व्यापार जगत की खबरे- संसेक्स में 368 अंक की तेजी के साथ 84,997 पर बंद, निफ्टी 26,000 के पार,चालू वित्त वर्ष में 7% की दर से बढ़ सकती है भारतीय अर्थव्यवस्था: सीईए
हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में तेजी का माहौल बना रहा। बुधवार को सेंसेक्स 368 अंकों की मजबूती के साथ 84,997 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी करीब 117 अंक चढ़कर 26,053 के स्तर पर बंद हुआ।
मुंबईः हफ्ते के तीसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में तेजी का माहौल बना रहा। बुधवार को सेंसेक्स 368 अंकों की मजबूती के साथ 84,997 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी करीब 117 अंक चढ़कर 26,053 के स्तर पर बंद हुआ।
एशियाई बाजारों में भी मिलाजुला रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई इंडेक्स 1,030 अंकों (2%) की तेजी के साथ 51,249 पर पहुंच गया। कोरिया का कोस्पी 50 अंक चढ़कर 4,060 पर है। हालांकि हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 87 अंक गिरकर 26,346 पर कारोबार कर रहा है, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 14 अंकों की मामूली बढ़त के साथ 4,002 पर है।
अमेरिकी बाजारों में सोमवार को सकारात्मक रुझान रहा। डाउ जोन्स 161 अंक बढ़कर 47,706 पर बंद हुआ, नैस्डेक कंपोजिट 190 अंक चढ़कर 23,827 पर पहुंचा, जबकि S&P 500 मामूली बढ़त के साथ 6,890 पर स्थिर बंद हुआ।
चालू वित्त वर्ष में 7% की दर से बढ़ सकती है भारतीय अर्थव्यवस्था: सीईए

नई दिल्लीः मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने बुधवार को कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था ने वैश्विक चुनौतियों का मजबूती से सामना किया है और वित्त वर्ष 2025-26 में देश की GDP वृद्धि दर सात प्रतिशत तक पहुंचने की पूरी संभावना है। “भारत समुद्री सप्ताह” कार्यक्रम में बोलते हुए नागेश्वरन ने कहा कि तीन प्रमुख वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने हाल ही में भारत की साख बढ़ाई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि मौजूदा नीतिगत रुख जारी रहा, तो भारत जल्द ही ‘A’ रेटिंग श्रेणी में शामिल हो सकता है।
CEA ने बताया कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के संयमित कदमों ने अर्थव्यवस्था को “आरामदायक स्थिति” में बनाए रखा है, बावजूद इसके कि दुनिया अभी भी कई अनिश्चितताओं और शुल्क-आधारित तनावों से जूझ रही है। उन्होंने कहा, “अर्थव्यवस्था की जुझारूपन ने भारत को वैश्विक अस्थिरता के बीच स्थिर बनाए रखा है।”
नागेश्वरन ने यह भी बताया कि आयकर राहत और वस्तु एवं सेवा कर (GST) को युक्तिसंगत बनाने जैसे नीतिगत कदमों ने विकास को गति दी है, जिससे अगले वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर सात प्रतिशत तक पहुंच सकती है। फरवरी में उन्होंने यह अनुमान 6.3% बताया था लेकिन अब उन्होंने इसे संशोधित कर सात प्रतिशत के करीब कर दिया है।
बैंक ऋण वृद्धि में सुस्ती की चिंताओं पर उन्होंने कहा, “हमें सिर्फ बैंक लोन पर नहीं, बल्कि पूरी वित्तीय प्रणाली में संसाधन जुटाने की तस्वीर को देखना चाहिए।” उन्होंने बताया कि गैर-बैंक ऋणदाताओं, वाणिज्यिक पत्रों और इक्विटी बाजारों के जरिए कुल संसाधन जुटाने में पिछले छह सालों में 28.5% सालाना की वृद्धि हुई है। इसी कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA) के चेयरमैन के. राजारामण ने कहा कि बंदरगाह, पोत-परिवहन और समुद्री उद्योग को 300 अरब डॉलर से अधिक की पूंजी की आवश्यकता होगी, और इस फंडिंग के लिए गिफ्ट सिटी एक मजबूत विकल्प साबित हो सकती है।
सरकार चीनी निर्यात की अनुमति दे सकती है, एथनॉल के कम उपयोग से अधिशेष बढ़ा
नई दिल्लीः सरकार 2025-26 विपणन वर्ष में चीनी के निर्यात की अनुमति देने पर विचार कर रही है क्योंकि एथनॉल उत्पादन के लिए चीनी के अपेक्षा से कम उपयोग के कारण अधिशेष भंडार जमा हो गया है। एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने बताया कि देश की चीनी मिलों ने 2024-25 में एथनॉल निर्माण के लिए केवल 34 लाख टन चीनी का ही उपयोग किया, जो अनुमानित 45 लाख टन से काफी कम है। उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप अक्टूबर से सितंबर तक चलने वाले चालू 2025-26 विपणन वर्ष के लिए शुरुआती भंडार अधिक है।
