प्रियंका का सवाल- वंदे मातरम् पर आज बहस क्यों:जितने साल मोदी PM, उतने साल नेहरू जेल में रहे; मोदी बोले- नेहरू जिन्ना के सामने झुके

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लोकसभा में सोमवार को वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने पर जारी चर्चा में प्रियंका गांधी ने सवाल पूछा कि ये गीत 150 साल से देश की आत्मा का हिस्सा है। 75 सालों से लोगों के दिल में बसा है। फिर आज इस पर बहस क्यों हो रही है?

मैं बताती हूं- क्योंकि बंगाल का चुनाव आ रहा। मोदी जी उसमें अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं। मैं कहूं- मोदी जी अब वह पीएम नहीं रहे जो पहले थे। जहां तक नेहरू जी की बात है। जितने साल मोदी PM रहे, उतने साल नेहरू जेल में रहे थे।

इससे पहले चर्चा की शुरुआत पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने वंदे मातरम् के टुकड़े किए। जवाहरलाल नेहरू जिन्ना के सामने झुके थे। वंदे मातरम् आजादी के समय से प्रेरणा का स्त्रोत था तो फिर उसके साथ पिछले दशक में अन्याय क्यों हुआ।

भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा- वंदे मातरम् राष्ट्रभक्तों के लिए एनर्जी है। कुछ लोगों को इससे एलर्जी है। अब जिन्ना के मुन्ना को भी वंदे मातरम् से दिक्कत है।

सपा प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने कहा, ‘जिस वंदे मातरम् ने आजादी के आंदोलन को जोड़ा, आज के दरारवादी लोग उसी से देश को तोड़ना चाहते हैं। वंदे मातरम् गाने के लिए नहीं,बल्कि निभाने के लिए है।’

बंकिम चंद्र ने 1875 में लिखा था, आनंदमठ में छपा था

भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को बंकिम चंद्र चटर्जी ने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर लिखा था। यह 1882 में पहली बार उनकी पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के हिस्से के रूप में छपा था।

1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने मंच पर वंदे मातरम् गाया। यह पहला मौका था जब यह गीत सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर गाया गया। सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम थीं।

प्रियंका ने कहा- सरकार देश की असलियत छुपाना चाहती है

प्रियंका गांधी ने कहा- नेहरू, परिवारवाद पर चर्चा कर लें एक बार। इसके बाद मंहगाई, बेरोजगारी समेत दूसरे जरूरी मुद्दों पर चर्चा करें। प्रियंका के इतना कहने पर सदन में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई।

स्पीकर ने कहा- बिना तथ्यों के चर्चा करें। फिर प्रियंका ने कहा- ये इतने सालों से हम पर बिना तथ्यों के हमला करते आए हैं। सरकार देश की असलियत छुपाना चाहती है। इसलिए वंदे मातरम् पर चर्चा करना चाहती है।

प्रियंका बोलीं- मोदी नेहरू की गलतियों की लिस्ट बना लें, चर्चा करेंगे

प्रियंका गांधी ने कहा- हमारे पीएम 12 सालों से इस सदन में है। मैं 12 महीनों से हूं, मेरी सलाह है कि उन्होंने बताया था कि विपक्ष ने उनके अपनाने की लिस्ट बनाई थी। मैं उनसे कहती हूं वे नेहरू जी की गलतियों की एक लिस्ट बना दें। हम उन पर चर्चा करेंगे। 20 घंटे 40 घंटे, लेकिन इस सदन का कीमती समय बर्बाद नहीं करें।

उन्होंने आगे कहा कि अगर नेहरू ने ISRO नहीं बनाया होता तो आज बंगाल यहां नहीं होता। अगर DRDO नहीं बनाते तो तेजस कहां बनता। AIIMS नहीं बनाते तो कोविड में लोगों का इलाज कहां होता। देश की सेवा करते नेहरू ने दम तोड़ा।

प्रियंका बोली- जितना मोदी पीएम रहे, उतने साल नेहरू जेल में थे

प्रियंका गांधी ने कहा- 17 अक्टूबर को चिठ्ठी के जवाब में नेहरू ने 20 अक्टूबर की चिठ्ठी में लिखा- मैंने तय किया है कि मैं 25 अक्टूबर कोलकाता आऊंगा, टैगोर से मिलूंगा। 28 अक्टूबर को कांग्रेस ने वंदे मातरम् को राष्ट्रगीत घोषित किया। इस कार्यसमिति की बैठक में सभी महापुरूष मौजूद थे। सभी इस प्रस्ताव से खुश थे। सहमत थे।

