबों और मजदूरों पर बम गिराने जैसा है। यह लोगों के लिए BJP का नए साल का तोहफा है। हमने सत्र का बहिष्कार किया और लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। आने वाले दिनों में हम सड़कों पर उतरेंगे।

जानिए क्या है जीरामजी बिल

लोकसभा में 12वें दिन केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-जी राम जी) बिल, 2025’ पेश किया।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (MGNREGA) को रिप्लेस करेगा। नए बिल में कहा गया है कि इसका उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास का नया ढांचा तैयार करना है।

काम के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी जाएगी।

बिल की धारा 22 के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारों के बीच फंड शेयरिंग पैटर्न 60:40 होगा, जबकि उत्तर पूर्वी राज्यों, हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू और कश्मीर) के लिए यह 90:10 होगा।

बिल की धारा 6 राज्य सरकारों को एक वित्तीय वर्ष में 60 दिनों की अवधि के लिए, बुवाई और कटाई के मुख्य कृषि मौसमों को कवर करते हुए, पहले से सूचित करने की अनुमति देती है।

 

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