प्रशोत्तम मन्नू, 09 नवंबर, रामपुरा फूल। शहर के रामपुरा फूल नगर कौसिंल में पानी और सीवरेज बिलों की वसूली में एक बड़ा घोटाला सामने आया है। इसमें सरकार को तीन माह पहले कारर्वाई के लिए लिखने के बावजूद राजनीतिक संरक्षण में आरोपी लोगों के खिलाफ कानूनी कारर्वाई अमल में नहीं लाई जा रही है। यह पहला मामला नहीं है जब नगर कौंसिल रामपुरा फूल में हुए घपलों में आरोपी लोगों को सीधे तौर पर राजनीतिक व प्रशासकीय अधिकारियों की मिलीभगत से बचाने की कोशिश हो रही है। साल 2012 से अब तक दर्जनों घोटाले नगर कौंसिल रामपुरा में हो चुके हैं लेकिन किसी भी मामले में आरोपी लोगों के खिलाफ कानूनी व विभागीय कारर्वाई इमानदारी से नहीं हो सकी है। फिलहाल ताजा मामले में शहरवासियों से वसूले गए पैसे को परिषद के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया और कथित तौर पर उन्हें फर्जी रसीदें जारी कर दी गई। मामला सामने आने पर परिषद अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि 2021 से ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बावजूद कई उपभोक्ताओं को फर्जी रसीदें दी जा रही थीं या उनके ऑनलाइन भुगतान अस्वीकार किए जा रहे थे।
इस घोटाले से नगर कौसिंलको लाखों रुपए का नुकसान हुआ है, जबकि आम लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। कई शहरवासियों का कहना है कि उन्होंने समय पर सभी बकाया राशि जमा कर दी थी, लेकिन अब वे भुगतान रिकॉर्ड में गायब दिखाए जा रहे हैं। यह मामला तब सामने आया जब कुछ लोग एनओसी और अन्य कार्यों के लिए परिषद कार्यालय पहुंचे और उन्हें पता चला कि उन्होंने जो बिल भरे थे, वे परिषद के रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं हैं। इसके बाद यह मामला शहर में चर्चा का विषय बन गया।

भुगतानकर्ता अमनदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने परिषद में 15,000 रुपए का पानी और सीवरेज बिल जमा किया था। उन्होंने कहा, “जैसे ही वह अंदर गया, कर्मचारी ने बैठते ही उसे जूस पिलाया और उसकी सेवा देखकर वह हैरान तो हुआ, लेकिन उसे शक भी हुआ कि कुछ गड़बड़ है। किसे पता था कि मेरे पैसे खजाने में जाने के बजाय उसकी जेब में चले जाएंगे।”
परिषद के कार्यकारी अधिकारी रजनीश कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मामले की निष्पक्ष जांच चल रही है और अब तक एक कर्मचारी से परिषद के खाते में 5 लाख 45 हजार जमा हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद आरोपियों के खिलाफ विभागी कार्रवाई की जाएगी। इस धोखाधडी का खुलासा होने के बाद अब कार्रवाई की जाएगी। इस धोखाधड़ी का खुलासा होने के बाद, सैकड़ों निवासी अपनी रसीदें लेकर परिषद के चक्कर लगा रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि अब वे ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता आर. एस. जेठी ने कहा कि यह जनता के पैसे का गंभीर दुरुपयोग है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
यहां बताते चले कि मामला साल 2015 से चल रहा है व उस समय नगर कौंसिल में प्रधान पद पर तैनात रहे लोगों पर भी घपले के आरोप लग चुके हैं व इस बाबत अविश्वास प्रस्ताव भी उस समय के कौंसिल प्रधान के खिलाफ लाया गया था। इससे पहले 27 सितंबर 2012 को रामपुरा फूल नगर काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष स्वर्ण सिंह कुक्कू और भाजपा के वरिष्ठ नेता इब्राहिम खान के विरुद्ध पुलिस ने गबन का मामला दर्ज किया था। इन दोनों पर विकास कार्यों के दौरान सरकारी ईंटों को बेचकर पैसे हड़पने का आरोप था।