उन्होंने आगे कहा कि संविधान सभा के फैसले पर सवाल करना गलत है। क्या ये लोग संविधान सभा से बड़े हो गए हैं। हमारे महापुरुषों से बड़े हो गए हैं। मोदी जी का ये कहना कि वंद मातरम् विभावित किया। ये महापुरुषों का अपमान है। जहां तक नेहरू जी की बात है। जितना पीएम मोदी प्रधानमंत्री रहे हैं। लगभग उतने ही सालों तक नेहरू जेल में थे।

प्रियंका ने कहा- हम देश और आप चुनाव के लिए हैं

प्रियंका ने कहा कि हम देश के लिए हैं, आप चुनाव के लिए हैं। 17 अक्टूबर को चिठ्ठी के जवाब में नेहरू ने 20 अक्टूबर की चिठ्ठी में लिखा- मैंने तय किया है कि मैं 25 अक्टूबर कोलकाता आऊंगा, टैगोर से मिलूंगा। 28 अक्टूबर को कांग्रेस ने वंदे मातरम् को राष्ट्रगीत घोषित किया। इस कार्यसमिति की बैठक में सभी महापुरूष मौजूद थे। सभी इस प्रस्ताव से खुश थे। सहमत थे।

प्रियंका बोलीं- टैगोर गीत गाते हुए अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में उतरे

प्रियंका गांधी ने कहा कि 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने यह गीत गाया। 1905 में रवींद्रनाथ टैगोर ये गीत गाते हुए ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई में उतरे। ये गीत मातृभूमि के लिए मर मिटने की भावना को जगाता है। 1930 के दशक में सांप्रदायिक की राजनीति उभरी तब ये गीत विवादित होने लगा।

उन्होंने आगे कहा कि 1937 में नेताजी कोलकाता में कांग्रेस अधिवेशन का आयोजन कर रहे थे। 20 अक्टूबर का लेटर उन्होंने सुनाया। उनके तीन पहले नेताजी ने नेहरू को एक चिठ्ठी लिखी थी। इसका पीएम मोदी ने जिक्र नहीं किया।

प्रियंका ने कहा- पीएम का भाषण अच्छा लेकिन थोड़ा लंबा

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा- आज इस चर्चा को पीएम ने शुरू किया। भाषण दिया- कहने में कोई झिझक नहीं है कि भाषण अच्छा देते हैं, बस थोड़ा लंबा है। बस एक कमजोरी है उनकी- तथ्यों के मामले में कमजोर हो जाते हैं। मैं तो जनता की प्रतिनिधि हूं कलाकार नहीं हूं।

उन्होंने आगे कहा कि तथ्यों को तथ्य के रूप में सदन में रखना चाहती हूं। उदाहरण देते हुए कहा- वंदे मातरम् के जो सालगिरह पर आयोजित कार्यक्रम में पीएम ने कहा 1896 में रवींद्र नाथ ने ये एक अधिवेशन में ये गीत गाया। ये अधिवेशन कांग्रेस का था। न कि आरएसस, या हिंदू महासभा का। वंदे मातरम् की क्रोनॉलॉजी बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने पहले दो अंतरे लिखे। 1882 में उपन्यास आनंदमठ प्रकाशित किया, इसमें चार अंतरे और जोड़े गए।

अनुराग ठाकुर बोले- जिन्ना के मुन्ना को वंदे मातरम् से दिक्कत है

वंदे मातरम् पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा- वंदे भारत राष्ट्रभक्तों के लिए एनर्जी है। कुछ लोगों को इससे एलर्जी है। हम उनका कुछ नहीं कर सकते हैं। लेकिन आज मैं ये जरूर कहूंगा कि अंग्रेजों को वंदे मातरम् से दिक्कत थी।

उन्होंने आगे कहा- जिन्ना को वंदे मातरम् से दिक्कत थी। अब जिन्ना के मुन्ना को भी वंदे मातरम् से दिक्कत है। जिनमें वंदे मातरम् सुनकर ऊर्जा का संचार नहीं होता या तो वे कांग्रेसी है या कम्युनिस्ट या लीग के समर्थक हैं।

भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा- एक समय वो था जब वंदे मातरम् का शताब्दी वर्ष था। उस समय आपातकाल लगाकर देश को अंधकार में डालने का काम किया गया।