चोपड़ा ने कहा कि 2025-26 में चीनी उत्पादन 3.4 करोड़ टन तक पहुंचने की उम्मीद है जबकि वार्षिक घरेलू मांग 2.85 करोड़ टन है। निर्यात की अनुमति देने और एथनॉल के लिए अधिक उपयोग की अनुमति देने की उद्योग की मांगों के बारे में पूछे जाने पर चोपड़ा ने कहा, ‘‘हमारे पास निश्चित रूप से चीनी का अधिशेष है… हम निर्यात की अनुमति देने पर विचार कर रहे हैं।” उन्होंने संकेत दिया कि जल्द ही कोई निर्णय लिया जा सकता है क्योंकि सरकार उद्योग को निर्यात की योजना बनाने के लिए एक लंबा समय देना चाहती है। इस मुद्दे पर निर्णय लेने के लिए मंत्रियों की एक समिति अगले सप्ताह बैठक कर सकती है। भारत ने विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान 10 लाख टन के आवंटन के मुकाबले लगभग 8,00,000 टन चीनी का निर्यात किया।
चीनी निर्यात की व्यवहार्यता पर सचिव ने कहा, ‘‘वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय कीमतें परिष्कृत चीनी के लिए बहुत अनुकूल नहीं हैं। कच्ची चीनी के लिए कुछ निर्यात समता संभव हो सकती है।” चीनी का वर्तमान निर्यात मूल्य, ‘एक्स-मिल’ मूल्य से कम है। उन्होंने कहा, ‘‘वे शायद सही समय पर निर्यात करेंगे। शायद कच्ची चीनी का निर्यात हो भी जाए क्योंकि उसमें निर्यात समता है।” परिष्कृत चीनी का वैश्विक मूल्य 3,829 रुपए प्रति क्विंटल है जबकि औसत ‘एक्स-मिल’ मूल्य 3,885 रुपए प्रति क्विंटल है। एथनॉल के लिए चीनी के उपयोग के संबंध में चोपड़ा ने उद्योग की अधिक मात्रा की मांग पर सवाल उठाया जबकि मिलें सभी प्रतिबंध हटा लेने के बावजूद पिछले सत्र में आवंटित 45 लाख टन का उपयोग करने में विफल रहीं। सचिव ने हालांकि कहा कि यह मामला पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय से संबंधित है जो उनकी मांग पर विचार कर सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘पहले हमारा अनुमान 45 लाख टन का था लेकिन यह केवल 34 लाख टन ही हुआ और हमारे पास अधिशेष बचा है।” चोपड़ा ने बताया कि चीनी उद्योग ने अक्टूबर में समाप्त होने वाले 2024-25 एथनॉल आपूर्ति वर्ष में शीरे से 471 करोड़ लीटर एथनॉल की आपूर्ति की पेशकश की थी लेकिन केवल 289 करोड़ लीटर ही आपूर्ति की गई। उन्होंने कहा, ‘‘हमने शीरे से एथनॉल उत्पादन पर सभी प्रतिबंध हटा दिए हैं…लेकिन मक्का को सबसे बड़ा हिस्सा मिला है।” उन्होंने बताया कि इस सत्र के लिए अनुमानित 1,048 करोड़ लीटर की आपूर्ति में से 289 करोड़ लीटर गुड़ (28 प्रतिशत), 478 करोड़ लीटर मक्का (45 प्रतिशत) और 235 करोड़ लीटर चावल (22 प्रतिशत) से आया है। चोपड़ा ने कहा, ‘‘उपयोग की हमारी प्राथमिकता पहले घरेलू खपत, फिर एथनॉल और शेष निर्यात के लिए रही है।”
Gold–Silver Crash: सोना रु.12,000 और चांदी रु.36,000 तक लुढ़की- जानें आगे और कितना सस्ता होगा Gold

नई दिल्ली: त्योहारों की रौनक खत्म होते ही कीमती धातुओं की रफ्तार थम गई है। कुछ ही दिनों में सोना-चांदी की कीमतों में जबरदस्त गिरावट आई है, जिसने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। डॉलर की मजबूती और वैश्विक बाजारों में दबाव के चलते सोना लगभग ₹12,000 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹36,000 प्रति किलो तक टूट चुकी है। अब सवाल उठ रहा है — क्या यह खरीदारी का मौका है या गिरावट का सिलसिला अभी बाकी है?
इतिहास रचने के बाद गिरा सोना
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 24 कैरेट सोना ने 17 अक्टूबर को ₹1,30,874 प्रति 10 ग्राम का अब तक का सबसे ऊँचा स्तर छुआ था। लेकिन सिर्फ 12 दिनों में यह ₹1,18,043 पर आ गया — यानी कीमत में ₹12,831 की भारी गिरावट। वहीं चांदी ने 14 अक्टूबर को ₹1,78,100 प्रति किलो का ऑल-टाइम हाई बनाया था, जो अब घटकर ₹1,41,896 रह गया है। यानी लगभग ₹36,204 की भारी गिरावट। निवेशक अब “वेट एंड वॉच” मोड में हैं, जबकि बाजार में खरीदारी की रफ्तार थमी हुई है।
दिनभर में भी दिखा दबाव
मंगलवार को भी सोने-चांदी में उतार-चढ़ाव जारी रहा। दोपहर तक 24 कैरेट सोना ₹1,19,164 पर था, जो शाम तक गिरकर ₹1,18,043 पर पहुंच गया। यानी महज 5 घंटे में ₹1,121 का नुकसान। सोमवार की तुलना में कीमत ₹3,034 कम रही।
इसी तरह, चांदी दिनभर में ₹1,504 सस्ती हुई और ₹1,41,896 प्रति किलो पर बंद हुई।
MCX पर गोल्ड गिरा, चांदी में हल्का उछाल
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी सोना कमजोर दिखा। दिसंबर 2025 एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट में 1.26% की गिरावट आई और कीमत ₹1,19,429 प्रति 10 ग्राम रही। ट्रेडिंग के दौरान लो लेवल ₹1,17,628 और हाई ₹1,20,106 का रहा।
वहीं, चांदी में दिन के आखिर में हल्की रिकवरी दिखी — 0.27% की बढ़त के साथ यह ₹1,43,750 प्रति किलो पर पहुंच गई।