इस मामले में बीडीए अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका पर भी सवालिया निशान लगे। साल 2011 में विधानसभा चुनावों से पहले शहर में हुए विकास कामों के दौरान गलियों से उखाड़ी गई 25 लाख ईंटें गायब हो गई थी। इसी बारे में यह मामला दर्ज किया गया था। स्वर्ण सिंह कुक्कू ने विस चुनावों से पहले शिअद छोड़ कर कांग्रेस में वापसी की थी। जिसके बाद पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव पारित कर उन्हें कुर्सी से उतार दिया था। वहीं शिअद जिलाध्यक्ष और उस समय के शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका ने भी कुक्कू द्वारा किए कामों की उच्च स्तरीय जांच करवाने का ऐलान किया था।
पुलिस द्वारा दर्ज मामले के अनुसार ठेकेदार सुखदर्शन सिंह ने पुलिस के पास शिकायत दर्ज करवा आरोप लगाया था कि बीडीए द्वारा सीमेंट टाइलों के फर्श लगाते समय निकाली गई ईंटों को पूर्व अध्यक्ष स्वर्ण कुक्कू और उनके सहयोगी भाजपा के जिला पदाधिकारी ठेकेदार इब्राहिम खान ने गायब कर पैसे का गबन किया। एफआईआर के अनुसार तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल द्वारा दी गई दो करोड़ की ग्रांट से डा. चरनजीत सिंह वाली गली और राजा सिंह गनमैन वाली गली में नगर काउंसिल ने कुछ समय पहले ही ईंटों का फर्श लगाया था। लेकिन दोनों आरोपियों ने उस फर्श को तोड़ कर उसकी जगह इंटरलाकिंग टाइलों का फर्श लगाने की सिफारिश की। इसके बाद उन गलियों से निकली डेढ़ लाख ईंटों को खुर्द-बुर्द कर दिया।
इसी शिकायत पत्र के साथ काउंसिल के तत्कालीन ईओ ने भी पुलिस को पत्र भेज बताया कि पिछले वर्ष बठिंडा विकास प्राधिकरण द्वारा फूल टाउन क्षेत्र, गांधी नगर, दशमेश नगर, वार्ड नंबर 4, वार्ड नंबर 5, ट्रक यूनियन क्षेत्र, शहीद भगत सिंह कालोनी, जनता कालोनी और फरीद नगर आदि क्षेत्रों में सीमेंट टाइलों का फर्श लगाया था। उन क्षेत्रों में पहले से लगी हुई करीब 25 लाख ईंटों की खुदाई करने के बाद बीडीए ने इनको नगर काउंसिल के पास जमा नहीं करवाया। जिस बारे में ईओ ने बीडीए पर शक जाहिर करते हुए पुलिस को जांच कर कार्रवाई के लिए कहा था। पुलिस ने इन दोनों शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए पूर्व अध्यक्ष स्वर्ण कुक्कू और ठेकेदार इब्राहिम खान के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया था। इस मामले में भी बाद में राजनीतिक दबाव में केस को खुर्दबुर्द कर दिया गया।
जिले में नगर निगम नगर काउंसिल में करोड़ों रुपए के घपलों को लेकर पिछले दस साल में 12 ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें विजिलेंस ने जांच तो की लेकिन आरोपी लोगों पर कार्रवाई नहीं की गई। अधिकतर मामले करोड़ों रुपए की हेराफेरी फंड के गलत इस्तेमाल के थे। सर्वाधिक मामले नगर काउंसिल मौड़ में सामने आए जबकि बठिंडा नगर निगम, रामपुरा फूल गोनियाना मंडी में भी घपलों की भरमार रही। 2 दिसंबर 2015 को विजिलेंस विभाग चंडीगढ़ की टीम ने नगर निगम बठिंडा में छापामारी की। कार्रवाई आज तक नहीं हो सकी। 25 जुलाई 2012 को मनमोहन कालिया एनक्लेव में छह करोड़ की इनहांसमेंट और नगर निगम में एडवरटाइजमेंट को लेकर चंडीगढ़ से आई टीम ने बठिंडा में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट नगर निगम दफ्तर में दबिश दी। पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी। एक साल पहले गिरफ्तार किए गए रामपुरा फूल म्यूनिसिपल कमेटी के ईओ भूपेंद्र सिंह सरां को गिरफ्तार किया लेकिन नुकसान की भरपाई नहीं हो सकी है। वही साल 2012 में रामपुरा फूल शहर में नगर कौंसिल की ओर से बनाया गया सरकारी ‘कैटल पौंड’ रिकार्ड समेत गायब हो गया , जांच हुई खुलासा कुछ नहीं किया गया।