उन्होंने आगे कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश के संविधान को तार-तार करने का काम किया था। उस समय तो चर्चा भी नहीं हो पाई थी। आज पीएम मोदी अपने भाषण में वंदे मातरम् का इतिहास और महत्व को देश के सामने रखा है।अरविंद सावंत (शिवसेना–UBT) ने कहा कि इस चर्चा में भाग लेना उनके लिए सौभाग्य की बात है। जब मैं स्कूल में था, तब वंदे मातरम्, जन गण मन, और झंडा ऊंचा रहे हमारा, ये गीत हर जगह गाए जाते थे। आरएसएस, भाजपा पर परोक्ष कटाक्ष करते हुए कहते हैं कि कुछ संगठनों ने 50 सालों तक राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया। अब इन लोगों का नया प्रेम जागा है।

अखिलेश बोले- वंदे मातरम् सांप्रदायिक राजनीति को अस्वीकार करने वाला गीत

पीएम बोले- कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेके

पीएम ने कहा कि मोहम्मद अली जिन्ना ने लखनऊ से 15 अक्टूबर 1936 को वंदे मातरम् के खिलाफ नारा बुलंद किया। कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू को अपना सिंहासन डोलता दिखा। बजाय इसके कि नेहरू मुस्लिम लीग के आधारहीन बयानों को करारा जबाब देते, उसकी निंदा करते, लेकिन उल्टा हुआ। उन्होंने वंदे मातरम् की ही पड़ताल शुरू कर दी।

नेहरू ने 5 दिन बाद नेताजी को चिट्ठी लिखा। उसमें जिन्ना की भावना से सहमति जताते हुए लिखा कि वंदे मातरम् की आनंदमठ वाली पृष्ठभूमि से मुसलमालों को चोट पहुंच सकती है। वे लिखते हैं- ये जो बैकग्राउंड है, इससे मुस्लिम भड़केंगे।

कांग्रेस का बयान आया- 26 अक्टूबर को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक होगी, जिसमें वंदे मातरम् के उपयोग की समीक्षा होगी। इस प्रस्ताव के खिलाफ लोगों ने देश भर में प्रभात फेरियां निकालीं। लेकिन कांग्रेस ने वंदे मातरम् के टुकड़े कर दिए। इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिए।

पीएम ने कहा- खुदीराम बोस, रोशन सिंह, राजेंद्र नाथ लहरी, रामकृष्ण विश्वाश जैसे अनगिनत नाम हैं, जिन्होंने वंदे मातरम् कहते-कहते फांसी के फंदे को अपने गले लगा लिया। जिन पर जुल्म हो रहे थे, उनकी भाषा अलग-अलग थी, लेकिन ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ इन सबका मंत्र था। गोपाल बाल जैसे युवाओं ने देश के लिए बलिदान दिया। मास्टर सुरसेन को 1934 में फांसी दी गई। तो उन्होंने अपने साथियों को पत्र लिख और उसमें एक ही शब्द था- वंदे मातरम्।

पीएम ने कहा कि वंदे मातरम् गीत को लेकर अंग्रेजों ने कठोर कानून बनाए। सैकड़ों महिलाओं ने आजादी की लड़ाई में योगदान दिया। बारीसाल में वंदे मातरम् गाने पर सर्वाधिक जुल्म हुए थे। आज बारीसाल भारत का हिस्सा नहीं रहा। उस समय वहां की माताएं, बहनें, बच्चे वंदे मातरम् के स्वाभिमान के लिए मैदान में उतरे थे। तब बारीसाल की वीरांगना श्रीमती शांति घोष ने कहा था, ‘जब तक ये प्रतिबंध नहीं हटता है,मैं अपनी चूड़ियां निकाल देती हूं। तब चुड़ियां निकालना बहुत बड़ी बात होती थी।’

बंगाल की गलियों में लगातार वंदे मातरम् के लिए प्रभात फेरियां निकलती थीं। लोग कहते थे कि वंदे मातरम् कहते-कहते अगर ये जीवन भी चला जाए तो धन्य हो जाएंगे। बंगाल की गलियों से निकली आवाज देश की आवाज बन गई 1905 में हरितपुर के गांव में छोटे-छोटे बच्चे जब वंदे मातरम् के नारे लगा रहे थे, तो अंग्रेजों ने उनपर कोड़े बरसाए। 1906 में नागपुर में नील सीटी स्कूल में बच्चों पर यही जुल्म हुआ। हमारे जांबाज सपूत बिना किसी डर के फांसी के तख्ते पर चढ़े थे।’

पीएम मोदी ने कहा कि अंग्रेज जानते थे कि बंगाल टूट गया तो देश टूट जाएगा। इसलिए 1905 में अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन किया, लेकिन उन्होंने जब ये पाप किया तो वंदे मातरम् चट्टान की तरह खड़ा रहा। बंगाल की एकता के लिए ये गीत गली-गली का नाद बन गया था। वहीं नारा प्रेरणा देता था। अंग्रेजों ने बंगाल विभाजन के साथ ही भारत को कमजोर करने के बीज और ज्यादा बोने की शुरूआत की थी।

