पाकिस्तान ने अमेरिका को सौंप दिए थे परमाणु हथियार:खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व अफसर बोले- हमने मुशर्रफ को ‘खरीद’ लिया था

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Pakistans Nuclear Weapons To US: पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने अपने देश के परमाणु हथियारों का नियंत्रण अमेरिका को सौंप देने की खबर ने सबको हैरान कर दिया है। इस बात का खुलासा अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व अफसर जॉन किरियाकू ने किया है। किरियाकू ने कहा कि अमेरिका ने मुशर्रफ को लाखों डॉलर देकर इन परमाणु हथियारों को ‘खरीद’ लिया था। मुशर्रफ के शासनकाल में अमेरिका को पाकिस्तान की सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों में हस्तक्षेप करने की पूरी ताकत थी। इस वजह से वह अपने हिसाब से उसका इस्तेमाल कर सकती थी। हमने लाखों डॉलर की सैन्य और आर्थिक मदद देकर मुशर्रफ ने हमें सब कुछ करने की आजादी दे दी।

किरियाकू ने कहा कि मुशर्रफ दोहरे खेल खेल रहे थे। उन्होंने एक तरफ अमेरिका के साथ दिखावा किया और दूसरी ओर पाकिस्तान की सेना और चरमपंथियों को भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को लगातार बढ़ावा दिया। 2002 में भारत और पाकिस्तान युद्ध के कगार पर पहुंच गए थे। इस दौरान हमने इस्लामाबाद से अमेरिकी अधिकारियों के परिवारों को निकाल लिया था।
2001 में संसद हमले के बाद भारत द्वारा ऑपरेशन पराक्रम का शुरू किया। अमेरिकी उप विदेश मंत्री ने दिल्ली और इस्लामाबाद का दौरा कर दोनों देशों के बीच समझौता करवाया। 2008 मुंबई हमलों को लेकर भी पूरी बात रखी। पाकिस्तान भारत में आतंकवाद फैलाने का काम कर रहा था।
पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर खान को अमेरिकी कार्रवाई से बचाने में सऊदी अरब ने बचाया। अमेरिका लोकतंत्र का ढोंग करता है, लेकिन वास्तव में अपने स्वार्थ के अनुसार काम करता है। सऊदी और अमेरिका का रिश्ता लेन-देन पर आधारित है, अमेरिका तेल खरीदता है और सऊदी हथियार लेता है।

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने अपने देश के परमाणु हथियारों का नियंत्रण अमेरिका को सौंप दिया था। अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व अफसर जॉन किरियाकू ने शुक्रवार को यह दावा किया है। किरियाकू ने कहा कि अमेरिका ने मुशर्रफ को लाखों डॉलर की मदद के जरिए ‘खरीद’ लिया था। उनके शासनकाल में अमेरिका को पाकिस्तान की सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों तक लगभग पूरी पहुंच थी। उन्होंने कहा,

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हमने लाखों डॉलर की सैन्य और आर्थिक मदद दी। बदले में मुशर्रफ ने हमें सब कुछ करने दिया।

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किरियाकू ने यह बयान न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में दिया। उन्होंने यह भी कहा कि मुशर्रफ ने दोहरे खेल खेले। उन्होंने एक तरफ अमेरिका के साथ दिखावा किया और दूसरी ओर पाकिस्तान की सेना और चरमपंथियों को भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियां जारी रखने दिया।

‘2002 में भारत-पाकिस्तान युद्ध होने वाला था’

किरियाकू ने बताया कि 2002 में भारत और पाकिस्तान युद्ध के कगार पर थे। उन्होंने कहा,

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इस्लामाबाद से अमेरिकी अधिकारियों के परिवारों को निकाल लिया गया था। हमें लगा कि भारत और पाकिस्तान युद्ध में उतर सकते हैं।

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उन्होंने 2001 में संसद हमले के बाद भारत द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन पराक्रम का जिक्र किया। किरियाकू ने दावा किया कि अमेरिकी उप विदेश मंत्री ने दिल्ली और इस्लामाबाद का दौरा कर दोनों देशों के बीच समझौता करवाया। 2008 मुंबई हमलों पर बात करते हुए किरियाकू ने कहा कि

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मुझे नहीं लगता था कि यह अल-कायदा है। मुझे हमेशा लगता रहा कि ये पाकिस्तान समर्थित आतंकी समूह थे। और ऐसा ही साबित हुआ। असली कहानी यह थी कि पाकिस्तान भारत में आतंकवाद फैला रहा था और किसी ने कुछ नहीं किया।

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किरियाकू ने कहा कि भारत ने संसद और मुंबई हमलों के बाद संयम दिखाया।
किरियाकू ने कहा कि भारत ने संसद और मुंबई हमलों के बाद संयम दिखाया।

PAK परमाणु वैज्ञानिक को सऊदी ने बचाया

पूर्व CIA अधिकारी ने यह भी खुलासा किया कि पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर खान को अमेरिकी कार्रवाई से बचाने में सऊदी अरब का अहम रोल था। सऊदी ने अमेरिका को कहा कि खान को न छेड़ा जाए, जिससे अमेरिका ने अपने प्लान को छोड़ दिया।

किरियाकू ने अमेरिकी विदेश नीति पर भी सवाल उठाया और कहा कि अमेरिका लोकतंत्र का ढोंग करता है, लेकिन वास्तव में अपने स्वार्थ के अनुसार काम करता है। उन्होंने यह भी बताया कि सऊदी और अमेरिका का रिश्ता पूरी तरह लेन-देन पर आधारित है, अमेरिका तेल खरीदता है और सऊदी हथियार।

किरियाकू ने कहा कि वैश्विक ताकतों का संतुलन बदल रहा है और सऊदी अरब, चीन और भारत अपनी रणनीतिक भूमिका को नया आकार दे रहे हैं।

महिलाओं के कपड़े पहनकर भागा था आतंकी लादेन

किरियाकू ने खुलासा किया है कि 9/11 आतंकी हमले का जिम्मेदार और अलकायदा का लीडर ओसामा बिन लादेन तुरा बोरा की पहाड़ियों से महिला के कपड़े पहनकर भागा था।

किरियाकू ने बताया कि उस समय उन्हें यह भी नहीं पता था कि सेंट्रल कमांड के कमांडर के लिए काम करने वाला ट्रांसलेटर असल में अल-कायदा का एजेंट था, जिसने अमेरिकी सेना में घुसपैठ की थी।

उन्होंने कहा,

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हम अफगानिस्तान पर बमबारी शुरू करने से पहले एक महीने से अधिक इंतजार कर रहे थे। अक्टूबर 2001 में हमें लगा कि हमने बिन लादेन और अल-कायदा के नेताओं को तुरा बोरा में फंसा लिया है। हम उन्हें पहाड़ी से उतरने के लिए कह रहे थे। ट्रांसलेटर ने जनरल फ्रैंक्स को आश्वस्त किया कि उन्हें सुबह तक इंतजार करने दिया जाए ताकि महिलाएं और बच्चे सुरक्षित बाहर निकल सकें। उसी दौरान बिन लादेन महिला के वेश में पिक-अप ट्रक में पाकिस्तान भाग गया।

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सुबह जब सूरज उगा, तुरा बोरा में कोई नहीं था। सभी भाग चुके थे। इसके बाद की लड़ाई पाकिस्तान में आगे बढ़ी। बाद में अमेरिका ने मई 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में बिन लादेन का पता लगाया और मार गिराया।

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