पंजाब के पूर्व CM बेअंत सिंह की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि जब उन्होंने इसे गंभीर अपराध की श्रेणी में माना तो फिर अब तक बलवंत सिंह राजोआणा को फांसी क्यों नहीं दी गई?। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट राजोआणा की मर्सी पिटीशन पर सुनवाई में देरी के आधार पर उसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की याचिका पर सुनवाई कर रहा था।
केस की सुनवाई शुरू होने पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने राजोआणा की सजा घटाने की याचिका का विरोध किया। इस पर जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस एनवी अंजारिया और जस्टिस संदीप मेहता ने पूछा-
आपने अब तक उसे फांसी क्यों नहीं दी? इसके लिए कौन जिम्मेदार है? कम से कम हमने तो फांसी पर रोक नहीं लगाई।

सुप्रीम कोर्ट के इन तल्ख सवालों पर केएम नटराज ने कहा कि वह इस बारे में जल्द से जल्द जवाब देंगे। इसके बाद मामले की सुनवाई 15 अक्टूबर तक के लिए टाल दी गई। कोर्ट ने ये भी कहा कि केंद्र के कहने पर दोबारा इस मामले को स्थगित नहीं किया जाएगा।
राजोआणा के पक्ष में ये दलीलें दी गईं
- 29 साल से जेल में, 15 साल की सजा काट रहा: बलवंत सिंह राजोआणा की तरफ से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी पेश हुए। उन्होंने दलील दी कि राजोआणा 29 साल से अधिक समय से जेल में बंद है। यह व्यक्ति 15 साल से मौत की सज़ा काट रहा है। इसलिए जब पिछली बार याचिका दायर की गई तो कोर्ट ने कहा कि यह दया याचिका उसने नहीं गुरुद्वारा समिति ने दायर की है। मगर, प्रावधानों के मुताबिक याचिका कौन दायर करता है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। इस पर विचार किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा था कि इतना समय बीत चुका, कभी न कभी इस पर फैसला करना पड़ेगा, इस बात को भी ढाई साल बीत गए।
- पिछली बार से अब तक कुछ नहीं हुआ: मुकुल रोहतगी ने आगे कहा कि इस पर कुछ नहीं हुआ। इस वजह से उन्होंने 2024 में एक और याचिका दायर की। इस याचिका पर जनवरी में पारित अंतिम आदेश में चीफ जस्टिस बी.आर. गवई, जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की स्पेशल बेंच ने केंद्र को उसकी दया याचिका पर फैसला करने का आखिरी मौका दिया था। अदालत ने कहा था कि यदि केंद्र ऐसा करने में विफल रहता है तो याचिका पर अंतिम फैसला अदालत द्वारा किया जाएगा।
10 महीने पहले भाई के भोग में शामिल हुआ था राजोआणा 20 नवंबर, 2024 को 3 घंटे के लिए जेल से बाहर आया था। सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक वह लुधियाना के राजोआणा कलां गांव में मंजी साहिब गुरुद्वारे में अपने भाई कुलवंत सिंह के भोग कार्यक्रम में शामिल हुआ था। इसके बाद कड़ी सुरक्षा में उसे वापस पटियाला की जेल में ले जाया गया। राजोआणा ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से भोग में शामिल होने के लिए पैरोल मांगी थी। इससे पहले जनवरी 2022 में हाईकोर्ट ने उसे पिता की मौत के बाद भोग और अंतिम अरदास में शामिल होने की इजाजत दी थी।

बलवंत सिंह राजोआणा पर यह केस बलवंत राजोआणा को 27 जुलाई, 2007 को CBI की एक विशेष अदालत ने IPC की धारा 120-बी, 302, 307 और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 की धारा 3(बी), 4(बी) और 5(बी) के साथ धारा 6 के तहत दोषी ठहराया था। 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ सचिवालय परिसर में आत्मघाती बम हमला हुआ था, जिसमें पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह सहित 16 अन्य लोगों की हत्या कर दी गई थी।
