अल-फलाह के चेयरमैन ने 415 करोड़ रुपए अवैध कमाए:ED का दावा- विदेश भागने वाला था; यूनिवर्सिटी से 10 लोग लापता, इनमें 3 कश्मीरी

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दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी डॉक्टरों की ‘पनाहगार’ रही फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) का शिकंजा कस गया है। ED ने बुधवार को यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को साकेत कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद जवाद को 13 दिन की रिमांड पर ED को सौंप दिया।

जांच एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि सिद्दीकी ने अल फलाह यूनिवर्सिटी के जरिए छात्रों, उनके माता-पिता को मान्यता प्राप्त संस्थान बताकर गुमराह किया और उनसे 415.10 करोड़ की अवैध कमाई की। ED के मुताबिक सिद्दीकी का परिवार खाड़ी देशों में बसा है। वह भी विदेश भागने की तैयारी में था।

अगर उसे गिरफ्तार नहीं किया जाता तो वो विदेश भागकर जांच से बच सकता था। सबूत मिटा सकता था। ED ने कोर्ट को बताया कि 1990 के दशक के बाद अल फलाह ग्रुप ने तेजी से तरक्की की और एक बड़ा शैक्षणिक संस्थान बन गया। हालांकि, ग्रुप की वित्तीय स्थिति और उसकी संपत्तियों के बीच बड़ा अंतर है, जो संदेह पैदा करता है।

दूसरी तरफ, खुफिया सूत्रों ने बताया कि अल फलाह यूनिवर्सिटी में काम करने या पढ़ाई करने वाले 10 लोग लापता हैं। इनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। इनमें 3 कश्मीरी हैं। उनके फोन बंद आ रहे हैं। जम्मू-कश्मीर और हरियाणा पुलिस की संयुक्त टीमें इन्हें खोजने में जुटी हैं।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस में 6 एजेंसी का डेरा, अबतक 1000 लोगों से पूछताछ

लाल किला कार ब्लास्ट केस में मुख्य आरोपियों के अल-फलाह यूनिवर्सिटी से कनेक्शन मिलने के बाद कैंपस जांच केंद्र में बदल गया है। फिलहाल यहां 6 एजेंसियों ने अपने टेम्परेरी कमांड सेंटर बना रखे हैं। इनमें NIA, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल, उत्तर प्रदेश ATS, जम्मू-कश्मीर पुलिस, फरीदाबाद क्राइम ब्रांच और प्रवर्तन निदेशालय की टीमें मौजूद हैं।

ब्लास्ट में मारे गए बिलाल का शव कंगन पहुंचा, सोशल मीडिया से पहचान हुई

दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार विस्फोट में जान गंवाने वाले 28 साल के बिलाल अहमद संगू का शव अंतिम संस्कार के लिए कंगन में बाबा नगरी वंगथ में उनके घर पहुंचा। बिलाल 2019 से दिल्ली में काम करके अपने घर का खर्च चला रहा था। सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक तस्वीर के बाद बिलाल की पहचान हो सकी।

MP के महू में बना जावद का मकान अवैध, 3 दिन में तोड़ने के आदेश

अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी के महू के मुकेरी मोहल्ला स्थित मकान को कैंट बोर्ड ने अवैध घोषित करने के साथ ही तीन दिन में खुद ही हटाने की चेतावनी दी है। अगर तीन दिन में यह मकान स्वयं से नहीं हटाया तो फिर कैंट बोर्ड सख्ती के साथ इसे हटाने की कार्रवाई करेगा।

बोर्ड ने बुधवार को मुकेरी मोहल्ला स्थित मकान नंबर 1371 पर बिना अनुमति निर्माण करने पर नोटिस चस्पा किया। मकान जिस हम्माद अहमद सिद्दीकी के नाम दर्ज है, वह शहर काजी रह चुके हैं।

टेरर मॉड्यूल में मुजम्मिल नेटवर्क रिक्रूटमेंट, डॉ. शाहीन ब्रेन वॉश करती थी

फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में चल रहे आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी कुछ नई जानकारियां सामने आई हैं। इस मॉड्यूल से जुड़े सभी प्रमुख डॉक्टरों की ड्यूटी तय थी। आतंक का नेटवर्क खड़ा करने में डॉ. मुजम्मिल शकील की अहम भूमिका रही है, जो लोगों को शॉर्टलिस्ट करने के बाद रिक्रूट करता था।

नए लोगों को शामिल करने के बाद डॉ. शाहीन सईद और डॉ. उमर नबी उनकी आर्थिक मदद करते और ब्रेनवॉश करते थे। मुजम्मिल यह काम मरीजों और अस्पताल कर्मचारियों के घर मदद के बहाने जाकर करता था। अस्पताल के जिन कर्मचारियों के नाम इस नेटवर्क में शामिल हैं, उनके परिवार वालों ने खुलासा किया है कि मुजम्मिल इलाज या किसी अन्य बहाने उनके घर आया था।

यूं तो मुजम्मिल यूनिवर्सिटी के इमरजेंसी वार्ड का सर्जन था, लेकिन पर्दे के पीछे उसकी भूमिका आतंकी मॉड्यूल में मदद करने वालों की टीम खड़ी करना था। वह यूनिवर्सिटी के अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और अस्पताल में काम करने वाले लोगों पर नजर रखता था। ज़रूरत पड़ने पर वह इलाज या अन्य तरीकों से लोगों से संपर्क करता और उनके घर की जानकारी जुटा लेता था।

दिल्ली विस्फोट में मारे गए जम्मू-कश्मीर के व्यक्ति का शव उसके घर पहुंचा

दिल्ली में 10 नवंबर को कार विस्फोट में मारे गए 30 साल के एक मजदूर का शव बुधवार को जम्मू-कश्मीर के गांदेरबल जिले के कंगन इलाके में उसके घर पहुंचा। अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी।

डॉ. उमर के सुसाइड बॉम्बर बनाने के वीडियो की वॉइस टोन की जांच

डॉ. उमर का सुसाइड बॉम्बर बनाने के इरादे बताता वीडियो 18 नवंबर को वायरल हुआ था। सूत्रों की मानें तो डॉ. उमर के इस वीडियो की टोन को लेकर NIA को शक है। आतंकी की इंग्लिश फ्लूएंट तो है, लेकिन उसमें आर्टिफिशियल टोन नजर आ रही है।

यह न तो भारतीय और न ही अमेरिकी व ब्रिटिश की लग रही। एनआईए की साइबर और लैंग्वेज फोरेंसिक टीम इसकी जांच कर रही हैं कि इंग्लिश का यह खास लहजा कहां सिखाया जाता है। इस लहजे की पहचान के लिए मिलिट्री इंटेलिजेंस से भी जानकारी मांगी गई है।

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