इससेपहले भी रामपुरा फूल नगर काउंसिल में हुए लाखों रुपए के घपले को दबाने के लिए स्थानीय निकाय विभाग के साथ पुलिस अधिकारियों ने भी पूरा जोर लगाया था। जिले के डिप्टी कमिश्नर, वित्त विभाग की आडिट विंग के साथ ही लोकल बॉडी के डायरेक्टर ने भी घपले संबंधी पुलिस के पास एफआईआर दर्ज करवाने के निर्देश दिए थे लेकिन राजनीतिक दबाव में इन आदेशों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया था। स्थानीय नगर काउंसिल के अधिकारियों ने वर्ष 2002 से वर्ष 2004 के दौरान अधिकारियों ने ठेकेदार को एक-एक काम के लिए चार चार बार अदायगी की। संदेह होने पर जब डीसी ने मामले की जांच कराई तो नगर काउंसिल के दो ईओ, दो पूर्व अध्यक्ष समेत कुल 8 लोग आरोपी पाए गए थे। डीसी ने इन सभी आरोपियों के विरुद्ध 2005 में पुलिस को पर्चा दर्ज करने के आदेश दिए थे। लेकिन पुलिस ने कार्रवाई करने के स्थान पर घपले से संबंधित सारे रिकार्ड को ही जला दिया था।
इससे पहले नगरकौंसिल रामपुरा की तत्कालीन काउंसलर सोनाली मित्तल और रजनी रानी ने 27 मार्त 2017 को एक पत्र लिखकर नगर कौंसिल रामपुरा में हुए घपलों की शिकायत कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू को भेजकर आरोप लगाया था कि आरोपी लोगों के खिलाफ मामला दर्ज होने के बावजूद किसी तरह की विभागीय कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने नगर कौंसिल रामपुरा फूल में हुए घपलों पर उप मजिस्ट्रेट की तरफ से किये फैसले को जल्द लागू करने की मांग की है। उन्होंने नवजोत सिंह सिद्धू को लिखे पत्र में लिखा कि था कि नगर कौंसल प्रधान सुनील कुमार बिट्टा, क्लर्क लक्ष्मण दास और धर्म सिंह ने कथित तौर पर नगर कौंसिल में बड़े स्तर पर अनियमितता की थी। इस मामले में भी जांच के नाम पर कागज जमा कर लिए गए लेकिन कारर्वाई आज तक नहीं हो सकी है। डीसी की ओर से उक्त दरखास्त एसडीएम फूल को इंक्वायरी के लिए भेजी। जिनकी तरफ से दोनों पक्षों को तलब कर उनके बयान लिए और नगर कौंसिल का रिकार्ड में बड़े स्तर पर वित्तीय घपला सामने आया। एसडीएम रामपुरा फूल की तरफ से अपनी इंक्वायरी बाद नगर कौंसिल रामपुरा फूल के प्रधान, संबंधित कार्य साधक अफ़सर और कर्मचारी धर्म सिंह और लक्ष्मण दास क्लर्क के खिलाफ पद का दुरुपयोग करने, सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने, रिकार्ड के साथ छेड़ छाड़ करने, हेराफेरी करके प्राईवेट व्यक्तियों को वित्तीय फायदा पहुंचाने और गलत नौकरी देने के आरोप सिद्ध करते हुए मुकदमा दर्ज करने और क्लर्क लक्ष्मण दास और धर्म सिंह को तुरंत निरस्त करने की सिफारिश की और’ दी पंजाब म्युनिसिपल एक्ट 911’की धारा 22 के अधीन प्रधान नगर कौंसिल को अध्यक्ष पद से बरखास्त करने की मांग को लेकर पंजाब सरकार स्थानीय निकाय विभाग को लिख कर कार्रवाई करने के लिए कहा था । शिकायत में कहा गया है कि आरोपी धर्म सिंह पिछले दिनों विभाग से सेवानिवृत भी हो चुका है इसके चलते विभाग उसको मिलने वाले भत्तों लाभ पर जांच पूरी होने तक रोक लगाए ताकि सरकारी खजाने में किसी तरह की चपत लगने से बचाया जा सके। इस मामले में भी जमीनी स्तर पर कुछ नहीं हो सका।