उन्होंने कहा कि बंगाल का विभाजन तो हुआ, लेकिन एक बहुत बड़ा स्वदेशी आंदोलन शुरू हुआ। तब वंदे मातरम् हर तरफ गूंज रहा था। बंकिम दा ने जो यह भाव तैयार किया था, उन्होंने इस गीत के द्वारा अंग्रेजों को हिला दिया। सोचिए अंग्रेज कितने कमजोर हुए होंगे तो उन्हें इस गीत पर प्रतिबंध लगाने को मजबूर होना पड़ा। उन्होंने इसे गाने, छापने पर बैन लगा दिया।

पीएम मोदी ने कहा- इन भारतीय ने तब करोड़ों देशवासियों को यह एहसास कराया कि लड़ाई जमीन के टुकड़े के लिए नहीं है, सिर्फ सत्ता के सिंहासन पर कब्जा के लिए नहीं है। वंदे मातरम् का जन-जन से जुड़ाव था, यह हमारे स्वतंत्रता संग्राम की लंबी गाथा दर्शाती है। क्या कभी किसी ने सोचा है कि आजादी के पूरा पड़ाव वंदे मातरम् से होकर गुजरता है। ऐसा भव्य काव्य शायद दुनिया में कहीं बना होगा।

उन्होंने कहा कि अंग्रेज समझ गए थे कि भारत में लंबे समय तक टिकना उनके लिए संभव नहीं है। उन्हें लगा जब तक भारत को बांटेंगे नहीं, भारत के टुकड़े नहीं करेंगे, तब तक यहां राज करना मुश्किल है। अंग्रेजों ने ‘बांटो और राज करो’ के रास्ते को चुना और उन्होंने बंगाल को इसकी प्रयोगशाला बनाया। वे जानते थे कि एक वक्त था तब बंगाल का बौद्धिक सामर्थ्य देश को ताकत देता था।

पीएम ने कहा- वंदे मातरम् महान संस्कृतिक परंपरा का आधुनिक अवतार है। बंकिम दा ने जब वंदे मातरम् की रचना की, तो वह स्वाभाविक की स्वतंत्रता आंदोलन का स्वर बन गया। हर भारतीय का संकल्प बन गया।

पीएम ने कहा- “त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी, कमला कमलदलविहारिणी, वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्, नमामि कमलाम्, अमलाम्, अतुलाम्, सुजलां, सुफलां, मातरम्”

वंदे मातरम् महान संस्कृतिक परंपरा का आधुनिक अवतार है। बंकिम दा ने जब वंदे मातरम् की रचना की तो वह स्वाभाविक की स्वतंत्रता आंदोलन का स्वर बन गया। हर भारतीय का संकल्प बन गया।

कुछ दिन पूर्व वंदे मातरम् की 150वीं सालगिरह पर एक कार्य्रकम में मैंने कहा था- वंदे मातरम् अंग्रेजों के उस दौर में एक फैशन हो गया था, जब भारत को कमजोर, निकम्मा,आलसी दिखाने के लिए हमारे यहां के लोग भी वही भाषा बोलते थे। तब बंकिम दा ने वंदे मातरम् लिखा।

पीएम ने कहा, ‘वंदे मातरम् सिर्फ राजनैतिक आजादी की लड़ाई का मंत्र नहीं था। अंग्रेज जाएं और हम अपनी राह पर खड़े हो जाए, वंदे मातरम् सिर्फ इतने तक सीमित नहीं रहा। वंदे मातरम् अपनी मां भारती को उन बेड़ियों से मुक्ति दिलाने का वो पवित्र जंग लड़ा। वेद काल में कहा गया है- ये भूमि मेरी माता है और मैं पृथ्वी का पुत्र हूं।’

पीएम ने कहा, “मैं मानता हूं कि सदन में भी और देश में भी इस मौके को जाना नहीं देना चाहिए। ये वही वंदे मातरम ही है जिसने 19947 में देश को आजादी दिलाई, आपके सामने जब मैं वंदे मातरम् की 150वीं सालगिरह पर चर्चा के लिए आया हूं। तो यहां कोई पक्ष-विपक्ष नहीं है। वंदे मातरम् का ही परिणाम है कि आम सभी यहां बैठे हैं। ये वंदे मातरम् का रण स्वीकार करने का पावन पर्व है।

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